भारतीय पत्रकारिता महोत्सव में 4पीएम की गूंज
पत्रकारों पर हमलों के खिलाफ साझा लड़ाई का संकल्प

- इंदौर में 22 राज्यों के प्रेस क्लब जुटे
- शाहीन-नफीसा खान से लेकर भिंड के पत्रकारों पर हमले तक उठे सवाल?
- संजय शर्मा ने मीडिया पर बढ़ते दबाव की रखी तस्वीर
- शाहीन और नफीसा की कहानी ने खींचा ध्यान
संजीव श्रीवास्तव/4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
इंदौर। देशभर के पत्रकार जब इंदौर में एक मंच पर जुटे तो चर्चा सिर्फ पत्रकारिता की चुनौतियों तक सीमित नहीं रही। सवाल उन हालात पर भी उठा जिनमें खबर करने वाले पत्रकार ही सत्ता पुलिस और प्रभावशाली लोगों के दबाव का सामना कर रहे हैं। इसी बहस के केंद्र में रहा 4पीएम और उसकी पत्रकारिता। स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश के तीन दिवसीय भारतीय पत्रकारिता महोत्सव के 18वें संस्करण में देश के 22 राज्यों के प्रेस क्लबों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। 2 से 4 अक्टूबर तक चले आयोजन में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े 150 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
सार्क मीडिया फोरम की भागीदारी ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान कर दिया। नेपाल से फोरम के अध्यक्ष राजू लामा बांग्लादेश से महासचिव अब्दुर रहमान और फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट प्रेस क्लब नई दिल्ली के महासचिव प्रकाश नंदा समेत देशभर के पत्रकार और मीडिया प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद रहे। एक मुद्दा बार बार सामने आया और वह मुददा था दिल्ली में रिपोर्टिंग के दौरान 4पीएम के पत्रकारों पर हमला। और इस पूरे प्रकरण के अनुभव चर्चा के केंद्र में रहे। फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स के मंच पर 4पीएम की दिल्ली संवाददाता शाहीन खान और सोशल मीडिया जर्नलिस्ट नफीसा खान ने सितंबर में दिल्ली में रिपोर्टिंग के दौरान अपने साथ हुई पुलिस कार्रवाई का अनुभव साझा किया। 3 सितंबर को रिपोर्टिंग के दौरान हुई घटना को लेकर दोनों ने मंच से अपना पक्ष रखा। पत्रकारों ने अपनी आपबीती सुनाई। आयोजन में 4पीएम के संपादक संजय शर्मा की ओर से दोनों पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख हुआ। मंच पर मौजूद पत्रकारों ने इस पूरे प्रकरण को सिर्फ दो पत्रकारों का मामला नहीं माना बल्कि रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों से जुड़े बड़े सवाल के रूप में चर्चा की।
4पीएम संपादक संजय शर्मा ने रखी मीडिया की तस्वीर
भारतीय पत्रकारिता महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित अश्वमेध की दौड़ कहां तक सत्र में 4पीएम के प्रमुख संजय शर्मा विशेष वक्ता के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में उन्होंने बोलते हुए कहा कि पत्रकारिता के सामने मौजूद चुनौतियों सत्ता और मीडिया के संबंध तथा सवाल पूछने वाले पत्रकारों पर बढ़ते दबाव मौजूदा समय की चुनौतियां हैं जिन्हें हम स्वीकार कर आगे बढऩा है और अपनी बात रखनी है। उन्होंने कामकाज के दौरान सामने आई चुनौतियों और चैनल पर हुई कार्रवाइयों का सिलसिलेवार जिक्र करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद 4पीएम ने अपनी पत्रकारिता और सवाल पूछने की आजादी जिंदा रक्षा रखी उन्होंने 4पीएम के सफर से जुड़े अपनी संघर्षशील पत्रकारिता के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि पत्रकारिता की ताकत सिर्फ खबर प्रकाशित करने में नहीं बल्कि सवाल पूछने और असुविधाजनक मुद्दों को सामने लाने की क्षमता में है। संजय शर्मा ने 4पीएम चैनल पर हुई कार्रवाईयों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने पूरी ताकत के साथ दमनात्मक कार्रवाई की। चैनल को बंद किया गया जांच के नाम पर डराया गया लेकिन 4पीएम कभी डरा नहीं घबराया नहीं हम कोर्ट गये और वहां से हमे न्याय मिला। इसलिए सच की राज में जब कभी भी सरकार आप पर कार्रवाई करे या फिर डराये तो डरिये मत डट कर मुकाबला कीजिए।

भिंड के पत्रकारों ने भी सुनाई संघर्ष की कहानी
मध्यप्रदेश के भिंड में रेत खनन से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर हुए हमले का मुद्दा भी महोत्सव में चर्चा का विषय बना। भिंड के पत्रकार अमरकांत चौहान और शशिकांत गोयल ने भी मंच से अपने अनुभव साझा किए। दोनों ने रेत खनन से जुड़े गठजोड़ और पत्रकारों पर हुई कार्रवाई को लेकर अपनी बात रखी। दोनों पत्रकारों ने बताया कि इस पूरे मामले की रिपोर्टिंग को 4पीएम द्वारा प्रमुखता दिए जाने से उनकी आवाज व्यापक स्तर तक पहुंची। उन्होंने पत्रकारों को मिले मार्गदर्शन और सहयोग के लिए स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का भी धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि प्रकरण में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से मिली कानूनी सहायता से मदद मिली।
डॉ. उत्कर्ष सिन्हा ने खूब बटोरी तालियां
यूपी के ख्यातनाम पत्रकार, चिंतक-लेखक, विचारक और टिप्पणीकार डॉ.उत्कर्ष सिन्हा भी आयोजन का हिस्सा रहे। क्लब के ‘अश्वमेध की दौड़ कहां तक’ सत्र के वक्ता के तौर पर अपने धारदार विचारों से डॉ. सिन्हा ने दर्शकों की जबरदस्त तालियां बटोरीं। अन्य सत्र के विषय ‘राजनीति की दाईं-बांईं करवट’ में डॉ. सिन्हा के साथ-साथ 4पीएम के कार्यक्रमों में विशेष मेहमान रहने वाले दिनेश के.वोहरा और फ्री लांस जर्नलिस्ट रवींद्र सिंह श्योराण ने भी अपने ओजस्वी एवं प्रभावशाली विचारों से समां बांधा। इनके विचारों को श्रोताओं ने मुक्त कंठ से सराहा। 4 पीएम के मध्यप्रदेश के संपादक एवं स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश के कार्यक्रम समन्वयक संजीव श्रीवास्तव ने विभिन्न सत्रों का संचालन किया।
मीडिया संस्थानों पर बढ़ते दबाव को लेकर चर्चा
मीडिया संस्थानों पर बढ़ते दबाव को लेकर चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने कहा कि पत्रकारों को लड़ाई मिलकर लडऩी होगी वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहे थे। उन्होंने पत्रकारों पर होने वाले हमलों और अन्याय के मामलों को अलगअलग घटनाओं के रूप में देखने के बजाय इनके खिलाफ साझा मंच तैयार करने की जरूरत बताई। गर्ग ने कहा कि पत्रकारों और मीडियाकर्मियों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई के मामलों में पत्रकार संगठनों को एकजुट होकर पीड़ितों के साथ खड़ा होना चाहिए। उनके इस आह्वान ने कार्यक्रम में मौजूद विभिन्न प्रेस क्लबों के प्रतिनिधियों के बीच पत्रकार सुरक्षा को लेकर साझा रणनीति की चर्चा को आगे बढ़ाया। फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स के अध्यक्ष और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी ने फेडरेशन की आगामी गतिविधियों और तैयारियों की जानकारी दी। वहीं अपनें संबोधन में श्रवण गर्ग ने आव्हान किया। ‘फेडरेशन, पत्रकारों पर अन्याय अत्याचार की लड़ाई की संयुक्त रणनीति बनाए। पीडि़त पत्रकारों एवं मीडियाकर्मियों की लड़ाई को पूरी ताकत से लड़े।’ फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स के अध्यक्ष एवं प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी ने फेडरेशन की भावी तैयारियों एवं रणनीति की तस्वीर पेश की।
24 पत्रकारों को मिला सप्तऋषि सम्मान
महोत्सव के दौरान मध्यप्रदेश के 12 पत्रकारों को राज्य स्तरीय और देश के 12 मीडिया कर्मियों को राष्ट्रीय स्तर के सम्मान से नवाजा गया। समापन समारोह में मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विपक्ष के नेता और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन 4पीएम के मध्यप्रदेश संपादक एवं भारतीय पत्रकारिता महोत्सव के कार्यक्रम समन्वयक संजीव श्रीवास्तव ने विभिन्न सत्रों में किया। बड़ा सवाल यही रहा कि खबर लिखने वाला जब खुद खबर बन जाए तब उसके साथ कौन खड़ा होगा इंदौर के मंच से इस सवाल का जवाब एक आवाज में सुनाई दिया कि पत्रकार अकेला नहीं होना चाहिए। पत्रकार पर हमला हो तो पत्रकार बिरादरी को उसके साथ खड़ा होना होगा।
पत्रकारों की कानूनी लड़ाई के लिए बनेगा समूह
फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स आयोजन के विशेष अतिथि एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अभय दुबे ने एलान किया कि पत्रकारों के खिलाफ अन्याय और अत्याचार के मामलों में कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक समूह बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पत्रकारों और मीडियाकर्मियों के साथ खड़े होने के लिए कांग्रेस की ओर से प्रयास किए जाएंगे। दुबे ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की अगुवाई में वरिष्ठ वकीलों का एक समूह तैयार किए जाने की घोषणा भी की। अभय दुबे के इस एलान से पत्रकारों की कानूनी सुरक्षा के सवाल को एक नया आयाम दिया।
शाहीन और नफीसा खान का मामला हो, भिंड के पत्रकारों की कहानी हो या संजय शर्मा का संबोधन अलग अलग सत्रों में 4पीएम की रिपोर्टिंग और पत्रकारों के संघर्ष का संदर्भ सामने आता रहा। यही इस महोत्सव की खास बात रही कि पत्रकारिता पर बहस केवल तकनीक, डिजिटल मीडिया और बदलते न्यूज़ बिजनेस मॉडल तक सीमित नहीं रही बल्कि पत्रकार की सुरक्षा, स्वतंत्रता और कानूनी संरक्षण भी बहस के केंद्र में रहे। संजय शर्मा ने स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की। 18 वर्षों से आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम ने देशभर के पत्रकारों और प्रेस क्लबों को एक मंच पर लाने में भूमिका निभाई है। इस वर्ष भी 22 राज्यों के प्रेस क्लबों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया। तीन दिनों में पत्रकारिता, राजनीति, मीडिया की बदलती भूमिका और पत्रकारों के सामने मौजूद चुनौतियों से जुड़े नौ सत्र आयोजित किए गए।
पीढ़ी परिवर्तन की बेला है: मप्र विधानसभा अध्यक्ष तोमर
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मैं समझता हूं कि वर्तमान समय पीढ़ी के परिवर्तन की बेला है। इस बेला में हम सबको अपने मन का दायरा बढ़ाना चाहिए, नये आयामों पर दृष्टि डालनी चाहिए और जो पीढ़ी भविष्य में हमसे ‘चार्ज’ (कमान) लेने वाली है, उसका स्वागत-अभिनंदन करना चाहिए। विस अध्यक्ष कहा कि पुरानी और नयी पीढ़ी के बीच सोच का अंतर जरूर हो सकता है, लेकिन उन्हें ऐसा मानने का कोई कारण समझ नहीं आता कि नयी पीढ़ी गलत दिशा में ही सोचेगी। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं परिवर्तन को प्रकृति का नियम मानती हैं और हर कालखंड में बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया रहा है। मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने ‘जेन-जी’ के बजाय ‘तरुण भारत‘ शब्द के इस्तेमाल की वकालत की है। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक परंपराओं के मुताबिक परिवर्तन प्रकृति का नियम है और नयी पीढ़ी का खुले दिल से स्वागत किया जाना चाहिए। ‘जेन-जी’ (जेनरेशन जेड) से तात्पर्य उस पीढ़ी से है जिसका जन्म मुख्य रूप से वर्ष 1997 से 2012 के बीच हुआ है। तोमर ने इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब के भारतीय पत्रकारिता महोत्सव में कहा कि निश्चित रूप से आज जेन-जी की बात सभी तरफ होती है, लेकिन मैं आग्रह करना चाहता हूं कि अगर हम ‘जेन-जी’ के बजाय ‘तरुण भारत’ शब्द का उपयोग करें, तो यह ज्यादा उत्तम होगा। उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी देश-दुनिया में ऐसे चमत्कार कर रही है जो सबके लिए आश्चर्यजनक हैं।



