RBI MPC: मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक शुरू,7 अक्टूबर को साफ होगी ब्याज दरों की तस्वीर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अक्टूबर बैठक आज, 5 अक्टूबर से शुरू हो गई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अक्टूबर बैठक आज, 5 अक्टूबर से शुरू हो गई है। तीन दिन तक चलने वाली यह बैठक 7 अक्टूबर को समाप्त होगी और इसी दिन RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति का ऐलान करेंगे। बैठक में सबसे बड़ा फोकस रेपो रेट, महंगाई के मौजूदा दबाव और अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर रहेगा।

मौद्रिक नीति की इस समीक्षा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछली कई बैठकों में रेपो रेट को स्थिर रखने के बाद अब महंगाई के दबाव में बदलाव देखने को मिला है। अगस्त की बैठक में RBI ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। अब बाजार और अर्थशास्त्रियों की नजर इस बात पर है कि केंद्रीय बैंक अक्टूबर में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है।

7 अक्टूबर को होगा RBI के फैसले का ऐलान

RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति 5 से 7 अक्टूबर तक बैठक करेगी। बैठक के दौरान समिति महंगाई, आर्थिक विकास, बैंकिंग सिस्टम में तरलता, वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की स्थिति समेत कई आर्थिक संकेतकों का आकलन करेगी। इसके बाद 7 अक्टूबर को मौद्रिक नीति का फैसला सामने आएगा। बाजार की नजर खास तौर पर रेपो रेट और MPC के नीति रुख पर रहेगी।

क्या बढ़ सकता है रेपो रेट?

इस बैठक से पहले ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चर्चा तेज हुई है। करीब 60 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने अक्टूबर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है। अगर ऐसा होता है तो रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो सकता है। हालांकि यह केवल अर्थशास्त्रियों और बाजार की अपेक्षा है। RBI का वास्तविक फैसला MPC की बैठक के बाद ही सामने आएगा।

महंगाई बनी RBI के लिए बड़ी चुनौती

रेपो रेट को लेकर RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई का बढ़ता दबाव है। अगस्त 2026 में भारत की उपभोक्ता महंगाई दर 4.82 प्रतिशत रही, जो RBI के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर है। अगस्त में महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के लक्ष्य से ऊपर रही। महंगाई का दबाव अब केवल कुछ चुनिंदा खाद्य वस्तुओं तक सीमित रहने के बजाय व्यापक होता दिखाई दे रहा है। ऐसे में RBI के लिए विकास को समर्थन देने और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने के बीच संतुलन महत्वपूर्ण हो गया है।

मजबूत आर्थिक विकास भी अहम फैक्टर

दूसरी तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत बनी हुई है।अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर करीब 7.8 प्रतिशत रही। मजबूत आर्थिक गतिविधियों और बैंक क्रेडिट में वृद्धि ने भी ब्याज दरों पर RBI के अगले कदम को लेकर बाजार की चर्चा बढ़ा दी है।  यानी RBI के सामने एक तरफ महंगाई का दबाव है, जबकि दूसरी तरफ घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूत मांग और विकास की स्थिति है। यही वजह है कि अक्टूबर की बैठक को बाजार बेहद करीब से देख रहा है।

कच्चे तेल और रुपये पर भी नजर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी से घरेलू महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है।

इसके अलावा रुपये की स्थिति भी RBI के लिए महत्वपूर्ण है।  2026 में अब तक भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत कमजोर हुआ है। कमजोर रुपये से आयात महंगा हो सकता है और इससे महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पैदा होने की आशंका रहती है।

अगर रेपो रेट बढ़ा तो आम लोगों पर क्या असर होगा?

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक फंड उपलब्ध कराता है। इसमें बदलाव का असर बैंकिंग सिस्टम के जरिए लोन और अन्य ब्याज दरों पर पड़ सकता है।

अगर RBI रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है तो नए कर्ज की ब्याज दरों पर दबाव बढ़ सकता है। होम लोन, ऑटो लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक अपनी lending rates में कितना बदलाव करते हैं। दूसरी ओर, ब्याज दरों में बढ़ोतरी से फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य ब्याज आधारित बचत उत्पादों की दरों में भी समय के साथ बदलाव देखने को मिल सकता है।

बाजार की नजर RBI के रुख पर

इस बार सिर्फ रेपो रेट ही नहीं, बल्कि RBI के मौद्रिक नीति रुख (policy stance) पर भी बाजार की नजर रहेगी। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि अक्टूबर का फैसला केवल एक बार का कदम है या आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा में बदलाव का संकेत देता है। बाजारों में अब आगे भी दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं, जबकि कुछ विश्लेषक मानते हैं कि RBI को महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच अपना रुख अधिक सख्त करना पड़ सकता है।

पिछली नीति बैठक में क्या हुआ था?

RBI की अगस्त 2026 की MPC बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा गया था। अब अक्टूबर की बैठक में परिस्थितियां कुछ बदली हुई हैं और महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित किया है। यही वजह है कि 7 अक्टूबर का फैसला घरेलू शेयर बाजार, बॉन्ड मार्केट, बैंकिंग सेक्टर, कर्ज लेने वालों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब 7 अक्टूबर का इंतजार

फिलहाल RBI की MPC बैठक शुरू हो चुकी है और अगले दो दिनों में समिति आर्थिक परिस्थितियों का विस्तृत आकलन करेगी। असली तस्वीर 7 अक्टूबर को साफ होगी, जब RBI गवर्नर मौद्रिक नीति के फैसले का ऐलान करेंगे। बाजार में 25 बेसिस पॉइंट की संभावित बढ़ोतरी को लेकर चर्चा जरूर तेज है, लेकिन अंतिम फैसला RBI की मौद्रिक नीति समिति के आकलन पर निर्भर करेगा। महंगाई, आर्थिक विकास, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां इस फैसले के प्रमुख आधार हो सकते हैं।

 RBI की अक्टूबर मौद्रिक नीति समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत है, लेकिन महंगाई RBI के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इसलिए 7 अक्टूबर का फैसला केवल रेपो रेट की दिशा ही नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों और वित्तीय बाजारों के रुख के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।

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