जनयुद्व की आहट
घबरायी मोदी सरकार का पलटवार तड़ातड़ राहुल गांधी पर तीन एफआईआर

- 10 अक्टूबर मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा का दिन कैसे हैंडल करेगी राहुल के आक्रमण को
- पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करने के अलावा कोई काम नहीं रह गया है : अखिलेश यादव
- जंतर मंतर पर छेड़ा गया आंदोलन क्या अब बेकाबू हो रहा है
- एफआईआर आंदोलन को रोक रही है या उसे और बड़ा बना रही
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली की सड़क पर पहले बैरिकेड आए फिर पुलिस आयी फिर हिरासत हुयी और अब एफआईआर पर एफआईआर दर्ज हो रही है। मौजूदा हालात में जंतर मंतर पर छेड़ा गया आंदोलन क्या अब बेकाबू हो रहा है। क्या आंदोलन जनयुद्व में बदल रहा है क्योंकि सवाल यह है कि क्या हर एफआईआर आंदोलन को रोक रही है या उसे और बड़ा बना रही है।
कहानी अब सिर्फ राहुल गांधी की नहीं रह गई है एक तरफ राहुल गांधी हैं दूसरी तरफ प्रियंका गांधी हैं साथ में अखिलेश यादव और इंडिया ब्लॉक के दूसरे चेहरे हैं। महाराष्ट्र में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक मंच पर आ चुके हैं। सड़कों पर छात्र हैं युवा हैं और वह नया राजनीतिक गुस्सा भी है जिसे किसी एक पार्टी के झंडे में बांधना आसान नहीं है। और इसी बीच पक्की खबर आ चुकी है कि दिल्ली पुलिस ने कल के प्रदर्शन को लेकर तीन नयी एफआईआर दर्ज कर ली हैं। आरोप गंभीर हैं पुलिसकर्मियों से मारपीट सरकारी काम में बाधा धक्का-मुक्की और दुव्र्यवहार।
सवालों का जवाब नहीं तो सड़क ही बचती है
राहुल गांधी लगातार कह रहे हैं कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। विपक्ष चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने कहा है कि विपक्षी सांसदों की ओर से बैठक की प्रक्रिया निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं थी और उसने एक वरिष्ठ अधिकारी के जरिए ज्ञापन लेने का प्रस्ताव दिया था जिसे विपक्ष ने स्वीकार नहीं किया। यानी दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं लेकिन जमीन पर तस्वीर एक ही है कि तनाव बढ़ रहा है। सभी को पता है कि आंदोलन जितना बड़ा होगा उसकी नैतिक जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होगी क्योंकि जनआंदोलन की ताकत भीड़ के साथ उसके मुद्दे में भी होती है और इस बार मुद्दा बड़ा है वार बड़ा और संघर्ष तो पूछिये मत दिल्ली की घटनाओं को अगर मुंबई की तस्वीर से जोड़कर देखें तो एक पैटर्न दिखाई देता है। विभिन्न दल चुनाव आयोग एसआईआर और वोटर लिस्ट के सवाल पर अलग अलग जगह आवाज उठा रहे हैं।
अखिलेश का राहुल को खुला साथ
इस लड़ाई का दूसरा बड़ा चेहरा अखिलेश यादव हैं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव दिल्ली के प्रदर्शन में राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं के साथ शरीक हुए। अखिलेश यादव ने राहुल गांधी के ऊपर दर्ज हुई एफआईआर पर कहा है कि दिल्ली पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करने के अलावा कोई काम नहीं है उनकी कही यह लाइन छोटी है लेकिन इसका राजनीतिक असर बड़ा है। क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी पहले ही विपक्षी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। अब अगर चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट का सवाल दोनों नेता एक साथ सड़क पर उठाते हैं तो इसका सीधा संदेश है कि मुद्दा कांग्रेस का नहीं विपक्ष का है और कहानी दिल्ली तक सीमित नहीं अगर सिर्फ दिल्ली की तस्वीर देखेंगे तो कहानी अधूरी रह जाएगी। महाराष्ट्र में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे लंबे समय बाद एक मंच पर आए।
जनयुद्व में बदलता आंदोलन
पिछले दो दिनों में दिल्ली में जो हुआ वह सामान्य राजनीतिक प्रदर्शन जैसा नहीं दिख रहा। राहुल गांधी और विपक्षी सांसद पहले चुनाव आयोग तक पहुंचने निकले। रोका गया। राहुल फिर धरना हुआ हिरासत हुयी फिर अगले दिन फिर प्रदर्शन हुआ फिर हिरासत हुयी और आज का दिन राहुल गांधी के लिए तीन नयी एफआईआर लेकर आया है। राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं कि एफआईआर उनके लिए मेडल हैं। उनका यह वक्तव्य साफ दर्शता हैं कि राहुल गांधी पीछे हटने को तैयार नहीं है उनका कहना है कि लड़ाई संविधान और लोकतंत्र के लिए है। अखिलेश यादव दिल्ली पुलिस पर हमला बोलते हुए कह चुके हैं कि पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करने के अलावा कोई काम नहीं रह गया है और महाराष्ट्र में तस्वीर और दिलचस्प है राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे जिन्होंने लंबे समय से अलग अलग राजनीतिक रास्ते पकड़े हुए हैं वह इस मुद्दे पर एक ही मंच पर साथ आ चुके हैं। दोनों दलों ने अपने पार्टी झंडों के बजाय तिरंगा सामने रखा है। यानी सवाल अब सिर्फ दिल्ली का नहीं है दिल्ली में राहुल लखनऊ में अखिलेश मुंबई में ठाकरे बंधु और सड़कों पर युवा बताने के लिए काफी है कि अलग अलग दिशाओं में उठ रही ये आवाजें किसी बड़े राजनीतिक आंदोलन की जमीन तैयार कर रही हैं।
घबराई सरकार ताबड़तोड़ एफआईआर
दिल्ली में कहानी तेजी से बदल रही है। प्रदर्शन धरना और हिरासत के बीच दिल्ली पुलिस ने तीन नई एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस के मुताबिक मामलों में पुलिसकर्मियों से मारपीट, सरकारी काम में बाधा, धक्का-मुक्की और दुव्र्यवहार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नाम भी दर्ज किये गये हैं। यहीं से सवाल पैदा होता है कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच टकराव अब उस स्तर तक पहुंच गया है जहां हर प्रदर्शन के बाद एक नया मुकदमा और हर मुकदमे के बाद एक नया प्रदर्शन दिखाई देगा। राहुल गांधी ने जिस तरह लगातार दो दिन सड़क पर उतरकर नेतृत्व किया है उससे साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल संसद की बहस तक सीमित रखने के मूड में नहीं है। राहुल के साथ प्रियंका गांधी भी लगातार मैदान में दिखाई दे रही हैं। यानी गांधी परिवार ने इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी को सड़क तक पहुंचा दिया है।




