20 साल पुराना वादा नहीं निभा पाए अमिताभ बच्चन, KBC में गांव वालों से मांगी माफी
KBC के मंच पर जब चंद्र प्रकाश तिवारी ने बताया कि वह प्रतापगढ़ से ताल्लुक रखते हैं, तो अमिताभ बच्चन ने उनसे इलाके के बारे में बातचीत शुरू की। बातचीत आगे बढ़ी तो बाबू पट्टी गांव का नाम सामने आया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का अपने पैतृक गांव से जुड़ाव एक बार फिर चर्चा में है।
टीवी के लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के मंच पर अमिताभ बच्चन ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ स्थित अपने पैतृक गांव बाबू पट्टी के लोगों से माफी मांगी। उन्होंने गांव में प्रस्तावित लाइब्रेरी का जिक्र करते हुए कहा कि इसे शुरू करने में देरी हुई है, लेकिन अब जल्द ही लाइब्रेरी शुरू की जाएगी।
दरअसल, KBC के एक एपिसोड में प्रतापगढ़ के प्रतियोगी चंद्र प्रकाश तिवारी हॉट सीट पर पहुंचे। बातचीत के दौरान जब प्रतापगढ़ और बाबू पट्टी का जिक्र हुआ तो अमिताभ बच्चन ने अपने परिवार की जड़ों और गांव से जुड़े पुराने वादे को याद किया। इसी दौरान उन्होंने लाइब्रेरी को लेकर गांव वालों से माफी मांगी और उन्हें भरोसा दिलाया कि अब यह काम जल्द पूरा किया जाएगा।
प्रतापगढ़ का नाम सुनते ही भावुक हुए बिग बी
KBC के मंच पर जब चंद्र प्रकाश तिवारी ने बताया कि वह प्रतापगढ़ से ताल्लुक रखते हैं, तो अमिताभ बच्चन ने उनसे इलाके के बारे में बातचीत शुरू की। बातचीत आगे बढ़ी तो बाबू पट्टी गांव का नाम सामने आया।
बाबू पट्टी वही गांव है, जिसे अमिताभ बच्चन के पैतृक परिवार से जोड़ा जाता है। उनके पिता और प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन का जन्म भी इसी गांव में हुआ था। ऐसे में गांव का नाम सुनते ही अमिताभ बच्चन ने अपने परिवार और गांव से जुड़े पुराने किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि उनका गांव से भावनात्मक रिश्ता है, भले ही वह अब तक स्वयं वहां नहीं जा पाए हैं।
क्या था 20 साल पुराना वादा?
बाबू पट्टी में एक लाइब्रेरी बनाने की योजना काफी पहले शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य गांव के बच्चों और युवाओं को पढ़ने के लिए बेहतर माहौल और किताबों की सुविधा उपलब्ध कराना था। रिपोर्टों के मुताबिक, डॉ. हरिवंश राय बच्चन स्मारक पुस्तकालय का उद्घाटन वर्ष 2006 में हुआ था। इस दौरान जया बच्चन भी गांव पहुंची थीं। हालांकि, समय बीतने के साथ लाइब्रेरी के नियमित संचालन को लेकर दिक्कतें सामने आईं और यह योजना उस तरह आगे नहीं बढ़ सकी, जैसी उम्मीद की गई थी। यही वजह है कि KBC के मंच पर अमिताभ बच्चन ने इस मुद्दे को दोबारा उठाया और गांव के लोगों से माफी मांगी।
अमिताभ बच्चन ने गांव वालों से मांगी माफी
शो के दौरान अमिताभ बच्चन ने बाबू पट्टी के लोगों को संबोधित करते हुए लाइब्रेरी शुरू होने में हुई देरी पर अफसोस जताया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब गांव वालों को चिंता करने की जरूरत नहीं है और लाइब्रेरी जल्द शुरू होगी। अमिताभ के इस बयान से यह साफ हुआ कि वह लंबे समय से इस प्रोजेक्ट को लेकर अपडेट से अवगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी की बिल्डिंग तैयार है और अब इसे आवश्यक किताबों और दूसरी सुविधाओं से लैस करके शुरू किया जाना है।
जया बच्चन से जुड़ी है लाइब्रेरी की कहानी
अमिताभ बच्चन ने बातचीत के दौरान बताया कि उनकी पत्नी जया बच्चन जब बाबू पट्टी गई थीं, तब गांव के बच्चों के लिए एक अच्छी लाइब्रेरी की जरूरत महसूस हुई थी।
इसके बाद लाइब्रेरी बनाने की दिशा में काम किया गया। गांव में भवन तैयार हुआ और इसका उद्घाटन भी किया गया। लेकिन लंबे समय तक इसके संचालन और सुविधाओं से जुड़े काम पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हो सके। अब अमिताभ बच्चन ने KBC के मंच से इसे जल्द शुरू कराने का भरोसा दिया है।
2006 में हुआ था पुस्तकालय का उद्घाटन
बाबू पट्टी में बने पुस्तकालय का उद्घाटन करीब दो दशक पहले किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2006 में जया बच्चन और तत्कालीन सांसद अमर सिंह ने इसका उद्घाटन किया था।
पुस्तकालय का मकसद गांव और आसपास के विद्यार्थियों को पढ़ने की सुविधा देना था। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था बच्चों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है, क्योंकि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी के लिए किताबों और अध्ययन सामग्री की जरूरत होती है। हालांकि, समय के साथ पुस्तकालय के नियमित संचालन में परेशानियां आईं और इसकी स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे।
अमिताभ बच्चन अब तक क्यों नहीं पहुंचे गांव?
अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन का जन्म बाबू पट्टी में हुआ था। इसके बावजूद अमिताभ स्वयं अभी तक अपने पैतृक गांव नहीं पहुंच पाए हैं। हालांकि, वह कई मौकों पर अपने पिता, परिवार और गांव से जुड़े किस्से साझा कर चुके हैं। KBC के मंच पर भी उन्होंने अपने पैतृक गांव के प्रति लगाव जाहिर किया। गांव के लोगों के लिए अमिताभ बच्चन का नाम अपने आप में एक भावनात्मक जुड़ाव रखता है। यही वजह है कि जब भी वह बाबू पट्टी का जिक्र करते हैं, स्थानीय लोगों के बीच उनकी चर्चा शुरू हो जाती है।
KBC में चंद्र प्रकाश तिवारी ने जीते 5 लाख रुपये
जिस एपिसोड में बाबू पट्टी का जिक्र हुआ, उसमें प्रतापगढ़ के रहने वाले चंद्र प्रकाश तिवारी ने भी शानदार खेल दिखाया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने KBC में 5 लाख रुपये जीते।
चंद्र प्रकाश ने लगातार कई सवालों का सही जवाब देकर गेम में अपनी जगह बनाए रखी। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी बातचीत के दौरान प्रतापगढ़ और बाबू पट्टी का जिक्र हुआ, जिसके बाद अमिताभ ने गांव से जुड़ी अपनी पुरानी बातों को साझा किया। इस बातचीत का सबसे खास हिस्सा वह रहा, जब बिग बी ने सीधे अपने पैतृक गांव के लोगों से माफी मांगी।
गांव वालों को अब लाइब्रेरी शुरू होने का इंतजार
अमिताभ बच्चन के बयान के बाद अब बाबू पट्टी के लोगों की नजर लाइब्रेरी के दोबारा शुरू होने पर है। अमिताभ ने KBC के मंच से भरोसा दिया है कि लाइब्रेरी जल्द शुरू होगी। अगर पुस्तकालय नियमित रूप से संचालित होता है तो इससे गांव के बच्चों और युवाओं को पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधा मिल सकती है। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए किताबों और शांत अध्ययन स्थल की सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है।
KBC के मंच पर बाबू पट्टी का जिक्र होने के बाद करीब 20 साल पुरानी लाइब्रेरी की कहानी एक बार फिर सामने आ गई है। एक तरफ अमिताभ बच्चन ने गांव वालों से माफी मांगी, तो दूसरी तरफ उन्होंने जल्द लाइब्रेरी शुरू कराने का आश्वासन भी दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह लाइब्रेरी कब पूरी तरह से शुरू होती है और गांव के बच्चों को इसका लाभ कब मिलना शुरू होगा।
अमिताभ बच्चन के बयान से बढ़ी उम्मीद
अमिताभ बच्चन का KBC पर दिया गया बयान बाबू पट्टी के लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से जिस लाइब्रेरी को लेकर उम्मीदें जुड़ी थीं, उसे लेकर अब फिर से सकारात्मक माहौल बना है। अमिताभ ने सार्वजनिक रूप से गांव वालों से माफी मांगते हुए यह भी संकेत दिया कि इस मामले को अब आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
KBC के मंच पर अमिताभ बच्चन ने अपने पैतृक गांव बाबू पट्टी से जुड़ी करीब दो दशक पुरानी लाइब्रेरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने लाइब्रेरी शुरू होने में हुई देरी के लिए गांव के लोगों से माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि अब यह जल्द शुरू होगी। अमिताभ बच्चन के इस बयान के बाद एक बार फिर बाबू पट्टी और बच्चन परिवार का रिश्ता चर्चा में है। अब गांव वालों और उनके प्रशंसकों को इंतजार है कि करीब 20 साल पुराना यह वादा कब पूरी तरह जमीन पर उतरता है और गांव के बच्चों के लिए लाइब्रेरी कब अपने दरवाजे खोलती है।



