पैरोल खत्म होने पर जेल नहीं लौटे आसाराम, जोधपुर पुलिस ने दर्ज किया केस
पैरोल मिलने के बाद उन्हें तय समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई थी। पैरोल की अवधि पूरी होने पर उन्हें वापस जेल पहुंचकर समर्पण करना था।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आसाराम के तय समय पर जेल वापस नहीं पहुंचने का मामला सामने आया है। पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद जेल में समर्पण नहीं करने पर जोधपुर के रातानाड़ा थाने में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई जोधपुर केंद्रीय कारागार प्रशासन की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर की गई है। पुलिस ने कारागार अधिनियम की धारा 58(ख) के तहत मामला दर्ज किया है।
20 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आए थे आसाराम
जानकारी के अनुसार, आसाराम को हाईकोर्ट के आदेश पर 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर 20 दिन की पैरोल दी गई थी। पैरोल मिलने के बाद उन्हें तय समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई थी। पैरोल की अवधि पूरी होने पर उन्हें वापस जेल पहुंचकर समर्पण करना था।
जेल प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, आसाराम को 27 अक्टूबर को शाम 5 बजे तक जोधपुर केंद्रीय कारागार में वापस पहुंचना था। हालांकि, निर्धारित समय तक उनके जेल नहीं पहुंचने की बात सामने आई। इसके बाद जेल प्रशासन ने इस मामले की जानकारी पुलिस को दी।
मामले के अनुसार आसाराम उपचार के लिए उज्जैन के अस्पताल में भर्ती था. उसे मंगलवार शाम को जेल में आना था. उसे उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट से राहत मिल जाएगी, लेकिन दोनों जगह पर उसे राहत नहीं मिली. इसके बाद उसके वकील शाम को जेल पहुंचे और सरेंडर करने के लिए मोहलत मांगी. इसके तहत आसाराम रात करीब 10:15 बजे एयर एंबुलेंस से जोधपुर पहुंचा था, लेकिन रात को नियमनुसार बंदी को प्रवेश नहीं दिया जा सकता है.
इसके चलते उसे अंदर नहीं लिया गया था, जिसके बाद वह आरोग्य अस्पताल चला गया था. इस दौरान उसके खिलाफ रिपोर्ट दी गई गई, जिस पर मामला दर्ज हुआ है. आसाराम आज सरेंडर कर सकता है. इसके चलते उसके भक्त भी जेल के आस पास एकत्र होने लगे हैं.
तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान : राजस्थान सरकार ने वर्ष 2015 में राजस्थान कारागार अधिनियम की धाराओं में संशोधन किया था. इसके तहत धारा 58 में पैरोल की शर्तें और बंदी के वापस नहीं आने पर दिए जाने वाले दंड का प्रावधान भी किया गया.
धारा 58 की उपधारा (ख) के तहत बंदी निर्धारित समय पर जेल में वापस नहीं आता या पैरोल पर रिहाई की अन्य शर्तों का पालन नहीं करता तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है. ऐसी स्थिति में, पुलिस अधिकारी उसे गिरफ्तार कर सकता है. दोषसिद्ध होने पर उसे तीन वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है. अधिकतम 3,000 रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है. कारावास और जुर्माना, दोनों की सजा भी दी जा सकती है.
दोबारा पैरोल मिलना होगा मुश्किल : पैरोल मिलने के बाद अगर बंदी नियमों की पालना नहीं करता है तो उसे दोबारा पैरोल मिलने में काफी परेशानी आती है.आसाराम को पहली बार राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश पर 20 दिन की पैरोल मिली थी, लेकिन वह सही समय पर वापस नहीं आया. ऐसे में दोबारा पैरोल लेने के लिए काफी परेशानी हो सकती है. गुजरात हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट में आसाराम की इसको लेकर याचिकाएं भी लंबित हैं.


