राजधानी पानी-पानी… राहत को ढूंढती जिंदगानी
राजधानी में रौद्र रूप में आई गोमती नदी

कई इलाकों में जीवन ठहरा खाने तक के लिए मारा-मारी, घरों के आंगन तक पहुंची नावें
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क/क्षितिजकांत
लखनऊ। पानी जीवन है पर जब पानी हद से ज्यादा आ जाए तो वह जीवन को तकलीफों के समुंदर में डुबो देता है। पानी का प्रलय यूपी की राजधानी लखनऊ में अक्टूबर में दिखाई दे रहा है। जहां एआई और स्मार्ट सिटी के दावे करने वाले सत्ताधीशों को आम आदमी की बेबसी नहीं दिखाई दे रही है। पानी ने ऐस घेरा है जैसे राजधानी नहीं लोग टापू में रह रहे हों। न तो खाना मिल रहा न पानी, न ही बीमार होने पर दवाई। प्रशासन व शासन बाते बड़ी-बड़ी कर रहा है। पर आम आदमी अब भी पानी केबीच सरकार को टकटकी लगा निहार रहा है।
वहीं तस्वीरें लोगों का दर्द बयां कर रही हंै। पानी घरों के आंगन तक पहुंच गया है लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। जो बुलडोजर लोगों को डरा रहा था वो भी आज राहत देने में जुटा दिखाई दिया। बता दें गोमती नदी का जलस्तर तेजी से बढऩे से दुबग्गा के जेहटा रोड समेत आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। रविवार को शाम छह बजे तक जेहटा-माल रोड पर करीब डेढ़ फीट पानी बहने लगा था। माल और इटौंजा के ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक, अगले 24 घंटे में गोमती का जलस्तर दो फीट तक और बढ़ सकता है। प्रशासन की टीम ने हयात नगर मोड़, दौलतखेड़ा, सैथा और बरावन कला समेत प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। पहली मंजिल पर रहने वालों को दूसरी मंजिल पर शिफ्ट होने और गर्भवती महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए कहा गया। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए 10 नावों की सुविधा शुरू की गई है।

पानी बढ़ा तो लौट आया डीएम का काफिला
हयात नगर मोड़, दौलतखेड़ा और सैथा के निरीक्षण के बाद डीएम का काफिला गुलमीखेड़ा, टाडख़ेड़ा और सुखलालखेड़ा की ओर गया, लेकिन रास्ते में जलभराव अधिक होने से लौटना पड़ा। इससे ग्रामीणों में नाराजगी दिखी। सुरक्षा के लिए रात में पेट्रोलिंग बढ़ाने और दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
500 बीघा धान की पकी फसल डूबी
मंझौवा गांव में गोमती का पानी बढऩे से करीब 500 बीघा धान की पकी फसल डूब गई। खीरा, लौकी और भिंडी की फसल को भी नुकसान हुआ। अजय की तीन बीघा खीरे की फसल डूब गई। वहीं जयकरन, इंद्रपाल, राजाराम, महेश और सरवन के घर भी बारिश से गिर गए।
करोड़ों का प्रेरणा स्थल पानी-पानी
गोमती का पानी प्रेरणा स्थल में अब भी भरा है। कार्यालय में पानी घुसने से रोकने के लिए गेट पर रेत की बोरियां लगाई गई हैं। वहीं, रविवार को यहां पहुंचे लोगों को वापस लौटना पड़ा। आईआईएम मार्ग से कैरियर कॉलेज के पास फैजुल्लागंज जाने वाली सडक़ पर करीब 100 मीटर तक तेज बहाव है।
हर ओर पानी… पेयजल का इंतजाम नहीं
फैजुल्लागंज में मामा चौराहा, अटल चौक, गणेश विहार, नंदन चौराहा और अन्य कालोनियों में हर ओर सिर्फ पानी ही नजर आता है। मगर घरों में फंसे लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। घर के नल से बदबूदार पानी आ रहा है। सीमा ने बताया कि पीना तो दूर हाथ- मुंह भी नहीं धुला जा सकता। प्रदीप का कहना था कि पीने के पानी का वितरण हो रहा है, लेकिन उनके पास तक नहीं पहुंचा है। कई लोग जुगाड़ वाली नाव से नगर निगम के टैंकर से बाल्टी में पानी भरकर ले जा रहे थे।
बच्चा बेहाल मां की गुहार
कई दिन से पानी में फंसी ममता और उनके पति आशीष रविवार को घर से थोड़ा बहुत सामान निकालकर कंट्रोल रूम के पास पहुंचे थे। गोद में एक साल का बच्चा भी था। करीब दो घंटे इंतजार के बाद भी नाव या ट्रैक्टर नहीं मिला। बेहाल बच्चे को लेकर ममता पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाती रही। उसे सिर्फ आश्वासन ही मिला।
अंतिम सफर में बाढ़ की मार
गोमती की बाढ़ से अब अंतिम सफर की राह भी मुश्किल हो गई है। गुलाला घाट के अंत्येष्टि स्थल में तीन दिन से नदी का पानी भरा है। रविवार को घाट जाने वाली सडक़ पर करीब डेढ़ फीट पानी तेज बहाव के साथ बहता रहा।
दोपहर करीब एक बजे एक शव वाहन घाट पहुंचा। चालक ने लोगों से पानी की स्थिति की जानकारी ली और धीरे-धीरे वाहन आगे बढ़ाया। बाद में शव को वाहन से उतारकर परिजन पानी से गुजरते हुए चबूतरे तक पहुंचे। अंत्येष्टि स्थल परिसर में भी करीब एक फीट पानी भरा है और यह लकडिय़ों तक पहुंच गया है। घाट की व्यवस्था देखने वाले वीरेंद्र पांडे ने बताया कि पानी भरने से बिजली आपूर्ति बंद है, जिससे विद्युत शवदाह गृह भी बंद है।
महिला सुरक्षा पर दिल्ली पुलिस को सुप्रीम फटकार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से कहा कि राजधानी में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि हर महिला सार्वजनिक जगहों और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते समय खुद को सुरक्षित महसूस करे। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि एनसीटी दिल्ली में हर महिला सुरक्षित महसूस करे, चाहे वह रात 10 बजे पैदल चल रही हो या मेट्रो और सडक़ के रास्ते सफर कर रही हो।
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-एनसीआर में हाल में सामने आए दुष्कर्म और यौन उत्पीडऩ के मामलों को लेकर स्वत: संज्ञान से शुरू की गई सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े कई मामलों का स्वत: संज्ञान लिया था। इनमें कालकाजी के आस्था कुंज पार्क में 17 साल की किशोरी से कथित सामूहिक दुष्कर्म, स्वरूप नगर में एक नाबालिग से कथित गैंगरेप और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही बस में 16 साल की लडक़ी के कथित यौन उत्पीडऩ का मामला शामिल था।
पार्क, सडक़ और बसें खतरे वाले इलाके न बनें
पिछली सुनवाई में अदालत ने साफ कहा था कि पार्क, सडक़ और बस जैसी सार्वजनिक जगहों को ‘ज्यादा जोखिम वाले इलाके’ बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया था कि क्या 2012 के निर्भया कांड से कोई सबक लिया गया है। अदालत ने महिलाओं की सुरक्षा को संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले सम्मान के साथ जीने और हिंसा से मुक्त रहने के मौलिक अधिकार से भी जोड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस
चुनाव आयोग के एकतरफा फैसलों के आरोप पर सुनवाई
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उन याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग ने दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए। न्यायालय ने कहा कि जो भी फैसला कानून के अनुरूप नहीं पाया जाएगा, उसे रद्द कर दिया जाएगा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिका पर अंतिम फैसला आने तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को कोई भी फैसला लेने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि वह उस कानूनी प्रावधान की भी जांच कर सकती है, जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद छोडऩे के बाद भी कानूनी संरक्षण देता है। पीठ ने कहा, ‘‘ हम सभी फैसलों की जांच करेंगे। यदि कोई फैसला कानून के अनुरूप नहीं पाया गया तो हम उसे रद्द कर देंगे।आप अदालत की शक्ति जानते हैं।’’ पीठ ने यह भी कहा कि सीईसी को हासिल कानूनी संरक्षण ऐसा है, जो न्यायाधीशों को भी प्राप्त नहीं है। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अंतरिम राहत के तौर पर ज्ञानेश कुमार को आगे कोई भी फैसला लेने से रोकने का निर्देश देने की मांग की। उन्होंने सीईसी को निलंबित करने का भी अनुरोध किया और कहा कि हर नागरिक अपने मतदान के अधिकार को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहा है।पीठ ने अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर संबंधित याचिका पर भी नोटिस जारी किया और उसे राकेश कुमार सिंह की याचिका के साथ जोड़ दिया।
दिल्ली जिमखाना क्लब : विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करे हाईकोर्ट
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट से दिल्ली जिमखाना क्लब के 11 सदस्यों की याचिका पर विचार करने को कहा। इन सदस्यों ने क्लब के 27.3 एकड़ परिसर को अपने कब्जे में लेने के केंद्र सरकार के फैसले और उसके बाद की बेदखली की कार्रवाई को चुनौती दी थी। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच को क्लब के सदस्यों की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट का कहना था कि केंद्र सरकार के फैसले को सिर्फ क्लब ही चुनौती दे सकता है।
सिंह ने बताया कि हाई कोर्ट ने सदस्यों से कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट से यह स्पष्टीकरण ले लें कि क्या वे भी वहां याचिका दायर कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट जाने की इजाजत दे दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि दूसरी पार्टी केस की स्वीकार्यता और अन्य कानूनी आपत्तियों के आधार पर विरोध कर सकती है।
दिल्ली दंगों से जुड़ी याचिकाएं दिल्ली हाईकोर्ट से खारिज
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों और दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई हिंसा से जुड़ी याचिकाओं के पूरे समूह को खारिज कर दिया है। इन याचिकाओं में नेताओं के खिलाफ कथित नफरती भाषण (हेट स्पीच) के लिए एफआईआर दर्ज करने, स्वतंत्र एसआईट का गठन करने और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी।
जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने फैसला सुनाते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाओं के समूह को दो हिस्सों में बांटा गया था – एक उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित और दूसरा जामिया मिलिया हिंसा से संबंधित। बेंच ने कहा, फैसले में बताई गई वजहों से, सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित याचिकाओं में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ हिंसा के संबंध में कथित हेट स्पीच के लिए स्नढ्ढक्र दर्ज करने के निर्देश देने की मांग भी शामिल थी। याचिकाओं में दंगों की जांच के लिए एसआईटी जांच आयोग या फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाने की भी मांग की गई थी। कुछ याचिकाओं में हिंसा में शामिल होने के आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित लोगों के इलाज और मुआवजे से संबंधित निर्देश देने की भी मांग की गई थी। इसलिए, राजनीतिक नेताओं के खिलाफ एफआईआर की मांग करने वाली याचिकाएं 2020 के दंगों से संबंधित याचिकाओं के व्यापक समूह का हिस्सा थीं। हालांकि, हाई कोर्ट ने सोमवार को याचिकाओं के इस समूह को खारिज कर दिया।



