पंजाब के इतने वार्डों के चुनाव रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने दिए नए सिरे से मतदान के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पटियाला और मोगा जिलों के 50 म्युनिसिपल वार्डों में हुए चुनावों को रद्द कर दिया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पटियाला और मोगा जिलों के 50 म्युनिसिपल वार्डों में हुए चुनावों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने यह फैसला चुनाव प्रक्रिया के दौरान सामने आई कथित गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए लिया।

कोर्ट द्वारा नियुक्त फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया कि इन वार्डों में नामांकन प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर रुकावटें डाली गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने, धमकाने और उनके साथ मारपीट करने के आरोप सामने आए।

नामांकन प्रक्रिया में सामने आईं गंभीर गड़बड़ियां

फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन ने अपनी जांच में नामांकन प्रक्रिया से जुड़ी कई गंभीर शिकायतों का उल्लेख किया। इनमें उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से कथित तौर पर रोकना और उनके नामांकन दस्तावेजों में हस्तक्षेप करना शामिल था। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों के नामांकन पत्र छीनने या नष्ट करने के आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा उम्मीदवारों को धमकाने और उनके साथ मारपीट किए जाने की शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं।

कोर्ट ने क्यों रद्द किए चुनाव?

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यदि किसी उम्मीदवार को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से नामांकन दाखिल करने का अवसर ही नहीं मिलता है, तो ऐसी परिस्थितियों में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं। इसी आधार पर अदालत ने संबंधित 50 वार्डों में हुए चुनावों को रद्द करने का आदेश दिया। साथ ही इन वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने के निर्देश दिए गए हैं।

पटियाला और मोगा के 50 वार्ड शामिल

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में पटियाला के 28 और मोगा के 22 वार्ड शामिल हैं। यानी दोनों जिलों के कुल 50 वार्डों में हुए चुनाव अब रद्द माने जाएंगे और इन सीटों पर दोबारा चुनाव की प्रक्रिया कराई जाएगी। अदालत के इस फैसले के बाद इन वार्डों के चुनाव परिणाम और पूरी चुनाव प्रक्रिया को लेकर स्थिति बदल गई है।

कोर्ट के निर्देश के बाद संबंधित वार्डों में चुनाव प्रक्रिया नए सिरे से कराई जाएगी। इसका मतलब है कि उम्मीदवारों को दोबारा नामांकन दाखिल करने का अवसर मिलेगा और निर्धारित चुनाव प्रक्रिया के तहत मतदान कराया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को स्थानीय निकाय चुनावों में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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