नामांकन में आपराधिक केस छिपाने का आरोप, BJP सांसद को गुजरात हाईकोर्ट का नोटिस
भाजपा के राज्यसभा सांसद राजेश शुक्ला से जुड़े मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है... नामांकन के दौरान आपराधिक मामलों...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात से भारतीय जनता पार्टी के निर्विरोध निर्वाचित राज्यसभा सदस्य राजेश शुक्ला की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं.. उनके नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में कथित तौर पर.. आपराधिक मामले की जानकारी का उल्लेख नहीं किए जाने को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया है.. अदालत ने इस मामले में शुक्ला से जवाब मांगा है.. आपको बता दें कि यह याचिका गुजरात विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता तुषार चौधरी की ओर से दायर की गई थी.. याचिकाकर्ता ने शुक्ला के निर्वाचन पर सवाल उठाते हुए उनके नामांकन में कथित खामियों को अदालत के सामने रखा है..
वहीं इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद शक्तिसिंह गोहिल तथा अधिवक्ता चिंतन चांपानेरी ने याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में पक्ष रखा.. और उन्होंने राज्यसभा सदस्य राजेश शुक्ला के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले.. और उससे संबंधित न्यायिक कार्यवाही का हवाला देते हुए उनके नामांकन के दौरान दाखिल हलफनामे पर सवाल उठाए.. याचिका में आरोप लगाया गया है कि शुक्ला ने अपने नामांकन के साथ प्रस्तुत हलफनामे में संबंधित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी थी.. इसी आधार पर उनके निर्वाचन को रद्द करने की मांग की गई है..
आपको बता दें कि कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल के अनुसार राजेश शुक्ला के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला चल रहा था.. गोहिल ने बताया कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420, 465, 467, 468.. और 471 के तहत आरोपों से संबंधित कार्यवाही हुई थी.. इन धाराओं का संबंध विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे अपराधों से है.. हालांकि इन धाराओं का उल्लेख अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने का प्रमाण नहीं है..
शक्तिसिंह गोहिल ने यह भी बताया कि राजेश शुक्ला की ओर से संबंधित आपराधिक मामले को रद्द कराने के लिए गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी.. उनके अनुसार अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया था.. कांग्रेस की ओर से इसी न्यायिक कार्यवाही का हवाला देते हुए सवाल उठाया गया है कि.. जब संबंधित मामला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा था.. तब राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन के साथ प्रस्तुत हलफनामे में इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई.. वहीं अब हाईकोर्ट ने इस मामले में शुक्ला को नोटिस जारी कर उनका पक्ष जानने की प्रक्रिया शुरू की है..



