‘अतिक्रमण’ कैसे बन गया ‘गिफ्ट’, यूसुफ पठान को 20 करोड़ का प्लॉट कैसे मिला?
कानून सबके लिए बराबर है... या फिर सिर्फ तब तक, जब तक सियासत का हाथ सिर पर न हो... जिस 978 वर्ग मीटर की सरकारी जमीन...
4पीएम न्यूज नेटवर्कः पूर्व क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान के वडोदरा स्थित बंगले के पास 978 वर्ग मीटर के प्लॉट को लेकर एक दशक से भी अधिक समय से विवाद चल रहा है.. पठान 2011 में भारत को विश्व कप जिताने वाली टीम के महत्वपूर्ण सदस्य रहे थे.. और वर्ष 2024 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद चुने गए.. उन्होंने इस प्लॉट को चारदीवारी से घेर लिया था.. जिसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें अतिक्रमणकर्ता घोषित किया था.. अब गुजरात की भाजपा सरकार के एक हालिया फैसले से यह लंबा विवाद समाप्त होने के कगार पर दिख रहा है.. सरकारी नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को आवासीय उपयोग के लिए विशेष सुविधा दी जा रही है.. जिससे पठान को इस भूमि का बड़ा हिस्सा सस्ते में मिलने की संभावना बढ़ गई है.. यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है..
जानकारी के मुताबिक 13 अक्टूबर को राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए बनाई गई अपनी नीति के अंतर्गत यूसुफ पठान को यह प्लॉट आवंटित करने की औपचारिक मंजूरी प्रदान की.. इस नीति के अनुसार उन्हें आवासीय उपयोग के लिए पांच सौ वर्ग मीटर जमीन पूरी तरह मुफ्त दी जाएगी.. जबकि शेष चार सौ अठहत्तर वर्ग मीटर भूमि बाजार मूल्य के पचपन प्रतिशत दर पर उपलब्ध कराई जाएगी.. मार्च माह में वडोदरा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा निर्धारित दो लाख दस हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर के हिसाब से पूरे प्लॉट का अनुमानित मूल्य लगभग बीस करोड़ पचास लाख रुपये बैठता है.. हालांकि पठान को कुल मिलाकर मात्र लगभग पांच करोड़ पचास लाख रुपये ही चुकाने होंगे.. सरकारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि.. यह फैसला किसी प्रकार की मिसाल कायम नहीं करता..
जानकारी के मुताबिक राजस्व विभाग को यह निर्देश दिया गया है कि वह वडोदरा नगर निगम को समान मूल्य की वैकल्पिक जमीन मुआवजे के रूप में उपलब्ध कराए.. फिर भी इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए नगर निगम की स्थायी समिति तथा आम सभा की स्वीकृति अभी बाकी है.. सरकारी फैसले पर हस्ताक्षर होने के अठारह दिन बाद इकतीस अगस्त को पठान ने गुजरात हाईकोर्ट में अपनी लंबित अपील वापस ले ली.. उनके अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि.. वे अब न्यायालय के बाहर आपसी सहमति से इस विवाद का समाधान निकालने का प्रयास करेंगे.. इस प्रकार कानूनी लड़ाई अस्थायी रूप से समाप्त हो गई.. लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रिया अभी भी जारी है.. वहीं पूरा मामला अब नगर निगम की मंजूरी पर टिका हुआ है..
वहीं इस विवाद की जड़ें वर्ष दो हजार बारह तक जाती हैं.. उस समय यूसुफ पठान ने अपने परिवार की सुरक्षा का हवाला देते हुए उक्त प्लॉट को निन्यानवे वर्ष की लीज पर आवंटित करने का आवेदन किया था.. वडोदरा नगर निगम ने बिना नीलामी प्रक्रिया अपनाए जमीन देने का प्रस्ताव तैयार किया.. परंतु राज्य सरकार ने दो हजार चौदह में इसे अस्वीकार कर दिया.. क्योंकि नीलामी अनिवार्य मानी गई थी.. इसके बावजूद पठान ने प्लॉट के चारों ओर दीवार का निर्माण करवा लिया.. उसके बाद लगभग एक दशक तक यह मामला शांत रहा.. वर्ष दो हजार चौबीस के मार्च महीने में ममता बनर्जी ने उन्हें बहरामपुर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा.. यह क्षेत्र लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ रहा था.. जहां से अधीर रंजन चौधरी पांच बार सांसद चुने जा चुके थे..



