बंदी के हथौड़े से नहीं दबेगी 4PM की आवाज

अब 4PM के इंस्टाग्राम चैनल पर ताला, आखिर सच की आवाज से इतनी परेशानी क्यों?

  • 4PM की सहिया फिल्म पर भी पहरा नही मिल रहा रिलीज सार्टिफिकेट
  • आखिर चाहती क्या है सरकार!
  • सरकार ने 4PM नेशनल चैनल रास्ता रोका था जनता ने आवाज को फुल वॉल्यूम में लौटा दिया

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सत्ता का हथौड़ा एक बार फिर 4PM पर चला है। 4पीएम की आवाज को बंद करने की एक बार फिर कोशिश हुयी है। लाखों सब्सक्राइबर वाले 4PM इंस्टाएकाउंट को बिना बताए सरकार ने लॉक करवा दिया है। सरकार 4PM फिल्मस की बनयी गयी पिक्चर सहिया पर भी रोक लगा चुकी है और मामला अदालत में है। इससे पूर्व में सरकार हमारे यूटयूब चैनल को बंद करवा चुकी है जोकि माननीय न्यायालय के आदेश के बाद खुला था।
हम बताना चाहते हैं कि पहले भी और आज भी हम इन हरकतों से विचलित नहीं हुए हैं क्योंकि सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों को एक बात याद रखनी चाहिए कि जिस आवाज को दबाने के लिए जितनी ताकत लगाई जाती है वह आवाज उससे ज्यादा गति से और ज्यादा बुलंद होकर लौटती है। पूर्व में यह साबित हो चुका है और एक बार फिर जनता इसको दोबारा साबित कर देगी। 4PM न्यूज नेटवर्क के संपादक संजय शर्मा के सामने एक बार बंदी का नया मोर्चा सरकार ने खोला है। 4PM के इंस्टाग्राम अकाउंट को बंद कर दिया गया है। संजय शर्मा की फिल्म ‘सहिया’ प्रमाणन के इंतजार में अटकी है। अब सवाल यह है कि आखिर 4PM के साथ बार-बार ऐसा क्यों हो रहा है? क्या एक समाचार संस्थान को अपनी बात कहने की कीमत बार-बार चुकानी पड़ेगी? क्या पत्रकारिता की धार किसी को इतनी चुभने लगी है कि डिजिटल मंच से लेकर सिनेमा के पर्दे तक उसकी आवाज के रास्ते में रुकावटें खड़ी होती रहेंगी?

एक पत्रकार का दर्द, एक संपादक की शिकायत और सिस्टम से सीधे सवाल

4PM संपादक संजय शर्मा की शिकायत सिर्फ एक सोशल मीडिया अकाउंट बंद होने की नहीं है। दर्द उस सिलसिले का है जिसमें कभी 4PM के यूट्यूब चैनल पर रोक लगती है कभी इंस्टाग्राम अकाउंट बंद होने की खबर आती है और कभी उनकी फिल्म ‘सहिया’ प्रमाणपत्र के इंतजार में अटक जाती है। आखिर एक ही संस्थान को बार-बार अलग-अलग मोर्चों पर क्यों लडऩा पड़ रहा है? खबर दिखाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़े फिल्म दर्शकों तक पहुंचाने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप मांगना पड़े और डिजिटल मंच पर अपनी मौजूदगी बनाए रखने की चिंता अलग हो तो सवाल उठना स्वाभाविक है। संजय शर्मा का दर्द उस पत्रकार का दर्द है जो अपने काम को सिर्फ नौकरी नहीं अपनी प्रतिबद्धता मानता है। उनकी शिकायत है कि 4PM की आवाज को रोकने की कोशिशें हो रही हैं। उनका सवाल है अगर कोई खबर गलत है तो उसका खंडन कीजिए किसी सामग्री पर आपत्ति है तो उसका आधार बताइए फिल्म पर सवाल है तो नियमानुसार फैसला दीजिए। लेकिन कार्रवाई ऐसी क्यों हो कि पूरा मंच ही संकट में पड़ जाए।

रास्ते में बार-बार रुकावटें क्यों?

और सबसे बड़ा सवाल क्या संजय शर्मा को झुकाने की कोशिशों का है। संजय शर्मा की बुंलद आवाज को बंद करने की हसरतों के साथ 4PM के इंस्टाग्राम पेज का बंद किया गया है। पेज बंद होते ही यूजर्स प्रतिक्रिया दे रहे हैं और पूछ रहे है कि ऐसा बार-बार क्यों किया जा रहा है। इससे पूर्व की सरकारी कार्रवाईयों में यूट्यूब प्रकरण में सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला देकर लाखों पाठकों का वाला 4PM नेशनल न्यूज चैलन को बंद कर दिया था। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने चैनल बहाल करने का आदेश दिया। अब उनकी बनाई गयी पिक्चर ‘सहिया’ का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने सेंसर बोर्ड को 2 नवम्बर तक अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इन सब के बीच अब इंस्टाग्राम अकाउंट बंद होने की खबर ने इस पूरी लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है।

उसे कौन रोक सकता है जिसके हाथ में कलम आंखों में सवाल और इरादे में जिद हो

4PM संजय शर्मा का किरदार किसी सरकारी आदेश के आगे हाथ बांधकर खड़े हो जाने वाले पत्रकार का नहीं है। वह सवाल पूछता है विरोध दर्ज कराता है और रास्ता बंद होने पर अगला दरवाजा खटखटाता है। यूट्यूब चैनल बंद हुआ तो अदालत पहुंचे। दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली तो चैनल फिर लौटा। ‘सहिया’ पर प्रमाणन का संकट आया तो फिल्म की लड़ाई अदालत तक ले गए। अब इंस्टाग्राम अकाउंट बंद होने की खबर ने एक और मोर्चा खोल दिया है। संजय शर्मा की लड़ाई को केवल एक संपादक की निजी परेशानी समझना भूल होगी क्योंकि संजय शर्मा कि जिद का मतलब नियमों से ऊपर होना नहीं बल्कि नियमों के भीतर निष्पक्ष व्यवहार की मांग करना है। संजय शर्मा की लड़ाई का संदेश साफ है दबाव कितना भी हो सवाल पूछने का हौसला नहीं छोड़ेंगे। रास्ता कितना भी कठिन हो अपनी बात रखने का अधिकार नहीं छोड़ेंगे।

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