श्याम मीरा सिंह को कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान

- सभी पत्रकारों ने कहा- नयी उम्मीद के साथ आगे बढ़ेंगे
- कई अन्य पत्रकारों को भी दिए गए पुरस्कार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी और पत्रकार यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह को कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान से नवाजा गया है बता दें कि एनडीटीवी छोडऩे के बाद हृदयेश लगातार एनवायरमेंट जर्नलिज्म में सक्रिय हैं। इस पर आधारित उनके कई वीडियो आपको यूट्यूब पर मिल जाएंगे। इसके साथ ही वह लेखन भी कर रहे हैं। वहीं, श्याम मीरा सिंह अपने क्रांतिकारी किस्म के वीडियो और अंदाज के लिए चर्चित हैं। हाल ही में दिल्ली प्रदर्शन के दौरान 40 से अधिक पत्रकारों के साथ उन्हें भी डिटेन किया गया था।
श्याम मीरा सिंह ने कहा कि मुझे एक भीगी भीगी सी लज्जा इस बात पर भी लग रही है कि इस सम्मान की कतार में मुझे वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी के साथ एक ही पंक्ति में खड़ा होना पड़ रहा है। जिनके काम और श्रम के आगे मेरी दूर दूर तक कोई हैसियत नहीं। अगर वे खड़े हों तो सिवाय सर झुकाकर खड़े रहने के मेरी हिम्मत ना पड़े। फिर भी इस सम्मान की आयोजक समिति का दिल से धन्यवाद करता हूं जिन्होंने हौसला अफज़़ाई के लिए इस सम्मान से मेरे कंधों का भार बढ़ाया और मुझ साधारण आदमी के सम्मान में वृद्धि की। और उन सबका भी आभार जताना चाहता हूं जिन्होंने मुझे यहां पहुंचाने में अपना अपना हाथ लगाया। आप सबका दिल से बहुत बहुत आभार।
मैं इस सम्मान का हकदार नहीं हूं : श्याम मीरा सिंह
लगभग एक महीने पहले गांधी पीस फाउंडेशन की तरफ़ से सूचना मिली कि मुझे 2025 वर्ष के लिए कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान दिया जा रहा है। जिसे पहले पत्रकार रवीश कुमार , अजीत अंजुम, आरफ़ा ख़ानम शेरवानी, निखिल वागले, उर्मिलेश जी को दिया जा चुका है। मैंने शुरुआत में कहा कि मैं इस सम्मान का हकदार नहीं हूँ। इससे अधिक कहने कि हैसियत मेरी नहीं थी। आज गांधी पीस फाउंडेशन की तरफ़ से इस सम्मान का अनाउंसमेंट किया गया है। जिसे 2024 के लिए सीनियर पत्रकार- हृदयेश जोशी जी को और 2025 के लिए मुझे दिया गया।
मैं निजी तौर पर मानता हूँ कि मेरा काम अत्यधिक साधारण और इतना कमतर है कि वह ध्यान ना दिए जाने के योग्य है। मेरा काम- भगवान राम द्वारा बनाए जाने वाले रामसेतु में उस गिलहरी के काम जितना भर है, जिसके बस का अधिक कुछ नहीं था, सिवाय इतने के कि वह अपने छोटे से शरीर से कुछ मिट्टी चिपकाती और जाकर रामसेतु पर झाड़ देती।
अघोषित आपातकाल की त्रासदी लिखने में हिचकते नहीं युवा पत्रकार श्याम
श्याम मीरा सिंह अभिव्यक्ति की आजादी पर बढ़ते अंकुश और एक अघोषित आपातकाल की त्रासदी लिखने सोचने कहने वालों को लगातार डरा रही है ऐसे समय में श्याम मीरा सिंह जैसे साहसी युवा पत्रकार की उपस्थिति आश्वस्त करती है। मथुरा के श्याम मीरा सिंह ने साल 2017-18 में दिल्ली से हिंदी में पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद ईटीवी भारत, इकोनामिक टाइम्स, आज तक और न्यूज क्लिक जैसे संस्थानों में काम किया है । उन्होंने स्ट्राइक नाम से एक चैनल भी शुरू किया है। कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर आंदोलन के दौरान भी उनकी रिपोर्टिंग ने लाखों का ध्यान खींचा।



