J-K कैबिनेट में बड़ा बदलाव, 4 नए मंत्रियों की एंट्री

मंगलवार को श्रीनगर स्थित राजभवन में चार नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया है। मंगलवार को श्रीनगर स्थित राजभवन में चार नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस विस्तार के साथ ही उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार में चार नए मंत्री शामिल हो गए हैं।

शपथ ग्रहण समारोह श्रीनगर राजभवन में आयोजित किया गया। इस दौरान नए मंत्रियों ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पद और गोपनीयता की शपथ ली। मंत्रिमंडल के विस्तार को जम्मू-कश्मीर सरकार के कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, अल्ताफ अहमद कल्लू और शमीमा फिरदौस शामिल हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने अनुभवी नेताओं के साथ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह दी है. इस विस्तार के साथ ही जम्मू-कश्मीर सरकार का मंत्रिमंडल अपनी अधिकतम निर्धारित संख्या तक पहुंच गया है.

इससे पहले उमर अब्दुल्ला सरकार में मुख्यमंत्री समेत कुल छह सदस्य थे. इनमें उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी, मंत्री जावेद राणा, सकीना इट्टू, जावेद अहमद डार और सतीश शर्मा शामिल थे. मंत्रिमंडल विस्तार से पहले मुख्यमंत्री ने मौजूदा मंत्रियों से अपने इस्तीफे सौंपने को कहा था, ताकि मंत्रिमंडल में बदलाव किया जा सके. इनमें से सतीश शर्मा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया.

मुख्यमंत्री समेत कुल 9 सदस्य

चार नए मंत्रियों के शामिल होने और सतीश शर्मा के मंत्रिमंडल से बाहर होने के बाद अब सरकार में मुख्यमंत्री समेत कुल नौ सदस्य हो गए हैं. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 90 निर्वाचित सीटें हैं और केंद्र शासित प्रदेश में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की अधिकतम संख्या नौ हो सकती है.

अल्ताफ अहमद कल्लू, जिन्हें अल्ताफ कल्लू के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम विधानसभा क्षेत्र से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक हैं. वह दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं और विधान परिषद के सदस्य यानी एमएलसी के रूप में भी काम कर चुके हैं.

कल्लू के राजनीतिक सफर में पहलगाम क्षेत्र की अहम भूमिका रही है. विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों का अनुभव रखने वाले कल्लू को अब पहली बार मंत्रिमंडल में जगह मिली है. उनकी नियुक्ति को दक्षिण कश्मीर को सरकार में प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ पार्टी के क्षेत्रीय समीकरण मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

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