फार्म 6 संशोधन पर सवाल एसआईआर में बवाल ही बवाल

- एसआईआर विवाद में लीपापोती करने के चक्कर में फंसता चुनाव आयोग
- राहुल गांधी ने पूछा टीसीएस को किसने कहा था यह कर दो
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। चुनाव की पूरी कहानी आखिरकार वोट से शुरू होकर वोट पर ही खत्म होती है। लेकिन वोटर बनने के रास्ते में अगर फॉर्म ही बदल जाए तो फिर सवाल सिर्फ एक कालम का नहीं रह जाता सवाल उस व्यवस्था का हो जाता है जो नागरिक को मतदाता बनाती है। एसआईआर विवाद के बीच फार्म 6 के साथ जो हुआ उसने पूरे लोकतंत्र सामने यही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि ऐसा क्यों किया गया और किसने किया।
राहुल गांधी के ताजा एक्स पर पोस्ट ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने सवाल पूछा है कि टीसीएस ने किसके कहने पर फार्म 6 में बदलाव किये और मांगी गयी जानकारी को हटाया। राहुल गांधी का आरोप है कि जब गड़बड़ी समाने आयी है तो उस पर बैकडोर से लीपापोती कि जा रही है। उन्होनें एक बार फिर अपनी पुराने वायदे को दोहराया है और कहा है कि यदि सरकार बनती है तो इस पूरे गड़बड़झाले के मास्टर माइंड को छोड़ा नहीं जाएगा।
अब कहानी ने दूसरा मोड़ ले लिया है
30 सितंबर को चुनाव आयोग के ईसीआईएनईटी पोर्टल से उन राज्यों में फार्म 6 के साथ जोड़ी गई एसआईआर संबंधी अतिरिक्त घोषणा हटा दी गयी जहां एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग ने 26 सितंबर को कहा था कि गैर एसआईआर अवधि में नियमों के तहत निर्धारित फॉर्म इस्तेमाल होंगे। इसके बाद संबंधित पोर्टलों से अतिरिक्त घोषणा गायब हो गई। जहां एसआईआर अभी जारी है वहां यह घोषणा अभी भी दिखाई दे रही है। यही वह बिंदु है जहां कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अब नया सवाल दाग दिया है। राहुल गांधी ने पूछा है कि ऑनलाइन फार्म 6 में यह बदलाव किसने अधिकृत किया? चुनाव आयोग में किसने टीसीएस को इसे लागू करने का आदेश दिया? टीसीएस में किसने इसे मंजूरी दी? और क्या किसी तरह का दबाव था। राहुल के इन सवालों से उनकी राजनीतिक धार इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि बदलाव को लेकर आयोग के भीतर पहले से दर्ज आपत्तियां मौजूद थीं और अब एसआईआर पूरा होने वाले राज्यों में वही अतिरिक्त घोषणा ऑनलाइन व्यवस्था से हटा दी गयी है। कहानी सिर्फ यह नहीं है कि फार्म 6 में क्या जोड़ा गया था। अब कहानी यह भी है कि जो जोड़ा गया वह किस प्रक्रिया से जोड़ा गया और हटाया गया तो किस प्रक्रिया से हटाया गया।
फार्म 6 में आखिर जोड़ा क्या गया था
चुनाव आयोग का फार्म 6 वह वैधानिक आवेदन है जिसका इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है। लेकिन इस साल ऑनलाइन ईसीआईएनईटी पोर्टल पर उपलब्ध संस्करण में एक अतिरिक्त घोषणा दिखाई दी। इसमें आवेदक से पूछा गया कि क्या उसका नाम पिछली एसआईआर के दौरान तैयार मतदाता सूची में था। विकल्पों में आवेदक के अलावा माता पिता या दादा दादी के नाम को भी पुराने रिकॉर्ड से जोडऩे की व्यवस्था थी। संबंधित स्थिति के आधार पर बूथ और क्रम संख्या जैसी जानकारी मांगी जा रही थी। कागज पर सवाल भले एक अतिरिक्त घोषणा का था लेकिन इसकी अहमियत इसलिए बढ़ गई क्योंकि यह नए मतदाता के पंजीकरण की प्रक्रिया में दिखाई दे रही थी। और यहीं चुनाव आयोग के भीतर कानूनी प्रक्रिया का सवाल उठा।
सीएम शिवकुमार बोले- फॉर्म 7 के फर्जी आवेदनों पर रखनी होगी नजर
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कांग्रेस के बूथ-लेवल एजेंटों पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वह एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 के तहत बड़ी संख्या में आवेदन जमा किए जाने के आरोपों के बारे में जानकारी दें। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए दो वीडियो में शिवकुमार ने बीएलए बीएलए 1, बीएलए 2 और पार्टी के दूसरे नेताओं से कहा कि वह बूथ लेवल अधिकारियों के साथ मिलकर यह पता लगाएं कि क्या उनके विधानसभा क्षेत्रों और पोलिंग बूथों में वोटरों के खिलाफ कोई आपत्ति दर्ज कराई गई है। शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि कुछ भाजपा नेता बड़ी संख्या में फॉर्म 7 एप्लीकेशन जमा कर रहे हैं ताकि वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटाए जा सकें। उनका आरोप है कि खास तौर पर अल्पसंख्यकों, पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को निशाना बनाया जा रहा है।
विपक्ष का अगला निशाना सिर्फ चुनाव आयोग नहीं होगा
बैठक में यह भी तय किया गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े के नेतृत्व में विपक्षी नेता अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगेंगे। विपक्ष राष्ट्रपति के सामने चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर अपनी चिंताएं रखेगा। खडग़े ने बैठक के बाद कहा कि विपक्ष संस्थाओं के कामकाज को लेकर अपनी चिंता राष्ट्रपति के सामने रखना चाहता है। यानी एसआईआर विवाद अब एक नए राजनीतिक चरण में पहुंचता दिख रहा है चुनाव आयोग से सवाल सड़क पर आंदोलन और फिर राष्ट्रपति भवन तक दस्तक।
सड़क से राष्ट्रपति भवन तक मोर्चा सेव डेमोक्रेसी
एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहा विपक्ष अब इस लड़ाई को संसद और प्रेस कॉन्फ्रें स से निकालकर सड़क तक ले जाने की तैयारी में है। इंडिया गठबंधन की बैठक में विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर अपनी चिंताओं के खिलाफ साझा आंदोलन की रणनीति तय की। करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने ऐलान किया कि 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में सेव डेमोक्रेसी मार्च और प्रदर्शन किए जाएंगे। इस अभियान का सबसे बड़ा पड़ाव 6 अक्टूबर होगा। इस दिन इंडिया गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च करेंगे। विपक्ष एसआईआर मतदाता सूचियों में बदलाव चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोग के सामने अपनी बात रखेगा।
आयुक्तों ने उठाई थी उंगली
पूरा मामला आनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन के फार्म 6 से जोड़ी गयी उस अतिरिक्त घोषणा का है जिसमें नए मतदाताओं से उनके या उनके माता पिता अथवा दादा दादी के पुराने एसआईआर वाले मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी गयी थी। जुलाई में इस बदलाव की रिपोर्ट सामने आयी तो मामला यहीं नहीं रुका। चुनाव आयोग के ही दो आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव की वैधानिकता पर आपत्ति दर्ज की थी। उनके मुताबिक वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी था। मई में विवेक जोशी ने फाइल पर दर्ज आपत्ति में कहा था कि फार्म 6 और फार्म 8 जैसे वैधानिक फॉर्म को रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्ट्रस रूलस 1960 में संशोधन किए बिना बदला नहीं जा सकता। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई और बदलाव को हटाने की मांग की।




