राज और उद्धव ठाकरे ने संभाला मोर्चा, ECI के खिलाफ मुंबई में निकला ग्रैंड मार्च

महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को एक बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे लंबे समय बाद एक बार फिर एक साथ नजर आए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को एक बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे लंबे समय बाद एक बार फिर एक साथ नजर आए।

दोनों नेता चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित ‘विराट गर्जना मोर्चा’ में शामिल होने के लिए मुंबई के मेट्रो सिनेमा पहुंचे। यह संयुक्त मार्च चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों के बीच आयोजित किया गया। मार्च का नेतृत्व राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने किया।

मेट्रो सिनेमा से शुरू हुआ मार्च

रविवार को दक्षिण मुंबई स्थित मेट्रो सिनेमा के पास कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ जुटी। इसके बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की अगुवाई में मार्च आगे बढ़ा।

रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च का रास्ता मेट्रो सिनेमा से बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) मुख्यालय तक रखा गया। शुरुआत में मार्च का रूट अलग प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसे बदलकर मेट्रो सिनेमा से BMC मुख्यालय तक किया गया। इस प्रदर्शन को ‘विराट गर्जना मोर्चा’ नाम दिया गया है। इसमें कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया।

चुनाव आयोग के खिलाफ क्यों निकाला गया मार्च?

ठाकरे बंधुओं की ओर से आयोजित इस मार्च का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और SIR प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियां हैं।

विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से जवाबदेही और प्रक्रिया में स्पष्टता की मांग की है। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है। वहीं प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया को वापस लेने की मांग भी रखी है।

पार्टी के झंडे नहीं, तिरंगा लेकर पहुंचे समर्थक

इस मार्च की एक खास बात यह रही कि आयोजकों की ओर से समर्थकों को पार्टी के झंडे और चुनाव चिन्ह लेकर नहीं आने की अपील की गई थी। प्रदर्शन में भारतीय तिरंगा लेकर शामिल होने पर जोर दिया गया। आयोजकों ने इसे किसी एक राजनीतिक दल के कार्यक्रम के बजाय चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर व्यापक विरोध के रूप में पेश करने की कोशिश की।

लंबे समय बाद एक साथ नजर आए राज और उद्धव

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का एक साथ सार्वजनिक मंच पर आना महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। दोनों के राजनीतिक रास्ते लंबे समय से अलग रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दे पर दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन का रास्ता चुना है। इससे पहले दोनों नेताओं ने 4 अक्टूबर को संयुक्त मार्च निकालने की घोषणा की थी और अन्य विपक्षी दलों को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया था

कांग्रेस और NCP (SP) की भी भागीदारी

मार्च में कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के नेताओं ने भी हिस्सा लिया। इससे प्रदर्शन को व्यापक विपक्षी भागीदारी मिली। रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और NCP (SP) के नेताओं ने भी ठाकरे बंधुओं के साथ मार्च में भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए गए।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग शामिल रही। इसके अलावा SIR प्रक्रिया को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया।

राज ठाकरे ने SIR को लेकर आपत्ति जताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। उन्होंने चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील भी की है।  हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोप प्रदर्शनकारी दलों की ओर से लगाए गए हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के एक साथ आने से महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों नेताओं के संयुक्त कार्यक्रम को फिलहाल चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध के संदर्भ में देखा जा रहा है। यह मार्च ऐसे समय में हुआ है जब महाराष्ट्र में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में ठाकरे बंधुओं का संयुक्त रूप से सड़क पर उतरना राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

अब आगे क्या?

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की अगुवाई में हुए इस मार्च के बाद अब नजर चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच आगे होने वाली प्रतिक्रिया पर रहेगी।

विपक्षी दल SIR और मतदाता सूची से जुड़े अपने सवालों को आगे भी उठाने की बात कह रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े अंतिम तथ्य आधिकारिक स्पष्टीकरण और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल मुंबई में हुआ यह मार्च महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है।

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