फडणवीस के मजाक पर भड़के संजय राउत, बोले-अब जवाब मिलेगा
ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व में निकाले गए निर्वाचन आयोग के खिलाफ विरोध मोर्चे को लेकर राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में आज आलम ये है कि उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। भाजपाइयों में इस कदर बेशर्मी आ चुकी है जिसकी कोई हद्द नहीं है। चुनाव आयोग सीधा सीधा सवाल उठ रहा है।
SIR में गड़बड़ी इस कदर हुई कि लोगों को क्या पूरे-पूरे गांव के नाम गायब हो गए हैं, जिसके चलते ज्ञानेश कुमार उर्फ़ ज्ञानू बाबू का इस्तीफा माँगा जा रहा है लेकिन भाजपा सरकार में सत्ता का सुख भोग रहे नेता मंत्री ज्ञानेश कुमार के बचाव के चक्कर में अपना खुद का जमीर और शर्म सबकुछ बेंच चुके हैं।
तभी तो विपक्ष जहां ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगने के लिए सड़कों पर है। राजनेता लगातार हमलावर हैं। जनता आंदोलन कर रही है लेकिन वहीं सत्ताधारी दल के नेता हैं बजाय फेयर इलेक्शन के वो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हुए हैं। और विपक्ष का ही मजाक बना रहे हैं।
ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व में निकाले गए निर्वाचन आयोग के खिलाफ विरोध मोर्चे को लेकर राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। इसमें जुटी भीड़ और लोगों का हुजूम देखकर भाजपाइयों के होश उड़ गए हैं जिसके बाद भाजपा नेता बेशर्मी पर उतर गए हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्षी नेताओं को ‘गजनी’ फिल्म के आमिर खान की तरह भुलक्कड़ बताया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता भूल गए कि महाराष्ट्र में चुनाव कब हुए थे। फडणवीस ने कहा कि विपक्ष 2024 में हुए महाराष्ट्र चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाने साध रहा है जबकि तब न तो ज्ञानेश कुमार CEC थे और न ही SIR की प्रोसेस शुरू हुई थी।
फडणवीस ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार गलत बातें कर रहा है। उनके मुताबिक, जनता ने जब विपक्ष को बार-बार खारिज किया तो उसकी नाराजगी अब चुनाव आयोग पर निकल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में निकाला गया मार्च अपना खोया हुआ राजनीतिक आधार वापस पाने की कोशिश था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इतनी चर्चा के बावजूद प्रदर्शन में ज्यादा लोग नहीं जुटे।
जैस की हमने पहले ही कहा फडणवीस का यह बयान मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की अगुआई में हुए विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर था। दरअसल, विपक्षी पार्टियां इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद देशभर में प्रोटेस्ट कर रही हैं, जिसमें दावा किया गया था कि SIR को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद हैं और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR की प्रक्रिया को लेकर 10 महीने में 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की है।
इसी मुद्दे को लेकर ठाकरे बंधु CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उद्धव ठाकरे तो महाराष्ट्र में फिर से चुनाव की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव 2024 में महाराष्ट्र में BJP को करारी हार मिली थी लेकिन इसके 6 महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में ठीक उल्टा रिजल्ट दिखा।
वहीं फडणवीस के इस बयान के बाद शिवसेना नेताओं ने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। इसी बीच शिवसेना UBT नेता संजय राउत ने जोरदार हमला बोला है। संजय राऊत ने कहा कि जो मोर्चा लाखों लोगों का था और जिसकी पूरे देश में चर्चा हुई, वह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश में निकाला गया सबसे बड़ा मोर्चा था.
उन्होंने कहा, ‘कल लाखों लोग सड़क पर जमा हुए थे. उन्हें सिर्फ कोल्हेकुई सुनाई देती है, उन्हें कल की भीड़ दिखाई नहीं दी?’ राऊत ने कहा कि दिल्ली में भी इस आंदोलन को लेकर इतनी दहशत है. उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक करियर में गिरावट के संकेत दिखाई दे रहे हैं. हम उन्हें ऊर्जा देते रहते हैं, क्योंकि हमें लगता है कि उन्हें दिल्ली में भी राजनीति करनी चाहिए.
संजय राऊत ने कहा कि जब लाखों लोग सड़कों पर उतरते हैं, तो वह कोई रोना-धोना नहीं होता, बल्कि एक क्रांति होती है. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी लबाड़ लोमड़ी की भूमिका में रहती है. आशीष शेलार उनके मित्र हैं और उन्हें इस तरह गलत बयान नहीं देना चाहिए.
राऊत ने कहा कि ज्ञानेश कुमार जैसे व्यक्ति के खिलाफ और कुछ होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार और अमित शाह भूमिगत हैं. इसके साथ ही उज्ज्वल भुयार को लेकर संजय राऊत ने कहा कि उज्ज्वल भुयार को भी गजनी कहें, ऐसा फडणवीस को कहना चाहिए. उन्होंने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हैं.
राऊत ने कहा, ‘कल हम सभी सांसद चुनाव कार्यालय जाएंगे. हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग हमसे मुलाकात करेगा. हम उन्हें कुछ सबूत देंगे.’ ओम राजे को लेकर संजय राऊत ने कहा कि ओम राजे को रोका गया और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई. उनके खिलाफ ‘गद्दार’ के नारे लगाए गए. उन्होंने एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा, ‘एकनाथ शिंदे आपको प्रतिष्ठा नहीं दे सकते. वह आपको पुलिस दे सकते हैं, पैसे दे सकते हैं, सुरक्षा दे सकते हैं, लेकिन प्रतिष्ठा नहीं दे सकते.’
वहीं एनसीपी(एसपी) प्रमुख शरद चंद्र पवार ने SIR प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन और ठाकरे बंधुओं के विरोध मोर्च पर कहा, “यह मांग सिर्फ़ मुंबई तक सीमित नहीं है। पुणे, नागपुर और राज्य के कई अन्य हिस्सों में भी यह मांग उठ रही है। राज्य सरकार SIR प्रक्रिया पर काम कर रही है। वहीं प्रदर्शन को लेकर ही कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा, “हमारा कहना है, हमें आजाद मैदान में बैठने की परमिशन दीजिए। जो हमारा हक है। संविधान ने दिया है वह हक है। अगर नहीं देंगे, फिर तो आप समझ जाइएगा।
वहीं इसी बीच चुनाव आयोग को घेरते हुए महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा, “ऐसा है कि जस्टिस भुइयां ने जो बयान दिया, एकदम सही बयान उनका है, क्योंकि जिस प्रकार इलेक्शन कमीशन भारतीय जनता पार्टी की कठपुतली बनकर, जिस प्रकार इलेक्शन कमीशन के जरिए जो मतदाता के नाम काटने का काम चालू है, 13 करोड़ मतदाता पूरे देश में कट गए, महाराष्ट्र में 2 करोड़ 60 लाख मतदाता कट गए।
CEC के खिलाफ ठाकरे बंधुओं के मुंबई मार्च में विपक्षी दल भी मौजूद रहे। इसमें कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात और विजय वडेट्टीवार दिखाई दिए। इसके अलावा शरद पवार की NCP (SP) से जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख भी प्रोटेस्ट मार्च में पहुंचे।
विपक्षी पार्टियों ने इस मार्च में CEC के साथ-साथ वोटर लिस्ट का Special Intensive Revision यानी SIR का भी विरोध कर रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट की जांच और सफाई के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और इसका फायदा सत्ताधारी पक्ष को मिल सकता है।
विपक्ष ने SIR फौरन रोकने और हटाए गए नामों को फिर से जोड़ने की मांग की। CEC ज्ञानेश कुमार को भी तत्काल प्रभाव से पद से हटाने की मांग की गई। गौरतलब है कि यह मामला अभी शांत होता नहीं दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर ही जनता और विपक्ष मानेगा। क्योंकि एक के बाद एक आंदोलन हो रहे हैं।



