स्थायी कमीशन से इनकार पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, महिला अधिकारी को मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पिछले समीक्षा फैसले में इस्तेमाल किए गए शब्द “स्टैंडअलोन” का मतलब यह है कि इस अधिकारी के मामले की तुलना अन्य अधिकारियों के मामलों से नहीं की जा सकती.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि भारतीय नौसेना के चयन बोर्ड ने अपनी ‘जज एडवोकेट जनरल’ शाखा की एक महिला अधिकारी को ‘परमानेंट कमीशन’ देने से इनकार करके गलती की है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 14 जुलाई 2008 से 31 अक्टूबर 2014 तक की संबंधित रिपोर्टों को ‘परमानेंट कमीशन’ के लिए सकारात्मक सिफारिश माना जाए.
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पिछले समीक्षा फैसले में इस्तेमाल किए गए शब्द “स्टैंडअलोन” का मतलब यह है कि इस अधिकारी के मामले की तुलना अन्य अधिकारियों के मामलों से नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट ने नौसेना के चयन बोर्ड को यह निर्देश भी दिया कि वह इस संबंध में फिर से बैठक करे और कोर्ट के निर्देशों के अनुसार महिला अधिकारी के दावे पर एक बार फिर विचार करे.
प्रक्रिया 6 हफ्ते के भीतर पूरी हो जाए यह प्रक्रिया: SC
सुप्रीम कोर्ट ने चयन बोर्ड के 12 अप्रैल 2024 के उस फैसले को गलत माना है, जिसमें महिला अधिकारी के ‘परमानेंट कमीशन’ के दावे को खारिज कर दिया गया था. चयन बोर्ड ने महिला अधिकारी की गोपनीय रिपोर्टों में मिले अच्छे मूल्यांकन के बाद भी पिछली बार उसे नहीं चुने जाने के तथ्य पर अनुचित रूप से अधिक जोर दिया.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि चयन बोर्ड ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया कि अधिकारी ने अपनी ज्यादातर ‘वार्षिक गोपनीय रिपोर्टों’ (Annual Confidential Report) में प्रमोशन के लिए जरूरी ग्रेडिंग भी हासिल की थी. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जिस अधिकारी ने प्रमोशन के लिए जरूरी ग्रेडिंग हासिल की हो, उसे ‘परमानेंट कमीशन’ के लिए किस आधार पर अयोग्य माना जा सकता है? साथ ही कोर्ट ने कहा कि चयन बोर्ड को यह प्रक्रिया 6 हफ्ते के भीतर पूरी कर ली जानी चाहिए.
गोपनीय रिपोर्टों में इग्नोर करना सही नहींः सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि ‘परमानेंट कमीशन’ के लिए पिछली बार नहीं चुने जाने का तथ्य, अधिकारी की गोपनीय रिपोर्टों में दिख रहे उसके कुल प्रदर्शन पर भारी नहीं पड़ सकता. पिछली ACRs में सिफारिश वाले कॉलम खाली होने का नुकसान अधिकारी को नहीं उठाना चाहिए.



