अभिव्यक्ति की आजादी और सत्ता से सवाल पर नई पीढ़ी मुखर

4पीएम न्यूज रहा सहयोगी

  • मेरा रंग फाउंडेशन के दसवें वार्षिकोत्सव में राजनीति मीडिया और समाज में असहमति की जगह पर हुई चर्चा
  • फाउंडेशन की संस्थापक शालिनी श्रीनेत ने रखी संस्था की बात

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सत्ता से सवाल करना, असहमति की आवाज को बनाए रखना और अपनी बात कहने की कीमत से पीछे न हटना-नई पीढ़ी के सार्वजनिक जीवन में इन सवालों को लेकर मेरा रंग फाउंडेशन के दसवें वार्षिकोत्सव पर आयोजित संवाद में व्यापक चर्चा हुई। ‘बदलाव की आहट : नई पीढ़ी, नए सवाल’ विषय पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीति में युवाओं की भागीदारी और मुखर आवाजों के सामने आने वाली चुनौतियों पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में 4पीएम न्यूज़ सहयोगी के रूप में जुड़ा रहा।
वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी के मैनेजिंग एडिटर अतुल चौरसिया के संचालन में हुई बातचीत में स्वतंत्र पत्रकार एवं यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह, लोकगायिका और राजनीतिक-सामाजिक व्यंग्य के लिए चर्चित नेहा सिंह राठौर, समाजवादी पार्टी कीराष्ट्रीय प्रवक्ता नेहा यादव, राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत में मेरा रंग फाउंडेशन की संस्थापक एवं मैनेजिंग ट्रस्टी शालिनी श्रीनेत ने संस्था के दस वर्षों के सफर पर बात की। उन्होंने बताया कि 2016 में सोशल मीडिया से शुरू हुई यह पहल महिलाओं और नई पीढ़ी को अपनी बात कहने का मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आगे बढ़ी और बाद में महिला अधिकार, लैंगिक समानता, घरेलू हिंसा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर संवाद का हिस्सा बनी। बातचीत की शुरुआत में अतुल चौरसिया ने सवाल रखा कि नई पीढ़ी राजनीति, मीडिया, समाज और रचनात्मक क्षेत्र को किस तरह बदल रही है और इन बदलावों का आगे की दिशा पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने राजनीतिक दलों से जुड़े वक्ताओं से यह भी पूछा कि राजनीतिक दलों में युवाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम क्यों दिखाई देती है। इस अवसर पर आयुषी त्रिपाठी और टियारा त्रिपाठी ने स्त्री शक्ति पर आधारित ओडिसी नृत्य प्रस्तुति दी। वहीं महिला अधिकार और जेंडर जस्टिस के क्षेत्र में सक्रिय अधिवक्ता ज्योति गोयल को ‘रंग साहस’ का सम्मान प्रदान किया गया। हिंदी के कवि-कथाकार अरुण आदित्य ने उन्हें यह सम्मान दिया। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति फौजिया दास्तानगो की रही। उन्होंने स्त्रीवादी कविताओं का पाठ करते हुए स्त्रियों के सामाजिक अनुभवों और उनकी स्थितियों से जुड़े सवालों को सामने रखा। कार्यक्रम के अंत में कथाकार और उपन्यासकार विवेक मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन में छांव फाउंडेशन के साथ 4पीएम न्यूज़ की सहभागिता रही। बड़ी संख्या में सामाजिक, सांस्कृतिक, पत्रकारिता और युवा क्षेत्र से जुड़े लोग कार्यक्रम में मौजूद रहे।

आज का युवा अपनी अभिव्यक्ति के लिए नए स्पेस तलाश रहा है : श्याम मीरा सिंह

श्याम मीरा सिंह ने कहा कि आज का युवा अपनी अभिव्यक्ति के लिए नए स्पेस तलाश रहा है और आंदोलन भी इस अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। चर्चा में डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ यह सवाल भी सामने आया कि युवा अपनी बात कहने के लिए परंपरागत संस्थानों से अलग नए मंच क्यों तलाश रहा है।

लगातार गालियां मिल रही हैं मतलब बात असर पैदा कर रही : प्रियंका भारती

प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया ट्रोलिंग और गालियों को लेकर कहा कि अगर किसी को लगातार गालियां मिल रही हैं तो इसका एक अर्थ यह भी हो सकता है कि उसकी बात असर पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि उनके लिए अपमानजनक संबोधनों से डरने के बजाय उन्हें अपने ढंग से परिभाषित करना प्रतिरोध का एक तरीका है। प्रियंका ने कहा कि अगर उन्हें ‘शूर्पणखा’ कहा जाता है तो वे उसे ऐसी साहसी स्त्री के प्रतीक के रूप में देखती हैं जो अपनी इच्छाओं और सेक्सुअलिटी को स्वीकार करती है। इसी तरह अगर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के नाम को जोडक़र उन्हें अपशब्द कहे जाते हैं तो वे आंबेडकर की वैचारिक विरासत को गर्व के साथ स्वीकार करती हैं।

मुखर स्त्री को आसानी से स्वीकार नहीं करता समाज : नेहा राठौर

नेहा सिंह राठौर ने मुखर महिलाओं के सामने आने वाली सामाजिक और सार्वजनिक चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समाज की संरचना ऐसी है कि वह मुखर स्त्री को आसानी से स्वीकार नहीं करता। नेहा यादव ने कहा कि महिलाओं को चुप कराने का आसान तरीका उनके सवालों का जवाब देने के बजाय उनके चरित्र पर सवाल खड़ा करना है।

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