शाहीन-नफीसा के बाद तीन और महिला पत्रकारों के दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप!

जंतर मंतर पर महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस पर यौन उत्पीडऩ और बदसलूकी के लगाये गये आरोपों से पूरे देश में सनसनी। शहीन नफीसा की नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के बाद दबाव में सरकार। एसीपी विवेक भगत को मिला एडीसीपी का चार्ज सरकार ने वापस लिया। क्राइम ब्रांच की चल रही जांच नतीजों से पहले बैकफुट पर सरकार।
- दिल्ली पुलिस पर नस्लीय भेदभाव के बाद अब लगे यौन उत्पीडऩ के आरोप
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली में फिर वही कहानी लौट आयी है महिला पत्रकार, पुलिस की वर्दी और गंभीर आरोप। कुछ हफ्ते पहले शाहीन खान और नफीसा खान ने साकेत थाने के भीतर अपने साथ मारपीट और बदसलूकी की कहानी सुनाई थी। दोनों का कहना था कि उन्हें हिरासत में लेकर पीटा गया और उनकी धार्मिक पहचान सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस का व्यवहार और भी खराब हो गया। एक महिला पुलिसकर्मी को जब पता चला कि वह मुस्लमान है तो फिर उन्हें टार्चर जैसे हालतों से गुजरना पड़ा। इस घटना के ठीक एक महीने बाद यानि कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन को कवर कर रही तीन और महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस पर ऐसे गंभीर आरोप लगाये हैं कि उन आरोपों को लिखते हुए शर्म महसूस हो रही है। महिला पत्रकारों का कहना है कि कवरेज के दौरान एसीपी विवेक भगत और दूसरे पुलिसकर्मियों ने उन्हें बेहूदा तरीके से पीछे की ओर धकेला। इस घटना के बाद पूरे देश में दिल्ली पुलिस की इस कार्यशैली पर गुस्सा और आक्रोश है, पत्रकार संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। सवाल फिर वही पुरना है कि क्या सवाल पूछने वाली महिलाओं के साथ पुलिस का रवैया महज अलग अलग घटनाओं की कहानी है या कोई बड़ा पैटर्न बनता जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इसी बीच शाहीन और नफीसा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। उन्होंने अपने साथ मारपीट और बदसलूकी की पूरी कहानी उन्हें बताई। इसके बाद राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला और साकेत थाने का पूरा सीसीटीवी सार्वजनिक करने की मांग की।,
कैसे मिल गयी बड़ी जिम्मेदारी
3 अक्टूबर को जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। मुद्दा था चुनावी प्रक्रिया और एसआईआर को लेकर विपक्ष के आरोप। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव हुआ। इसी दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर यौन उत्पीडऩ और बदसलूकी के आरोप लगाए। दिल्ली पुलिस ने तीनों शिकायतों की पुष्टि की और कहा कि उन्हें निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेजा गया है। यानी पुलिस के खिलाफ शिकायत पुलिस की दूसरी शाखा को जांच के लिए दे दी गयी अब इस जांच का नतीजा क्या निकलता है यह आने वाला वक्त बताएगा लेकिन शिकायतों में से एक ने पूरे मामले को और बड़ा बना दिया प्रर्दशन कवर कर रही एक महिला पत्रकार ने कहा कि उसने एसीपी विवेक भगत से वहां महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर सवाल किया। आरोप के मुताबिक इसके बाद एसपीपी ने उसके साथ अनुचित शारीरिक व्यवहार किया और उसे पीछे धकेला। उसने और बाकी की दो अन्य महिला पत्रकारों जिनके साथ भी अनुचित व्यवाहर किया गया था ने इस मामले में शिकायत दर्ज की एफआईआर हुई लेकिन शिकायत के बीच अधिकारी को नयी जिम्मेदारी कैसे मिल गई? यह बड़ा सवाल है।
बैकफुट पर एनडीए सरकार
सरकार की तरफ से कहा गया है कि महिला पत्रकारों से उत्पीडऩ के आरोपों से जुड़े एक अधिकारी के अनुरोध के बाद दिल्ली सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपने वाले आदेश में संशोधन किया है। अपने एक्स हैंडल पर जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण के आधार पर दिल्ली सरकार ने बताया है कि 5 अक्टूबर, 2026 के एक आदेश में दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (डीएएनआपीएस) के 12 अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद का वर्तमान कार्यभार सौंपा गया था। अब सहायक पुलिस आयुक्त विवेक भगत के संबंध में इस आदेश में संशोधन किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन अधिकारियों को अतिरिक्त ड्यूटी का काम सौंपने का प्रस्ताव 25 अगस्त को ही शुरू कर दिया गया था यानी उन हालिया घटनाओं से काफी पहले जिनकी वजह से लोगों का ध्यान इस ओर गया। 5 अक्टूबर, 2026 को जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही इसके आदेश जारी किए गए। आदेश में बताया गया है कि वर्तमान कार्यभार सौंपना एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। इससे संबंधित अधिकारियों को कोई आर्थिक फायदा नहीं मिलता और न ही उन्हें उस पद पर नियमित रूप से काम करने वाले अधिकारियों की तरह कोई कानूनी जिम्मेदारी निभाने की इजाजत मिलती है। विवेक भगत ने अपनी स्वेच्छा से अनुरोध किया है कि महिला पत्रकारों के कथित उत्पीडऩ के मामले में पूरी जांच होने और उसके संतोषजनक रूप से संपन्न होने तक वह वर्तमान कार्यभार की जिम्मेदारी नहीं लेंगे। उनके अनुरोध को देखते हुए 5 अक्टूबर के आदेश में बदलाव किया जा रहा है और इसे केवल बाकी बचे 11 अधिकारियों के लिए फिर से जारी किया जाएगा। यह घटनाक्रम महिला पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की खबरों के बाद दिल्ली पुलिस की बढ़ती जांच पड़ताल के बीच सामने आया है।




