गुजरात में सूखे पर बवाल, किसानों के मुद्दे पर इसुदान गढ़वी की BJP सरकार को चेतावनी
गुजरात में सूखे, सिंचाई के पानी और पशुओं के चारे की कमी को लेकर किसानों की परेशानियां बढ़ रही हैं... आम आदमी पार्टी गुजरात...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के किसान आज सूखे की विकट स्थिति से जूझ रहे हैं.. सिंचाई के पानी और चारे की भारी कमी ने सौराष्ट्र, कच्छ.. और उत्तर गुजरात के गांवों को त्रस्त कर रखा है.. खेत सूखे पड़े हैं, फसलें मुरझा रही हैं.. और पशुधन चारे के अभाव में मरने की कगार पर है.. फिर भी भाजपा सरकार सूखा घोषित करने से इनकार कर रही है.. वहीं यह रवैया किसानों के साथ अन्याय है.. जब अन्य राज्यों में भाजपा शासित सरकारें सूखा घोषित कर राहत दे रही हैं.. तो गुजरात सरकार किसका इंतजार कर रही है.. सौनी योजना से पानी की आपूर्ति बंद रखकर किसानों का मजाक उड़ाना बंद करें.. आम आदमी पार्टी गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने साफ चेतावनी दी है कि.. अगर सरकार अब भी नहीं चेती तो सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात में जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा..
इस साल मानसून में असमान बारिश हुई है.. देवभूमि द्वारका में औसत से मात्र पांच प्रतिशत बारिश हुई, पोरबंदर में अठारह प्रतिशत.. और जामनगर में अट्ठाईस प्रतिशत के आसपास.. कच्छ में भी कमी रही.. सौराष्ट्र के कई जिलों में वर्षा की कमी साठ से अस्सी प्रतिशत तक पहुंच गई.. नतीजतन खरीफ फसलें बर्बाद हो गईं.. रबी सीजन की बुवाई भी संकट में है.. क्योंकि सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं है.. किसान ट्यूबवेल चला नहीं पा रहे क्योंकि बिजली कटौती आम बात हो गई है.. पशुपालक चारे की तलाश में पलायन को मजबूर हैं.. यह स्थिति सूखे की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है.. फिर भी सरकार सर्वेक्षण और आंकड़ों के नाम पर समय गंवा रही है..
सौनी योजना यानी सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई योजना किसानों की जीवन रेखा मानी जाती थी.. नर्मदा के अतिरिक्त पानी को पाइपलाइनों के जरिए सौराष्ट्र के एक सौ पंद्रह जलाशयों तक पहुंचाने का वादा किया गया था.. लेकिन आज इस योजना से पानी की आपूर्ति बंद या अपर्याप्त है.. कई क्षेत्रों में नहरें सूखी पड़ी हैं.. सरकार पीने के पानी को प्राथमिकता बताकर सिंचाई का पानी रोक रही है.. यह तर्क किसानों को ठगने जैसा है.. जब जलाशय खाली हैं.. और फसलें सूख रही हैं.. तो प्राथमिकता बदलनी चाहिए.. सौनी योजना का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचाना सरकार का कर्तव्य है.. न कि राजनीतिक दिखावा..
किसानों को दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है.. बीज, खाद, मजदूरी सब बर्बाद हो गया.. छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.. उनके पास विकल्प नहीं है.. पशुपालकों की स्थिति और दयनीय है.. चारे की कीमतें आसमान छू रही हैं.. कई गांवों में आठ से अट्ठाईस दिन तक पीने का पानी नहीं आया.. महिलाएं और बच्चे दूर से पानी लाने को मजबूर हैं.. यह मानवीय संकट है.. सरकार को तुरंत सूखा घोषित कर मुआवजा, ब्याज मुक्त ऋण, बिजली बिल माफी.. और मुफ्त चारा उपलब्ध कराना चाहिए..
वहीं अन्य राज्यों में भाजपा सरकारें सूखा घोषित कर रही हैं और राहत पैकेज दे रही हैं.. गुजरात में क्यों नहीं.. क्या यहां के किसान दूसरे दर्जे के हैं.. केंद्र से भी मदद मांगी जा रही है.. पड़ोसी राज्यों से बिजली या नकद के बदले पानी लेने की बात चल रही है.. लेकिन जब तक सूखा आधिकारिक रूप से घोषित नहीं होता.. किसान केंद्र और राज्य की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं ले पाते.. मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना के तहत मुआवजा मिलना मुश्किल हो जाता है.. सरकार सर्वेक्षण का इंतजार कर रही है.. लेकिन जमीनी हकीकत पहले से साफ है..



