मिडिल ईस्ट ऑपरेशन के बाद बदला ठिकाना, फुकेत पहुंचा अमेरिकी नौसेना का बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर
मिडिल ईस्ट में ऑपरेशनल तैनाती के बाद अमेरिकी नौसेना का परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN-77) थाईलैंड के फुकेत पहुंचा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिडिल ईस्ट में ऑपरेशनल तैनाती के बाद अमेरिकी नौसेना का परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN-77) थाईलैंड के फुकेत पहुंचा है।
लंबे समय तक समुद्री और सैन्य अभियानों में तैनात रहने के बाद युद्धपोत के फुकेत पहुंचने को उसके क्रू के लिए राहत और आराम के महत्वपूर्ण पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है। विमानवाहक पोत की तैनाती के दौरान अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां मिडिल ईस्ट और आसपास के रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों में केंद्रित रही हैं। फुकेत में ठहराव के दौरान जहाज के चालक दल को आराम करने और लंबे ऑपरेशनल मिशन के बाद सामान्य गतिविधियों में लौटने का अवसर मिला है।
लंबे ऑपरेशनल मिशन के बाद फुकेत पहुंचा युद्धपोत
USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश अमेरिकी नौसेना के Nimitz-class nuclear-powered aircraft carriers में शामिल है। यह विशाल विमानवाहक पोत अमेरिकी नौसेना की प्रमुख समुद्री सैन्य क्षमताओं में से एक माना जाता है। हजारों नौसैनिकों वाले इस तरह के विमानवाहक पोत लंबे समय तक समुद्र में रहकर विभिन्न अभियानों को अंजाम देने में सक्षम होते हैं। जहाज पर लड़ाकू विमानों के संचालन के साथ-साथ कमांड, लॉजिस्टिक्स, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं मौजूद रहती हैं। मिडिल ईस्ट में ऑपरेशनल गतिविधियों के बाद फुकेत में ठहराव चालक दल के लिए अपेक्षाकृत आराम का समय प्रदान करता है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नौसेना की भूमिका
मिडिल ईस्ट लंबे समय से अमेरिकी सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी नौसेना अपने बड़े युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स के जरिए समुद्री मौजूदगी बनाए रखती है।USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश की तैनाती भी इसी व्यापक अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी का हिस्सा रही है। एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ तैनात अन्य युद्धपोत और सैन्य विमान निगरानी, सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर ऑपरेशनल मिशन में सहयोग प्रदान करते हैं। हालांकि, किसी विशेष मिशन के दौरान जहाज की भूमिका और गतिविधियों की पूरी जानकारी हमेशा सार्वजनिक नहीं की जाती है।
फुकेत में क्रू को मिलेगा आराम
फुकेत का दौरा अमेरिकी नौसैनिकों के लिए लंबे समुद्री मिशन के बीच एक महत्वपूर्ण पोर्ट कॉल है। ऐसे पड़ावों के दौरान सैन्यकर्मियों को जहाज से बाहर निकलने, आराम करने और स्थानीय क्षेत्र में समय बिताने का अवसर मिलता है। लंबे समय तक समुद्र में तैनात रहने वाले क्रू के लिए इस तरह के पोर्ट विजिट मानसिक और शारीरिक आराम के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। फुकेत दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रमुख पर्यटन केंद्र है और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक जहाजों के पोर्ट कॉल के लिए भी जाना जाता है।
USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश कितना खास है?
USS George H.W. Bush अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े और अत्याधुनिक विमानवाहक पोतों में शामिल है। इसका नाम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और नौसेना के पूर्व पायलट जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश के नाम पर रखा गया है। यह विमानवाहक पोत परमाणु ऊर्जा से संचालित होता है और लंबे समय तक बिना पारंपरिक ईंधन भरने की आवश्यकता के समुद्री अभियानों में तैनात रह सकता है। जहाज पर बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर संचालित किए जा सकते हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ विभिन्न प्रकार के सहायक और सुरक्षा प्रदान करने वाले युद्धपोत भी तैनात किए जाते हैं, जिससे पूरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप एक स्वतंत्र समुद्री सैन्य क्षमता के रूप में काम कर सकता है।
अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी के लिहाज से अहम पड़ाव
USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश का फुकेत पहुंचना ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट समेत दुनिया के कई हिस्सों में समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी हुई हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिकी नौसैनिक जहाजों की मौजूदगी को क्षेत्रीय समुद्री गतिविधियों और अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ सैन्य संबंधों के संदर्भ में भी देखा जाता है। हालांकि, किसी पोर्ट कॉल को सीधे किसी नए सैन्य अभियान से जोड़ना उचित नहीं होगा, जब तक अमेरिकी नौसेना या संबंधित अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि न की जाए।
आगे क्या होगा?
फुकेत में ठहराव के बाद USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश की अगली गतिविधियां अमेरिकी नौसेना के ऑपरेशनल शेड्यूल पर निर्भर करेंगी। एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती आमतौर पर कई चरणों में होती है, जिसमें समुद्री अभियान, सहयोगी देशों के साथ अभ्यास और निर्धारित पोर्ट विजिट शामिल हो सकते हैं। फिलहाल फुकेत पहुंचना लंबे मिडिल ईस्ट ऑपरेशन के बाद अमेरिकी नौसैनिकों के लिए एक अहम ब्रेक के रूप में सामने आया है। जहाज की आगे की तैनाती और मिशन से संबंधित जानकारी अमेरिकी नौसेना की आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर ही स्पष्ट होगी।



