भाजपा की अंदरूनी कलह के बीच मतदाता अभियान को झटका! अंतिम दिन बद्रीनाथ रवाना हुए सात मंडल अध्यक्ष
प्रदेश नेतृत्व जहां अभियान को गंभीरता से लेते हुए पदाधिकारियों को पूरी ताकत लगाने के निर्देश दे रहा था,

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा में नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतिम दिन महानगर इकाई के सात मंडल अध्यक्षों के बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर रवाना होने से संगठन के भीतर हलचल मच गई है। प्रदेश नेतृत्व जहां अभियान को गंभीरता से लेते हुए पदाधिकारियों को पूरी ताकत लगाने के निर्देश दे रहा था,
वहीं सात मंडल अध्यक्षों के एक साथ शहर से बाहर जाने के मामले ने संगठन की कार्यशैली, आपसी समन्वय और जिम्मेदारियों के निर्वहन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे भाजपा की महानगर इकाई के भीतर तालमेल की कमी से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि अंदरूनी कलह की वजह होने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शनिवार सुबह महानगर इकाई के सात मंडल अध्यक्ष बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर रवाना हुए। इनमें बांके बिहारी मंडल अध्यक्ष मोहित अरोड़ा, पूर्वी मंडल अध्यक्ष जयदीप चौधरी, दीनदयाल मंडल अध्यक्ष कन्हैया राजपूत, सीबीगंज मंडल अध्यक्ष अजय कुमार मौर्य, हरमिलाप मंडल अध्यक्ष राजीव कश्यप, साईं नाथ मंडल अध्यक्ष बृजेश प्रताप सिंह और मढ़ीनाथ मंडल अध्यक्ष सुधीर भटनागर के नाम सामने आए हैं।
अभियान के अंतिम दिन ही क्यों बनाया यात्रा का कार्यक्रम?
विशेष मतदाता जोड़ो अभियान के दौरान प्रदेश नेतृत्व की ओर से संगठन के पदाधिकारियों और प्रभारियों को नए मतदाताओं के नाम जुड़वाने के लिए सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए थे।

ऐसे में अभियान के अंतिम दिन सात मंडल अध्यक्षों का एक साथ शहर से बाहर जाना राजनीतिक और संगठनात्मक चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या महानगर इकाई को इस यात्रा की पहले से जानकारी थी और यदि थी, तो अभियान के अंतिम दिन संगठन की जिम्मेदारियों का निर्वहन किसके भरोसे छोड़ा गया?
यदि यात्रा का कार्यक्रम पहले से तय था, तो क्या इसकी जानकारी महानगर नेतृत्व को दी गई थी? और अगर जानकारी नहीं थी, तो संगठन के भीतर संवाद और अनुशासन की स्थिति क्या है? फिलहाल इन सवालों पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।
संगठन में तालमेल की कमी या नेताओं की आपसी खींचतान?
सात मंडल अध्यक्षों का एक साथ अभियान के अंतिम दिन शहर से बाहर जाना भाजपा की महानगर इकाई में आपसी तालमेल को लेकर सवाल पैदा कर रहा है।
राजनीतिक हलकों में इसे संगठन के भीतर समन्वय की कमी और नेतृत्व की पकड़ से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस घटनाक्रम को सीधे तौर पर गुटबाजी या अंदरूनी कलह का परिणाम बताने के लिए फिलहाल पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
भाजपा के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि मतदाता सूची से जुड़े अभियान को संगठन की जमीनी सक्रियता और बूथ स्तर की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे समय में प्रमुख पदाधिकारियों की अनुपस्थिति कार्यकर्ताओं के बीच क्या संदेश देती है, यह भी चर्चा का विषय है।
महानगर अध्यक्ष की चुप्पी से बढ़े सवाल
मामले पर महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। लिहाजा यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि सातों मंडल अध्यक्षों की यात्रा की जानकारी संगठन को थी या नहीं और उनकी अनुपस्थिति में अभियान की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई थी।
अब निगाहें महानगर नेतृत्व के रुख पर टिकी हैं। संगठन इस मामले में स्थिति स्पष्ट करता है या पदाधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल मतदाता जोड़ो अभियान के अंतिम दिन सामने आया यह घटनाक्रम भाजपा की महानगर इकाई में समन्वय, जवाबदेही और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर नई बहस छेड़ गया है।
रिपोर्ट –सुनील सक्सेना,बरेली



