बाप रे… मशीन बोली– तुम बांग्लादेशी! खतरे में ज्ञानेश की नौकरी?
ज्ञानेश कुमार को इतना मुश्किल कंपटीशन मिल गया है.. वहीं अगर यह वीडियो ज्ञानेश कुमार ने देख लिया तो उनकी रातों की नींद उड़ जाएगी.. क्योंकि ज्ञानेश कुमार जो काम इतने दिनों नहीं कर पाए..

4पीएम न्यूज नेटवर्क: ज्ञानेश कुमार को इतना मुश्किल कंपटीशन मिल गया है.. वहीं अगर यह वीडियो ज्ञानेश कुमार ने देख लिया तो उनकी रातों की नींद उड़ जाएगी.. क्योंकि ज्ञानेश कुमार जो काम इतने दिनों नहीं कर पाए..
और वह काम इतनी परेशानी, मशक्कत से कर रहें हैं.. और उस काम को करने के लिए तमाम तरह की परेशानियां हो रही है.. देश में जमकर विरोध हो रहा है.. उस काम में लगे लोगों की जान जा रही है.. उसी काम को डबल इंजन की पुलिस चुटकियों में कर रही है.. मुख्य चुनाव आयुक्त इस प्रक्रिया को गौर से देखे कि जिस काम को कराने के लिए लोगों को लाइन में लगाया जा रहा है.. कई दस्तावेज मांगे जा रहे हैं.. वहीं काम को करने के लिए डबल इंजन ने एक ऐसी मशीन इजात की है.. जा आपकी पीठ पर रखते ही बता देगी कि आप बांग्लादेशी है.. रोहिंग्या है.. डबल इंजन की पुलिस मजाक जनता के साथ नहीं.. चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कर रही है..
जिस एसआईआर को कराने के लिए ज्ञानेश कुमार इतनी मेहनत कर रहे हैं.. इस समय बारह राज्यों में एसआईआर का काम चल रहा है.. इसी बीच डबल इंजन पुलिस के इस इजात में ज्ञानेश की टेंशन को बढ़ा दिया है.. और मशीन बता रही है.. कि तुम बांग्लादेशी हो.. मशीन बता रही है.. कि तुम बांग्लादेशी हो.. ये डबल इंजन पुलिस का कारनामा है.. बता दें कि पुलिस झुग्गियों में जाकर आपरेशन टार्च के जरिए पता कर रही है.. कि कौन कहा का है.. इस दौरान यह मामला सामने आया..
यह एक छोटा सा वीडियो यूपी के गाजियाबाद का है.. जो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया.. इस वीडियो में कौशांबी थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर अजय शर्मा.. एक व्यक्ति की पीठ पर अपना मोबाइल फोन रखकर उसकी नागरिकता जांच करते नजर आ रहे हैं.. वे कहते हैं कि मशीन बता रही है कि तुम बांग्लादेशी हो.. जबकि वह व्यक्ति बार-बार कहता है कि वह बिहार के अररिया जिले का रहने वाला है.. यह वीडियो 23 या 24 दिसंबर 2025 का बताया जा रहा है.. जब पुलिस रैपिड एक्शन फोर्स के साथ इलाके में फ्लैग मार्च कर रही थी.. वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों में हड़कंप मच गया.. कुछ लोग इसे पुलिस की नई तकनीक का मजाक उड़ा रहे हैं.. तो कुछ इसे गंभीर मुद्दा मानकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं..
यह घटना गाजियाबाद के भोवापुर इलाके की झुग्गी-झोपड़ी वाली बस्ती में हुई.. पुलिस वहां रूटीन चेकिंग के लिए गई थी.. लेकिन SHO का यह तरीका इतना अजीब था कि वीडियो देखने वालों को हंसी भी आई और चिंता भी हुई.. क्या सच में कोई ऐसी मशीन है जो फोन से नागरिकता बता दे.. या यह सिर्फ लोगों पर दबाव बनाने का तरीका था.. तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं.. 23 दिसंबर को गाजियाबाद पुलिस की टीम कौशांबी थाने के इलाके में फ्लैग मार्च पर निकली थी.. फ्लैग मार्च मतलब पुलिस की गश्त, जिसमें वे इलाके में शांति बनाए रखने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हैं। इस दौरान टीम झुग्गी बस्ती में पहुंची.. वहां रहने वाले लोग ज्यादातर मजदूर वर्ग के थे.. जो काम की तलाश में दूसरे राज्यों से आए हुए थे.. पुलिस ने कुछ लोगों से उनके पहचान पत्र मांगे..
वहीं जिन लोगों के पास कागजात नहीं थे.. उनसे SHO अजय शर्मा ने मौखिक रूप से पूछताछ की.. एक व्यक्ति ने बताया कि वह बिहार के अररिया जिले का रहने वाला है.. लेकिन SHO ने कहा कि तुम झूठ तो नहीं बोल रहे.. हमारे पास एक मशीन है.. जो कमर पर लगाने से सच बता देगी.. फिर उन्होंने अपना मोबाइल फोन उस व्यक्ति की पीठ पर रखा और कहा कि मशीन दिखा रही है कि तुम बांग्लादेशी हो.. वीडियो में व्यक्ति की बेटी अपना आधार कार्ड दिखाती नजर आ रही है.. और वह बार-बार कह रही है कि वे भारतीय हैं.. लेकिन SHO ने फोन को मशीन बताकर दावा किया कि यह नागरिकता का पता लगा लेता है..
वहीं यह वीडियो करीब 30 सेकंड का है.. लेकिन इसमें SHO की बातें साफ सुनाई दे रही हैं.. वे कहते हैं कि यह मशीन पीठ पर रखो, तो पता चल जाता है कि कहां का है.. मशीन बता रही है बांग्लादेशी.. आसपास के लोग हैरान थे.. और किसी ने चुपके से यह वीडियो रिकॉर्ड कर लिया.. वहीं 1 जनवरी 2026 को यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.. जिसको लेकर लोकल लोगों का कहना है कि वह व्यक्ति सच में बिहार का था.. न कि बांग्लादेशी था.. झुग्गी में रहने वाले कई लोग मजदूरी करते हैं.. और उनके पास हमेशा कागजात नहीं होते है.. लेकिन पुलिस का यह तरीका नया था.. आमतौर पर पुलिस अपराधियों से पूछताछ में दबाव बनाती है.. लेकिन यहां फोन को मशीन बताना एकदम अनोखा था.. शायद SHO का मकसद लोगों को डराकर सच उगलवाना था.. लेकिन यह तरीका उल्टा पड़ गया..
उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा पुराना है.. कई इलाकों में अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों की शिकायतें आती रहती हैं.. गाजियाबाद दिल्ली से सटा हुआ है.. इसलिए यहां मजदूरों की आवाजाही ज्यादा है.. पुलिस अक्सर झुग्गी बस्तियों में चेकिंग करती है.. ताकि अपराध रोक सके.. फ्लैग मार्च भी इसी का हिस्सा है.. 2025 में बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बाद भारत में घुसपैठ की खबरें बढ़ीं.. सरकार ने SIR जैसी योजनाएं शुरू की.. जहां संदिग्धों की जांच होती है.. लेकिन इस मामले में कोई औपचारिक जांच नहीं थी.. पुलिस का कहना है कि यह क्राइम रोकने के लिए रूटीन वेरिफिकेशन था.. जिसको लेकर गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर ने कहा कि झुग्गियों में अक्सर अपराधी छिपते हैं.. इसलिए आईडेंटिटी चेक जरूरी है.. लेकिन फोन से स्कैनिंग का तरीका आधिकारिक नहीं था..
SHO अजय शर्मा कौशांबी थाने के इंचार्ज हैं.. और कई सालों से पुलिस में हैं.. उनके खिलाफ पहले कोई बड़ा विवाद नहीं था.. लेकिन इस वीडियो ने उनकी छवि पर सवाल खड़े कर दिए.. कुछ लोगों का कहना है कि यह मजाक था.. लेकिन सोशल मीडिया पर इसे गंभीरता से लिया गया.. वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तूफान आ गया..
कुछ लोगों ने इसे गंभीर बताया.. एक पोस्ट में कहा गया कि यह पुलिस की ज्यादती है.. गरीबों को डराकर क्या मिलेगा.. नागरिकता जांच के लिए कागजात होते हैं, न कि फोन.. राजनीतिक पार्टियां भी कूद पड़ीं.. विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह भाजपा शासित UP पुलिस की मनमानी है.. एक पोस्ट में लिखा कि SHO अजय शर्मा ने नई मशीन इजाद की है.. चुनाव आयोग को यह डिवाइस दे दो, वोटर्स की जांच आसान हो जाएगी..
वहीं वीडियो वायरल होने के बाद गाजियाबाद पुलिस की किरकिरी हुई.. लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया कि SHO को सस्पेंड किया जाएगा या जांच होगी.. पुलिस कमिश्नर ने कहा कि यह रूटीन चेक था.. झुग्गियों में अपराध रोकने के लिए पूछताछ जरूरी है.. लेकिन फोन को मशीन बताने पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया.. कुछ सूत्रों का कहना है कि यह दबाव बनाने का पुराना तरीका था.. पुलिस अपराधियों से कहती है कि हमारे पास सबूत है.. ताकि वे कबूल करें.. यहां भी शायद SHO ने सोचा कि लोग डरकर सच बताएंगे.. लेकिन वीडियो लीक हो गया.. UP पुलिस ने ट्वीट किया कि वे फेक न्यूज पर नजर रख रहे हैं..
यह घटना अकेली नहीं है.. भारत में बांग्लादेशी घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा है.. 2025 में बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद हजारों लोग सीमा पार करके आए.. UP, बिहार और पश्चिम बंगाल में ऐसे मामले बढ़े.. सरकार ने NRC और CAA जैसे कानून बनाए.. लेकिन वे विवादास्पद हैं.. झुग्गी बस्तियों में गरीब लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं.. उनके पास कागजात नहीं होते.. तो पुलिस उन्हें संदिग्ध मान लेती है.. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसे तरीके गलत हैं.. नागरिकता जांच के लिए आधार, पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी हैं.. न कि कोई मशीन.. यह घटना पुलिस की ट्रेनिंग पर भी सवाल उठाती है.. क्या अधिकारियों को सही तरीके से पूछताछ सिखाई जाती है..
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ज्यादती का उदाहरण है.. एक वकील ने कहा कि पुलिस को कानून का पालन करना चाहिए.. फोन से स्कैनिंग कोई वैध तरीका नहीं है.. वहीं यह गरीबों के खिलाफ भेदभाव दिखाता है.. बिहार से आए मजदूरों को बांग्लादेशी कहना गलत है.. वहीं अगर जांच हुई, तो SHO पर कार्रवाई हो सकती है.. लेकिन अभी तक शांत है.. सोशल मीडिया ने दबाव बनाया है, शायद सरकार नोटिस ले.. भविष्य में पुलिस को बॉडी कैमरा लगाने या चेकिंग रिकॉर्ड करने की सलाह दी जा सकती है..
वहीं यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि नागरिकता जांच कैसे होनी चाहिए.. गरीबों को परेशान करने की बजाय, सही सिस्टम बनाना जरूरी है.. यह वीडियो मजाक लगता है, लेकिन एक गंभीर मुद्दा उठाता है.. पुलिस का काम सुरक्षा है, न कि गरीबों को डराना.. उम्मीद है कि इस पूरे मामले पर जांच होगी.. और पुलिस अपनी कार्यशैली सुधारेगी..



