वोटर लिस्ट सुधार की सुनवाई बनी त्रासदी, हादसे में टीचर का परिवार उजड़ा

मालदा में वोटर लिस्ट सुधार के SIR नोटिस के कारण तनाव में शिक्षक यासीन अंसारी का परिवार सड़क हादसे का शिकार हो गया. उनकी पत्नी और 9 महीने के बच्चे की मौत हो गई. इस दुखद घटना ने SIR प्रक्रिया की मानवीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मालदा में वोटर लिस्ट सुधार के SIR नोटिस के कारण तनाव में शिक्षक यासीन अंसारी का परिवार सड़क हादसे का शिकार हो गया. उनकी पत्नी और 9 महीने के बच्चे की मौत हो गई. इस दुखद घटना ने SIR प्रक्रिया की मानवीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

देश के कई राज्यों में वोटर लिस्ट सुधार से जुड़ी एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया चल रही है, जबकि कुछ राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इसी बीच पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है. वोटर लिस्ट सुधार से जुड़ी SIR सुनवाई के लिए जाते समय एक स्कूल टीचर सड़क हादसे का शिकार हो गया. इस हादसे में उनकी पत्नी और 9 महीने के बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों की पहचान टीचर की पत्नी और उनके 9 माह के बच्चे के रूप में की गई है. मृतक परिवार मालदा जिले के रहने वाले एमडी यासीन अंसारी का है, जो कालियाचक इलाके के एक मदरसे में शिक्षक हैं. परिजनों का दावा है कि चुनाव आयोग की ओर से SIR नोटिस मिलने के बाद यासीन अंसारी काफी तनाव में थे.

जानकारी के अनुसार, यासीन अंसारी के परिवार को वोटर लिस्ट में नाम की स्पेलिंग में गलती के कारण SIR नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उन्हें सुनवाई के लिए उपस्थित होने को कहा गया था. इसी सुनवाई के लिए जाते समय यह हादसा हुआ. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है.

नोटिस के कारण तनाव में थे अंसारी
शुक्रवार सुबह यासीन अंसारी अपनी पत्नी हलीमा खातून और बेटे आरिफ हसन के साथ ऑटो से सुनवाई केंद्र जा रहे थे. रास्ते में सुस्तानी इलाके के पास ऑटो पलट गया. हादसे में हलीमा खातून की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बच्चे ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया. परिवार वालों का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद यासीन अंसारी काफी तनाव में थे. उनके बहनोई ने बताया कि अगर यह सुनवाई इतनी जरूरत न होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था.

हादसे के बाद भी सुनवाई में शामिल हुए यासीन
हादसे में पत्नी और बच्चे को खोने के बाद भी यासीन अंसारी को अपनी पत्नी और बच्चे के शवों को अस्पताल के मुर्दाघर में छोड़कर SIR सुनवाई में शामिल होना पड़ा. यही वजह है कि स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा है.

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