कैसा बजट-किसका बजट ?
अब तक के सबसे बड़े बजट पर सवाल ही सवाल

- सरकार की नजर में बजट यूपी को ऊंचाइयों पर ले जाने वाला दस्तावेज़
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के 9,12,696 करोड़ रुपये के पेश किये गये बजट की विपक्ष ने कटाक्ष किया है। सरकार इसे विकास का विजन बता कर पेश कर रही है तो विपक्ष का आरोप है कि बड़े बजट से कुछ नहीं होने वाला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट को प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला दस्तावेज कहा है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने बजट पर तीखा तंज कसते हुए कहा है कि सरकार ने गरीबों को बेघर कर दिया अब बजट किसके लिए बना रहे हैं?
भारी भरकम बजट
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने यूपी विधानसभा में 9,12,696 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया है जो कि अब तक का सबसे बड़ा बजट है। सरकार का दावा है कि यह बजट प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में अहम साबित होगा। सीएम योगी आदित्यनाथ का दावा है कि बजट का 12.4 फीसदी हिस्सा, 6 फीसदी चिकित्सा पर और 9 फीसदी हिस्सा कृषि से जुड़ी योजनाओं पर खर्च होगा। बजट के प्रावधान में अवस्थापना और औद्योगिक विकास का दायरा बढ़ाया गया है। गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ और हरिद्वार तक ले जाने के लिए व्यवस्था की गई है। बजट में एक्सप्रेसवे से जुड़े कई बड़े ऐलान किए गए हैं। यूपी के किसानों के उत्पाद एक्सपोर्ट हो सकें इसके लिए भी बजट में प्रावधान रखे गए हैं। विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत वेयर हाउस, गोदाम बनाने के लिए सब्सिडी दी जाएगी। बजट के जरिये सरकार का दावा है कि वह ऐसी अनेक योजनाओं पर काम कर रही है जो इस दिशा में किसानों के लिए लाभकारी होंगी।
बजट में पिछड़े जिलों को खास तवज्जो
मुख्यमंत्री योगी आदितयनाथ ने कहा कि यूपी में बेरोजगारी दर 2.24 प्रतिशत से नीचे आ गई है। यूपी में युवाओं को रोजगार मिल रहा है। यूपी में नए डेटा सेंटर बनाए जाएंगे। यूपी में अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ी है। बजट में पिछड़े जिलों को खास तवज्जो दी गई है। सीएम योगी ने कहा कि यूपी में 9 सालों में हमने कोई नया टैक्स नहीं लगाया। देश की अर्थव्यस्था में यूपी तीसरे नंबर पर है। हमने 9 लाख 12 करोड़ लाख का बजट पेश किया है। ये बजट 9 वर्ष के नवर्निमाण का बजट है।
सरकार का दावा
सरकार का दावा है कि यह बजट इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट, स्मार्ट सिटी और औद्योगिक गलियारों के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं। लेकिन विपक्ष का तर्क है कि विकास का अर्थ सिर्फ कंक्रीट और कॉरिडोर नहीं होता विकास का मतलब सिर पर छत, बच्चों के लिए स्कूल, अस्पताल में इलाज और जेब में रोजगार भी होता है। सपा के कद्दावर नेता रामगोपाल यादव ने सरकार की आर्थिक समझ और नीतियों पर व्यंग्य करते हुए कहा है कि जनता को इससे कोई खास लाभ मिलने वाला नहीं है। रामगोपाल यादव ने आगे आरोप लगाया कि राज्य सरकार पहले ही गरीबों को उनके घरों से बेघर कर चुकी है। उन्होंने कहा जब गरीबों को उनके घरों से हटा दिया गया है तो अब यह बजट किसके लिए लाया जा रहा है? सपा विधायक संग्राम सिंह ने यूपी बजट 2026 पर बयान जारी करते हुए कहा कि हम सब उम्मीद किए हैं कि बजट किसानों के हित में होगा, छात्रों और नौजवानों के हित में होगा। भाजपा ने जो वादा किया था कि स्वास्थ्य सेवाएं को विश्व स्तर पर लाएंगे वह अभी दिख नहीं रहा। बजट से जो पूर्व पूर्वानुमान आए हैं उसमें कुछ दिख नहीं रहे।
सरकार में बजट को खर्च करने की इच्छाशक्ति ही नहीं : आराधना मिश्रा
कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि सरकार तो बजट के आंकड़े प्रस्तुत करती है पर सच तो यह है कि सरकार में बजट को खर्च करने की इच्छाशक्ति ही नहीं है।
पेपरलेस विधानसभा में एक बार फिर कागज का बजट पेश : शिवपाल
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने कहा बजट पर तंज कसते हुए बयान जारी किया है कि पेपरलेस विधानसभा में एक बार फिर कागज का बजट पेश किया गया। बजट में कोई विजन नहीं है। यह सिर्फ धोखा है। उन्होंने आगे कहा कि छात्र, किसान, नौजवान और पीडि़त लोग इनसे उब चुके हैं और मन बना लिए हैं कि आगामी चुनाव में हम इन्हें हराएंगे और पीडीए की सरकार बनाएंगे।
विकास की पटकथा या चुनावी रणनीति?
अर्थशास्त्रीयों की नजर में 9.12 लाख करोड़ रुपये का आकार निश्चित रूप से प्रभावशाली है। यह पिछले वर्षों की तुलना में बड़ा है और सरकार इसे आर्थिक मजबूती का संकेत बता रही है। कैपिटल एक्सपेंडिचर में बढ़ोतरी, एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट विस्तार, औद्योगिक निवेश और शहरी विकास पर बड़ा फोकस है इन सब चीजों को इस बजट की मुख्य धुरी बतया जा रहा है। सरकार का तर्क साफ है कि इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा तो निवेश आएगा। निवेश आएगा तो उद्योग लगेंगे। उद्योग लगेंगे तो रोजगार पैदा होगा लेकिन लेकिन विपक्ष का सवाल है कि क्या यह माडल जमीन पर गरीबों और युवाओं तक पहुँचेगा? यूपी में बीते वर्षों में अवैध अतिक्रमण और अपराध के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर बड़े पैमाने पर बुलडोजर अभियान चला। सरकार इसे कानून व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक बताती है। लेकिन विपक्ष इसे गरीबों और खास समुदायों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के रूप में पेश करता है। रामगोपाल यादव का तंज इसी बिंदु पर चोट करता है। कि जिन परिवारों के घर टूटे उनके पुनर्वास का क्या? क्या बजट में शहरी गरीबों के लिए सस्ती आवास योजना का विस्तार हुआ? क्या विस्थापितों के लिए अलग पैकेज है?




