CRPF में महिलाओं के 40 साल पूरे, 25 सितंबर को ‘लेडी कमांडो’ का होगा सम्मान
CRPF का कहना है कि महिलाओं को हर भूमिका में आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं. यह पहल केंद्र सरकार की महिला सशक्तीकरण के अनुरूप है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: CRPF का कहना है कि महिलाओं को हर भूमिका में आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं. यह पहल केंद्र सरकार की महिला सशक्तीकरण के अनुरूप है.
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में महिलाओं की सेवा के 40 साल पूरे हो रहे हैं. साल 1986 में देश की पहली महिला बटालियन की शुरुआत के साथ CRPF में महिलाओं की भागीदारी का एक नया अध्याय शुरू हुआ था. चार दशकों में महिला जवानों ने देश की सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अपनी अहम भूमिका निभाई है.
छह महिला बटालियन, RAF में भी महिला टीमें
CRPF के मुताबिक, 1986 में शुरू हुआ यह सफर अब काफी आगे बढ़ चुका है. आज बल में छह पूरी तरह महिला बटालियन हैं, जिन्हें देश के अहम सुरक्षा क्षेत्रों में तैनात किया गया है. इसके अलावा, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की हर यूनिट में चार महिला टीमें शामिल हैं. ये टीमें भीड़ नियंत्रण और दंगा विरोधी अभियानों में जिम्मेदारी निभाती हैं. महिला जवान वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में भी तैनात हैं. बस्तरिया बटालियन में शामिल महिला कर्मी भी अग्रिम मोर्चे पर अपनी सेवाएं दे रही हैं.
कांस्टेबल कमलेश कुमारी को मिला अशोक चक्र
CRPF की महिला जवानों ने अपने साहस और बलिदान से देश के सुरक्षा इतिहास में खास जगह बनाई है.
कांस्टेबल कमलेश कुमारी: साल 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाली कमलेश कुमारी को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था. CRPF के मुताबिक, वह बल की एकमात्र अशोक चक्र विजेता हैं.
कांस्टेबल विमला देवी और लांस नायक राजवंती देवी: साल 1988 में श्रीलंका के एलीफेंट पास चेक पोस्ट पर अहम भूमिका निभाने के लिए विमला देवी को सेना मेडल और राजवंती देवी को सेना प्रमुख की प्रशंसा मिली.
कांस्टेबल बिंदु कुमरे: साल 2001 में श्रीनगर एयरपोर्ट पर हुए आतंकी हमले के दौरान बहादुरी के लिए उन्हें वीरता पदक से सम्मानित किया गया.
CRPF में महिला कर्मियों की चार दशक की सेवा और योगदान को सम्मान देने के लिए 25 सितंबर 2026 को सम्मानित किया जाएगा. इस दौरान CRPF के महानिदेशक और CRPF परिवार कल्याण संघ (CWA) की अध्यक्ष, सेवारत और पूर्व महिला कर्मियों को उनके योगदान और बलिदान के लिए सम्मानित करेंगे.
चार दशक का सफर, साहस और समर्पण की मिसाल
1986 में पहली महिला बटालियन की शुरुआत से लेकर आज विभिन्न सुरक्षा अभियानों में महिला जवानों की तैनाती तक, CRPF में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ी है. बल ने महिला कर्मियों के राष्ट्र के प्रति समर्पण और सेवाओं को सलाम किया है.



