BCI चुनाव: मनन मिश्रा को प्रक्रिया से दूर रखने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में मांग की है कि जब तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया ( BCI) का पुनर्गठन नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को पद और चुनावी प्रक्रिया से दूर रखा जाए.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट में मांग की है कि जब तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया ( BCI) का पुनर्गठन नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को पद और चुनावी प्रक्रिया से दूर रखा जाए.
सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के मौजूदा अध्यक्ष मनन कुनार मिश्रा को चुनाव प्रक्रिया और उनके पद से दूर रखने के लिए एक नया हलफनामा दायर की गई है. BCI के मौजूदा सदस्य एन. मनोज कुमार ने अदालत में यह मांग उठाई है. उन्होंने निवेदन किया ‘जब तक BCI का पुनर्गठन नहीं हो जाता,तब तक मौजूदा चेयरमैन को पद और चल रही चुनावी प्रक्रिया से दूर रखा जाए.’
एन. मनोज कुमार केरल बार काउंसिल का प्रतिनिधित्व करते हैं. वह 2019 और 2026 में BCI में बार काउंसिल ऑफ़ केरल का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गए. बता दें कि, मनन कुमार मिश्रा साल 2012-14 से लगातार कई कार्यकालों से BCI के अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं, जिसे लेकर बार काउंसिल के भीतर और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लगातार तेज हो गई है.
5 साल के कार्यकाल से जुड़े नोटिफिकेशन को भी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि BCI के मौजूदा अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा राज्य बार काउंसिल के चुनावों में हस्तक्षेप कर रहे हैं. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि चूंकि राज्य बार काउंसिलों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही आगे चलकर BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव करेंगे, इसलिए निष्पक्षता के लिए उन्हें इस प्रक्रिया से पूरी तरह अलग रखना जरूरी है.
इसके साथ ही उनके 5 साल के कार्यकाल (2025 से 2030) से जुड़े गजट नोटिफिकेशन को भी चुनौती दी गई है, क्योंकि BCI नियमों के तहत अध्यक्ष का कार्यकाल केवल 2 साल का होता है. कई याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया था कि मनन कुमार मिश्रा बिना अधिकार के बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) के चेयरमैन बने हुए हैं, जो कि पूरी तरह से गैर-कानूनी है.
मनन मिश्रा केवल एक कार्यवाहक अध्यक्ष हैं- SC
इससे पहले 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मनन कुमार मिश्रा को लेकर एक बड़ा आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था किमनन मिश्रा केवल एक कार्यवाहक (प्रोटेम) अध्यक्ष हैं, उन्हें BCI का स्थाई अध्यक्ष नहीं माना जा सकता. साथ ही उनके अधिकार को सीमित कर कहा था कि वह कोई नीतिगत या वित्तीय फैसला नहीं लेंगे.
साथ ही अदालत ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को BCI द्वारा लिए जाने वाले हर फैसले में भागीदारी और सहमति को अनिवार्य कर दिया. इसके अलावा, कोर्ट ने सभी राज्य बार काउंसिलों को दो हफ्ते के भीतर चुनावी प्रक्रिया पूरा करने का आदेश दिया, और कहा कि इसके बाद ही BCI के अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा.



