‘नशा नाश का कारण है’, गोरखनाथ मंदिर में क्यों जुटे संत, शिक्षक और विद्यार्थी?
गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में ‘नशा नाश का कारण है’ विषय पर संगोष्ठी हुई। वक्ताओं ने नशे के व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक प्रभाव बताए और युवाओं से दूर रहने की अपील की।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क: गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में नशे के खिलाफ जागरूकता को लेकर संगोष्ठी आयोजित की गई। महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में चल रही साप्ताहिक संगोष्ठी के क्रम में शुक्रवार को ‘नशा नाश का कारण है’ विषय पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में युवाओं और विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने की अपील की गई।
नशे का असर व्यक्ति से परिवार तक
स्वामी विवेकानंद केंद्र उत्तर प्रदेश के प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख प्रो. विनोद सोलंकी ने कहा कि मन पर नियंत्रण ही वास्तविक आत्मनियंत्रण है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक साहित्य और बोध कथाओं से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन को बेहतर दिशा देने के लिए वाणी, विचार और स्वभाव पर नियंत्रण जरूरी है।
कटक से आए महंत शिवनाथ जी महाराज ने नशे के व्यक्तिगत दुष्प्रभावों पर बात रखी। वहीं डीडीयू के पूर्व आचार्य प्रो. शिवशरण दास ने कहा कि नशा शारीरिक क्षमता और सोचने-समझने की शक्ति को प्रभावित कर सकता है तथा व्यक्ति को परिवार और समाज से दूर कर सकता है।
कुसंगति और दबाव से बचने की सलाह
आगरा के महंत ब्रह्मचारी लालदास जी महाराज ने कहा कि नशे का शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने नशे की समस्या से जूझ रहे परिवार के सदस्य के साथ दबाव के बजाय सहानुभूति और समझदारी से पेश आने की बात कही।
राजस्थान के महंत डॉ. योगी महेंद्रनाथ जी महाराज ने संगति के प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से कुसंगति से बचने और अपनी दिनचर्या को संतुलित रखने का आह्वान किया।
विशेषज्ञ बोले- उपचार और काउंसलिंग से मिल सकती है मदद
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अंबेडकरनगर के सीनियर रेजिडेंट डॉ. पृथ्वीनाथ सिंह ने कहा कि नशे की लत को केवल सामाजिक बुराई मानने के बजाय एक स्वास्थ्य समस्या के रूप में भी समझना चाहिए। उनके अनुसार, नशे के सेवन से मस्तिष्क में रासायनिक बदलाव हो सकते हैं और लंबे समय में सोचने तथा निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि उचित उपचार और काउंसलिंग से नशे से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है। तनाव या अवसाद की स्थिति में परिजनों या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने की जरूरत है। कार्यक्रम की अध्यक्षता गोरक्षपीठ के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने की।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर
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