मध्य प्रदेश में GDS भर्ती पर सवाल, फर्जी मार्कशीट मामले में 8 पर FIR
CBI ने फर्जी मार्कशीट के सहारे सरकारी नौकरी पाने वाले जालसाजों पर शिकंजा कसा है. जबलपुर में ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में फर्जी 10वीं अंकसूची लगाकर नौकरी लेने वाले 8 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: CBI ने फर्जी मार्कशीट के सहारे सरकारी नौकरी पाने वाले जालसाजों पर शिकंजा कसा है. जबलपुर में ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में फर्जी 10वीं अंकसूची लगाकर नौकरी लेने वाले 8 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है.
फर्जी मार्कशीट के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले जालसाजों के खिलाफ CBI ने बड़ा शिकंजा कसा है. जबलपुर में ग्रामीण डाक सेवक यानी GDS भर्ती में फर्जी 10वीं की अंकसूची लगाकर नौकरी पाने वाले 8 आरोपियों के खिलाफ CBI ने FIR दर्ज की है. जांच एजेंसी ने मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में आरोपियों से जुड़े 8 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी कर फर्जीवाड़े से जुड़े कई बेहद संवेदनशील दस्तावेज और महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए हैं. इसके साथ ही CBI को इस पूरे खेल में 30 से ज्यादा संदिग्ध नियुक्तियों की जानकारी मिली है और विभागीय एवं शैक्षणिक तंत्र से जुड़े संभावित भ्रष्ट लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है.
दरअसल यह पूरा मामला जबलपुर का है. CBI की FIR के मुताबिक 18 सितंबर 2026 को जबलपुर सब डिवीजन एक के सहायक डाक अधीक्षक लवकुश परते ने CBI में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया कि जनवरी 2023 और जुलाई 2024 के GDS भर्ती चक्र के दौरान इन 8 उम्मीदवारों ने डाक विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर अपनी 10वीं कक्षा की फर्जी मार्कशीट अपलोड की थी.
बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाए नंबर
आरोपियों ने इन फर्जी प्रमाण-पत्रों में अपने नंबर बेहद बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाए थे. चूंकि GDS पद पर चयन 10वीं के अंकों की मेरिट के आधार पर होता है, इसलिए ज्यादा नंबरों के दम पर इन्होंने आसानी से नौकरी हासिल कर ली. शुरुआती स्व-सत्यापित दस्तावेज जमा करने के बाद इन्हें अस्थाई नियुक्तियां भी दे दी गईं और इन्होंने वेतन एवं भत्ते उठाना भी शुरू कर दिया.
8 उम्मीदवारों की सेवाएं समाप्त
विभाग ने जब इन उम्मीदवारों द्वारा जमा की गई मार्कशीट का संबंधित शैक्षणिक बोर्ड और सक्षम प्राधिकारियों से री-वेरिफिकेशन करवाया, तो होश उड़ाने वाला सच सामने आया. बोर्ड की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जमा किए गए प्रमाण-पत्र या तो पूरी तरह फर्जी थे या फिर संबंधित बोर्ड द्वारा जारी ही नहीं किए गए थे. फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही डाक विभाग ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए सभी 8 उम्मीदवारों जिसमेमानवेंद्रसिंह सिकरवार, बद्री प्रसाद यादव, देवेंद्र सिंह चौहान, राजाबाबू अहिरवार, रमाकांत शर्मा, प्रदीप खरे, सौरभ शर्मा, नयन कुमार की सेवाएं समाप्त कर दीं.
मानवेंद्र सिंह सिकरवार
मानवेंद्रसिंह सिकरवार (निवासी वनखंडी रोड, गोपालपुरा, मुरैना) को भर्ती चक्र Sch-July-2024 के तहत ABPM, सलैया BO (कुंडम SO) के पद पर नियुक्त किया गया था. उन्होंने 05.11.2024 से 18.07.2025 तक सेवा दी. सत्यापन के दौरान बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, पटना से जारी उनकी कक्षा 10वीं की अंकसूची फर्जी पाई गई.
बद्री प्रसाद यादव
बद्री प्रसाद यादव (निवासी: बेरवार, टीकमगढ़) की नियुक्ति Cycle-5 January-23 चक्र के अंतर्गत BPM, संसारपुर BO (निवाड़ SO) के पद पर हुई थी. उन्होंने 19.05.2023 से 22.12.2023 तक कार्य किया. जांच में मध्य प्रदेश राज्य ओपन स्कूल से प्रस्तुत उनका अंकपत्र फर्जी पाया गया.
देवेंद्रसिंह चौहान
देवेंद्र सिंह चौहान (निवासी गंधर्वपुरी, देवास) भर्ती चक्र Sch-July-2024 के तहत ABPM, झिन्न पिपरिया (उमरिया पान SO) में पदस्थ थे. इनकी सेवा अवधि 30.10.2024 से 18.07.2025 तक रही. इन्होंने जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन स्कूल की फर्जी अंकसूची प्रस्तुत की थी.
राजाबाबू अहिरवार
राजाबाबू अहिरवार (निवासी सुरखी, सागर) की नियुक्ति Sch-July-2024 चक्र में डाक सेवक, पाटन SO के पद पर हुई थी. इन्होंने 06.11.2024 से 23.07.2025 तक सेवा प्रदान की. सत्यापन में इनका भी जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन स्कूल का शैक्षणिक प्रमाण-पत्र फर्जी पाया गया.
रमाकांत शर्मा
रमाकांत शर्मा (निवासी वनखंडी रोड, त्रिवेणी धर्मशाला के पास, मुरैना) Sch-July-2024 भर्ती चक्र के तहत BPM, मोहतारा BO (बकल SO) में कार्यरत थे. 19.11.2024 से 17.07.2025 तक सेवारत रहने वाले इस अभ्यर्थी की बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, पटना की अंकसूची फर्जी पाई गई.
प्रदीप खरे
प्रदीप खरे (निवासी काजीबसाई, कुटबार, थाना माता बसैया मुरैना) को Sch-JULY-2024 चक्र के अंतर्गत ABPM, उमरिया कुडारी BO (बरैला SO) के पद पर नियुक्त किया गया था. इनकी सेवा अवधि 07.11.2024 से 18.07.2025 रही। इन्होंने भी बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, पटना का फर्जी अंकपत्र जमा किया था.
सौरभ शर्मा
सौरभ शर्मा (निवासी बिलगाँव, जौरा, मुरैना) भर्ती चक्र Sch-JULY-2024 में ABPM, सकरा BO (पाटन SO) के पद पर कार्यरत थे. इन्होंने 19.11.2024 से 24.07.2025 तक सेवा दी. जांच के दौरान बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, पटना से जारी इनका 10वीं का प्रमाण-पत्र असत्य पाया गया.
नयन कुमार
नयन कुमार (निवासी तरवार, सिवान, बिहार) की नियुक्ति Cycle-5 January-2023 के तहत BPM, रामखिरिया थूथा BO (शाहपुरा SO) के पद पर 17.05.2023 को हुई थी. सत्यापन कराने पर झारखंड एकेडमिक काउंसिल, रांची से जारी इनकी अंकसूची फर्जी पाई गई.
लगातार छापेमारी कर रही CBI
CBI को आशंका है कि 10वीं की जाली मार्कशीट तैयार करने, उन्हें उपलब्ध कराने और इस्तेमाल में लाने के पीछे सिर्फ ये 8 उम्मीदवार ही शामिल नहीं हैं, बल्कि इसमें डाक विभाग और शैक्षणिक बोर्ड के कुछ भ्रष्ट लोक सेवकों का भी हाथ हो सकता है. इसके साथ ही CBI को करीब 30 से ज्यादा फर्जी नौकरी करने वालों की जानकारी मिली है जिसके लिए CBI की टीम लगातार छापेमारी कर रही है.
कई धारराओं में केस दर्ज
इस बड़े सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए CBI ने भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की संगीन धारा 120-बी, 420, 467, 468, 471 और बीएनएस की धारा 61 (2), 318 (4), 336 (3), 338, 340 (2), 2023 और पीसी एक्ट 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है और केस की विस्तृत जांच CBI ACB जबलपुर के पुलिस निरीक्षक आकाश पांडे को सौंपी गई है. CBI अब इस बात का पता लगा रही है कि इस नेटवर्क के तार कहां-कहां जुड़े हैं और फर्जी अंकसूची बनाने वाले इस गिरोह का मास्टरमाइंड कौन है.



