अवैध निर्माण को लेकर हाई कोर्ट सख्त, वॉल सिटी के UNESCO दर्जे पर मांगी रिपोर्ट
HC ने जयपुर की चारदीवारी (वॉल सिटी) का यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट दर्जा खतरे में पड़ने पर गंभीर चिंता जताई है. अवैध निर्माण, अतिक्रमण और हेरिटेज नियमों के उल्लंघन के कारण ये खतरा पैदा हुआ है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: HC ने जयपुर की चारदीवारी (वॉल सिटी) का यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट दर्जा खतरे में पड़ने पर गंभीर चिंता जताई है. अवैध निर्माण, अतिक्रमण और हेरिटेज नियमों के उल्लंघन के कारण ये खतरा पैदा हुआ है.
राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर की चारदीवारी (वॉल सिटी) का यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा खतरे में पड़ने पर गंभीर चिंता जताई है. जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने के निर्देश दिए है.
हाई कोर्ट ने कहा कि दुनिया में अब तक 4 वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स से उनका दर्जा छीना जा चुका है. ऐसे में अगर हम समय रहते नहीं चेते तो 5वीं साइट जयपुर हो सकती है. कोर्ट ने कहा कि यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी ने साल 2025 में चारदीवारी में ऐतिहासिक इमारतों को गिराए जाने और हेरिटेज संरक्षण के नियमों के कमजोर क्रियान्वयन पर चिंता जताई थी.
2023 में यूनेस्को ने चेताया था
कोर्ट ने कहा इससे पहले 2023 में भी यूनेस्को इस बारे में चेता चुका है, लेकिन उसके बाद भी सरकार ने प्रभावी कदम नहीं उठाए गए. ऐसे में दिसंबर 2026 से पहले हम नहीं चेते तो जयपुर से यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा छिन सकता है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वॉल सिटी के कोर और बफर जोन में अवैध निर्माण, अनाधिकृत बदलाव और बड़ी संख्या में अतिक्रमण होने से गंभीर खतरा पैदा हो गया है.
दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के लिए बनाए गए हेरिटेज कंर्जेवेशन एंड प्रोटेक्शन रेगुलेशन-2020 के नियमों का पालन किए बिना इमारतों में बदलाव किए गए और उन्हें गिराया गया. कोर्ट ने वॉलसिटी में हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण का सर्वे करवाकर दो सप्ताह में जेडीए और नगर निगम को रिपोर्ट देने के लिए कहा है.
इसके साथ ही कोर्ट ने मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, यूडीएच, निदेशक, स्वायत्त शासन विभाग, निदेशक, पुरातत्व विभाग, एसीएस पर्यटन विभाग, देवस्थान विभाग के सचिव सहित अन्य अधिकारियों से 4 सप्ताह में 11 बिंदुओं पर शपथ पत्र मांगा है. हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार, नगर निगम, जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और अन्य संबंधित विभागों के उच्च अधिकारियों को नोटिस जारी किया है.



