ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर बवाल, दिल्ली से मुंबई तक चक्काजाम

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद से जनता ये तो समझ चुकी है कि NDA सरकार में भी इस्तीफे होते हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: एक बार फिर देश में बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है। आजाद भारत में जनता सड़कों पर है। जिसकी वजह है सत्ताधारी और चुनाव आयोग की करतूत।

बीते कई इलेक्शन मोदी सरकार ऐसे जीती है मनो कोई अल्लादीन का जिन्न हो जिससे मोदी बोलें की चुनाव जितवा दो और वो जिन्न जो हुक्म मेरे आका करके चुनाव जितवा दे। खैर आजाद भारत और इस डिजिटल युग में जिन्न मिलना तो मुश्किल है। लेकिन मोदी-शाह के को उनका जिन्न मिल गया और वो जिन्न हैं श्री ज्ञानेश कुमार गुप्ता जी।

जिन्होंने चुनाव आयोग में रहकर SIR के नाम पर वो-वो गुल खिलाए हैं जिसकी कोई सीमा नहीं है। हालांकि गुप्ता जी के नजरिये से देखा जाए तो उन्होंने कोई ऐसा पाप नहीं किया है जिससे जनता उनसे आगबबूला हुई बैठी है वो तो बेचारे अपने आका का हुक्म ही बजा रहे थे।

वो भले ही हुक्म बजाएं लेकिन जनता जाग चुकी है सड़कों पर है। दिल्ली हो या मुंबई भयंकर प्रोटेस्ट हो रहा है। ज्ञानेश के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। लेकिन ये कायर भाजपा सरकार हमेशा की तरह पुलिस को आगे करके खुद सत्ता के पल्लू में छुपना चाह रही है।

तभी तो राजधानी दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। और सरकार पीछे हटकर ज्ञानेश की कुर्सी बचाने में लगी हुई है। जो की लगभग नामुमकिन सा लग रहा है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद से जनता ये तो समझ चुकी है कि NDA सरकार में भी इस्तीफे होते हैं।

दिल्ली पुलिस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत कई दलों और संगठनों के 700 से अधिक नेताओं को हिरासत में लिया है। सौरभ भारद्वाज ने लोगों से अपील की है कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचें और उनके इस्तीफे की मांग करें।

वहीं दिल्ली पुलिस ने आज जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए बैरिकेड्स लगा दिए हैं और जंतर-मंतर रोड को ट्रैफिक के लिए बंद कर दिया है। इसके साथ ही जंतर-मंतर पर बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी गई है। ‘आप’ सहित तमाम विपक्षी दल वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत वोटर्स के नाम हटाए जाने और अन्य मुद्दों को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

वहीं इसी बीच पुलिस ने नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया है. जिसके बाद उन्होंने कहा, ‘आपने जो देश के साथ किया है, देश आपको कभी माफ नहीं करेगा.

कांग्रेस पार्टी वोट चोरी के मामले पर हमेशा से मुखर आती रही है। राहुल गांधी अक्सर इस मामले पर सत्ताधारी दल और चुनाव आयोग को घरते रहे हैं।

इसी बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने ट्विटर पर एक ट्वीट के माध्यम से बड़ा आरोप लगाया और लिखा कि- 26 सितंबर 2026 को भारतीय निर्वाचन आयोग ने डैमेज कंट्रोल के उद्देश्य से एक प्रेस नोट जारी किया था-जो असल में डैमेज को और बढ़ाने वाला साबित हुआ।

इसमें निर्वाचन आयोग ने यह प्रमाणित करने के लिए एक समिति बनाने का वादा किया था कि कानूनी तौर पर संदिग्ध ECINet “कानूनों और नियमों के प्रावधानों का पालन करता है।” जबकि हकीकत यह है कि अगर CEC ज्ञानेश कुमार की नीयत ईमानदार होती-जो कि नहीं थी-तो इस बात पर शुरुआत से ही कोई संदेह होना ही नहीं चाहिए था।

ECINet को 22 जनवरी 2026 को बड़े जोर-शोर से लॉन्च किया गया था, ताकि “पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जनविश्वास” को बढ़ावा मिले। उस दिन ECI ने अपने प्रेस नोट में देश को भरोसा दिलाया था कि इसे “कानून के पूर्ण अनुपालन में विकसित किया गया है” और यह भारत के संविधान, Representation of the People Acts, 1950 और 1951 तथा Registration of Electors Rules, 1960 के पूरी तरह अनुरूप है। यह सब झूठ था।

इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) की ECINet मतदाता सूची सिस्टम तक पहुंच सीमित करके और गोवा, पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों में EROs के फैसलों को पलटकर, CEC के नियंत्रण वाले ECI ने Representation of the People Act, 1950 और Registration of Electors Rules, 1960 का उल्लंघन किया है।

ये दोनों कानून स्थापित करते हैं कि मतदाता सूची पर वैधानिक अधिकार ERO का है। पिछले सप्ताह हुए खुलासों के बाद महाराष्ट्र के CEO ने 24 सितंबर 2026 को ECI को पत्र लिखकर इस गैरकानूनी स्थिति को ठीक करने की मांग की। आज से INDIA जनबंधन, नागरिक और कई सिविल सोसाइटी संगठन कानून और संविधान के इन उल्लंघनों के लिए जवाबदेही की मांग को लेकर देशभर में सड़कों पर उतरेंगे।

वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान CJP के पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को यहां-वहां जाने से रोका जा रहा है. उन्होंने कहा कि कोई भी प्रदर्शन नहीं करना चाहता, लेकिन जब गलतियां होती हैं और उनके खिलाफ आवाज उठानी पड़ती है. इसलिए प्रदर्शन करना जरूरी हो जाता है. देश में कहीं भी प्रदर्शन करना वोट देने के अधिकार से जुड़ा मामला है.

सीजेपी नेता सौरव दास ने मुंबई में होने वाले प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘आज शाम 4 बजे आप सभी से मिलता हूं. ज्ञानेश (कुमार) इट्स डन ब्रो! वहीं इसी बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने भी मुंबई में होने वाले प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘ज्ञानेश तो जायेगा, मोदी-शाह भी जायेंगे!’

यह बड़ा समर्थन माना जा रहा है। लेकिन इन सबके बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अलग ही राग अलाप रहे हैं। मुंबई में CJP के प्रदर्शन को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पूरा मामला सामने आ चुका है. तीनों चुनाव आयुक्तों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद फैलाया जा रहा नैरेटिव बेनकाब हो गया है.

सरकारें कितना भी ज्ञानेश को बचा लें लेकिन उनका इस्तीफा तो तय है। उन्होंने भाजपा और मोदी मोह में आकर जो इतना बड़ा कांड किया है इसके बाद उनका बच पाना लगभग नामुकिन सा है। वो दिन दूर नहीं है जब ज्ञानेश कुमार खुद भाजपा के गले की फांस बन जाएंगे। जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देना ही होगा।

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