गोमती-गंगा के उफान से हरदोई बेहाल, घरों में पानी और सड़कों पर डेरा

हरदोई जिले में गोमती और गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भरावन क्षेत्र में गोमती नदी और सराय नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: हरदोई जिले में गोमती और गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भरावन क्षेत्र में गोमती नदी और सराय नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

कई गांवों में घरों के अंदर पानी पहुंच गया है, जिसके चलते बड़ी संख्या में ग्रामीणों को अपने मकान छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है। तुलसीपुर गांव के 86 परिवारों ने अतरौली-भटपुर मार्ग के किनारे तिरपाल डालकर अस्थायी डेरा बना लिया है। वहीं, बिलग्राम क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से कटरी क्षेत्र के कई गांवों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

30 गांवों में पहुंचा बाढ़ का पानी

भरावन क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। तुलसीपुर, कूड़ा, कटका, रामपुर, लक्ष्मणपुरवा, धनापुरवा, रसुलवा, देवरी, कटकी, ईश्वरीपुरवा और छोटा कटका समेत करीब 30 गांवों के अंदर बाढ़ का पानी पहुंच गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण गांवों में हालात बेहद खराब हैं। कई स्थानों पर सड़कें और संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। घरों में पानी घुसने के बाद ग्रामीणों के सामने रहने और जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

86 परिवारों ने सड़क किनारे बनाया अस्थायी बसेरा

तुलसीपुर गांव में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंचने के बाद 86 परिवारों ने अपने मकान छोड़ दिए हैं। इन परिवारों ने अतरौली-भटपुर मार्ग के किनारे तिरपाल डालकर अस्थायी रूप से रहना शुरू कर दिया है। ग्रामीण शिवराज, रोहतम, भल्लर, पुतान, रामकिशोर, सुखराम और माधव समेत कई लोग अपना जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे हैं। ग्रामीण अपने पालतू मवेशियों को भी साथ लेकर आए हैं, ताकि बाढ़ के पानी से उन्हें सुरक्षित रखा जा सके। ग्राम समाज की जमीन पर करीब 49 झोपड़ियां डालकर प्रभावित परिवारों ने अस्थायी बसेरा तैयार किया है। खुले में रहने के कारण इन परिवारों के सामने भोजन, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं की समस्या भी बनी हुई है।

भटपुर में 40 से अधिक कच्चे मकान क्षतिग्रस्त

बाढ़ के पानी ने ग्रामीणों के मकानों को भी नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। भटपुर गांव में 40 से अधिक कच्चे मकान क्षतिग्रस्त होने की ग्रामीणों ने पुष्टि की है। लगातार पानी भरे रहने से कच्चे मकानों के गिरने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में जल्द कमी नहीं आई तो स्थिति और खराब हो सकती है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में निगरानी की जा रही है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

25 हजार बीघा फसलें पानी में डूबीं

बाढ़ का असर खेती पर भी पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में धान, उड़द और गन्ने की करीब 25 हजार बीघा फसल पानी में डूब गई है। इससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। कई खेत पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। खेतों में खड़ी फसल लंबे समय तक पानी में डूबी रहने से खराब होने की आशंका है। किसानों के सामने अब फसल बचाने के साथ-साथ आगे की खेती और आर्थिक नुकसान की चिंता भी खड़ी हो गई है।

स्कूलों में भरा पानी, शिक्षण कार्य बंद

बाढ़ का पानी कटका, भटपुर और कूड़ा के प्राथमिक विद्यालयों तक पहुंच गया है। स्कूल परिसर और भवनों में पानी भरने के कारण इन विद्यालयों को बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों में शिक्षण कार्य रोकना जरूरी हो गया है। बाढ़ की स्थिति सामान्य होने के बाद ही स्कूलों को दोबारा संचालित किए जाने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य केंद्र और पंचायत भवन भी जलमग्न

बाढ़ का पानी केवल घरों और स्कूलों तक सीमित नहीं है। भटपुर में पीएचसी, पंचायत भवन, होम्योपैथिक अस्पताल, एएनएम सेंटर और सामुदायिक शौचालय में भी पानी भर गया है। स्वास्थ्य केंद्रों में पानी भरने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने में परेशानी हो सकती है। वहीं, अस्थायी पशु आश्रयस्थल में भी पानी पहुंच गया है। प्रशासन और संबंधित विभाग ने मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट कराया है।

मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया

बाढ़ प्रभावित गांवों में इंसानों के साथ मवेशियों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। विभाग की ओर से कई मवेशियों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया गया है। ग्रामीण भी अपने पशुओं को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से जरूरत के अनुसार नाव की व्यवस्था भी की गई है, ताकि बाढ़ से घिरे इलाकों में लोगों तक पहुंच बनाई जा सके और आवश्यक सामान पहुंचाया जा सके।

बिलग्राम में गंगा का जलस्तर बढ़ा, कटरी क्षेत्र के गांव प्रभावित

उधर, बिलग्राम क्षेत्र में भी गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। राजघाट के आसपास के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। जरसेनामऊ से लेकर मेहंदी घाट तक गंगा के दोनों ओर पानी लबालब भरा हुआ है। कटरी जरसेनामऊ, कटरी बिलुही, कटरी छिबरामऊ, कटरी बिछुईया, कटरी परसोला, तेरवा कुल्ली और कटरी महादेवा समेत कई गांवों और उनके मजरा-पुरवों में पानी भर गया है। जरेला, पुन्नापुरवा, मदारी पुरवा, बाण और करेहका क्षेत्र में भी बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा का जनजीवन मुश्किल हो गया है।

नाव बनी आवागमन का एकमात्र सहारा

बाढ़ के कारण कई संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। ऐसे में प्रभावित ग्रामीणों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए नाव ही प्रमुख साधन रह गई है। ग्रामीण जरूरी काम और सामान के लिए नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं। जलस्तर बढ़ने के कारण प्रशासन की ओर से भी प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।

11 स्कूल बंद, 13 गांवों में बिजली आपूर्ति ठप

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बिलग्राम क्षेत्र में 11 स्कूलों को बंद कर दिया गया है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विद्यालयों में शिक्षण कार्य रोक दिया गया है। वहीं, बाढ़ प्रभावित 13 गांवों में बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। जलभराव वाले क्षेत्रों में किसी तरह की विद्युत दुर्घटना की आशंका को देखते हुए बिजली आपूर्ति रोकने का निर्णय लिया गया है।

अधिकारियों ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण

बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए एसडीएम एन राम और तहसीलदार दीपक गौतम ने प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली और मौके पर राहत एवं बचाव व्यवस्था का निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार राहत व्यवस्था बढ़ाई जाएगी।

ग्रामीणों के सामने बढ़ती मुश्किलें

लगातार बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घरों में पानी भरने से कई परिवारों को खुले में या सड़क किनारे अस्थायी ठिकानों में रहना पड़ रहा है। दूसरी ओर खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलें बर्बाद होने की आशंका है। बाढ़ के कारण स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पंचायत भवन और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं प्रभावित होने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। प्रशासन के सामने फिलहाल प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, भोजन-पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ मवेशियों को सुरक्षित रखने की चुनौती है।

प्रशासन की नजर स्थिति पर

गोमती और गंगा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के बीच प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। नावों की व्यवस्था और मवेशियों को ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल ग्रामीणों की नजर नदी के जलस्तर पर टिकी है। यदि जलस्तर में कमी आती है तो प्रभावित इलाकों में राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन पानी बढ़ने की स्थिति में प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य और तेज करने पड़ सकते हैं।

रिपोर्ट :-शुभम, हरदोई

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