मानसिक स्वास्थ्य की भागदौड़ भरी जिंदगी में देखभाल जरूरी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
आज की जिंदगी में तनाव से पूरी तरह बचना मुश्किल है। नौकरी का दबाव, कारोबार की चिंता, पढ़ाई, परिवार की जिम्मेदारियां, आर्थिक समस्याएं, रिश्तों में तनाव और लगातार बदलती परिस्थितियां किसी भी व्यक्ति पर मानसिक दबाव डाल सकती हैं। कुछ समय के लिए तनाव शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया हो सकता है। समस्या तब पैदा होती है जब तनाव लंबे समय तक बना रहे और व्यक्ति की नींद, काम, रिश्तों या रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करने लगे। मानसिक स्वास्थ्य का मतलब केवल मानसिक बीमारी का न होना नहीं है। डब्ल्लूएचओ के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति की भावनात्मक और सामाजिक क्षमता तथा रोजमर्रा की जिंदगी की चुनौतियों से निपटने की क्षमता से भी जुड़ा है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को शरीर के स्वास्थ्य से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
तनाव के संकेत पहचानें
लगातार चिंता, चिड़चिड़ापन, नींद में बदलाव, ध्यान लगाने में परेशानी, थकान, सामाजिक गतिविधियों से दूरी या काम में रुचि कम होना कुछ लोगों में तनाव या अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के संकेत हो सकते हैं। हालांकि इन लक्षणों के कई कारण हो सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक बने रहने वाली समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
व्यायाम आवश्यक
शारीरिक गतिविधि सिर्फ शरीर के लिए नहीं, मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी हो सकती है। पैदल चलना, योग, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम तनाव को संभालने में मदद कर सकता है। इसलिए व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे शुरुआत करनी चाहिए।
नींद जरूरी
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद महत्वपूर्ण है। अनियमित सोने का समय और रात में लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। सोने और जागने का समय नियमित रखना, सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और शांत वातावरण बनाना मददगार हो सकता है।
मदद मांगना कमजोरी नहीं
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में आज भी कई गलत धारणाएं हैं। कई लोग मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करने में इसलिए हिचकते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि लोग उन्हें कमजोर समझेंगे। यह सोच बदलने की जरूरत है। जिस तरह लगातार सीने में दर्द होने पर डॉक्टर से मिलना सामान्य है, उसी तरह लगातार मानसिक परेशानी होने पर विशेषज्ञ से मिलना भी स्वास्थ्य देखभाल का सामान्य हिस्सा है।
मिथक बनाम तथ्य
तनाव सिर्फ कमजोर लोगों को होता है। लेकिन तनाव जीवन की परिस्थितियों के प्रति सामान्य मानवीय प्रतिक्रिया हो सकता है। मानसिक परेशानी सिर्फ सोच बदलने से ठीक हो जाती है। लेकिन कुछ स्थितियों में पेशेवर सहायता, परामर्श या उपचार की जरूरत हो सकती है।
काम और आराम के बीच संतुलन
लगातार काम करना उत्पादकता की गारंटी नहीं है। दिन में छोटे ब्रेक लेना, पर्याप्त नींद लेना, परिवार के साथ समय बिताना और अपनी रुचियों के लिए समय निकालना मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। कारोबार और नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच स्वयं के लिए समय निकालना भी स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा है।
किसी से बात करना जरूरी
तनाव में व्यक्ति कई बार खुद को सबसे अलग कर लेता है। परिवार, मित्र या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत करना भावनात्मक समर्थन दे सकता है। हालांकि गंभीर या लगातार मानसिक परेशानी में केवल बातचीत पर्याप्त नहीं हो सकती। ऐसी स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।



