जेल से छूटते ही पुलिस का नोटिस! CJP नेताओं पर सख्ती से घिरी मोदी सरकार

सत्ता का सुख भोग रहे भाजपाई आज इस कदर अपना जमीर बेंच चुके हैं जिसकी कोई सीमा नहीं है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बीजेपी राज में जो हो जाए वही कम है। यहां चोरी चकारी करने वालों के लिए कालीन बिछाई जाती है लेकिन जो लोग उसी चोर की चोरी को लेकर सजा की मांग करें उन्हें जेल में डाल दिया जाता है।

धमकाया जाता है यहां तक की पुलिस को आगे करके उनके साथ बर्बरता की जाती है। जी हाँ दोस्तों बिलकुल सही सुना आपने, ये सुनकर आप समझ ही गए होंगे की हम किस मुद्दे पर बात कर रहे है। सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में आज आलम ये है कि लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उनके उनका सबसे बड़ा हक़ यानी की वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है।

वोटों की खुलेआम चोरी हो रही है। लेकिन सवाल ये बनता है कि ये सब आखिर किसके इशारो पर हो रहा है तो इसका जवाब है भाजपा के इशारों पर। सत्ता का सुख भोग रहे भाजपाई आज इस कदर अपना जमीर बेंच चुके हैं जिसकी कोई सीमा नहीं है।

अपनी कुर्सी पर बात न आए इसके लिए केंद्र में बैठी मोदी सरकार पूरी तरह से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रही है , ज्ञानेश के इस्तीफे की मांग करने वालों को जेल में भर रही है। और जेल से रिहाई के बावजूद पुलिस उन्हें नोटिस पर नोटिस थमा रही है.

दरअसल सीजेपी नेता आशुतोष रांका को बुधवार को एसईएम कोर्ट ने जमानत पर छोड़ दिया है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीजेपी नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को जांच में शामिल होने के लिए तलब किया है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को क्राइम ब्रांच ने नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया।

वहीं, अजिंक्य शिंदे को भी समन भेजा गया है। यह जांच सरकारी आदेश का कथित उल्लंघन करने और जंतर-मंतर पहुंचने के दौरान दूसरे व्यक्ति की संपत्ति में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश करने से जुड़ी है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 188 के बजाय लागू कानून के तहत कार्रवाई की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी बाकी है।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को बीते रोज न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया गया। दोनों नेताओं से लिखित में माफीनामा और शपथ पत्र लेने के बाद जमानत पर छोड़ा गया है।

उन्होंने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष लिखित में आश्वासन दिया कि वे जंतर-मंतर स्थल को कानून के अनुसार गैर-अधिसूचित किए जाने तक शांति बनाए रखेंगे और वहां विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे। अभिजीत दिपके ने सीजेपी नेताओं सौरव और आशुतोष रांका की रिहाई पर एक्स पर एक पोस्ट किया था। उन्होंने दोनों को खुद से बहुत बड़ा नेता बताया। इसके आलावा अभिजीत दीपके ने सौरव और आशुतोष का एक वीडियो शेयर किया था.

जिसमें दोनों ने तिरंगा हाथ में पड़ा हुआ है और भारत माता की जय और सौरव दास इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं. आखिरी में दोनों ने कहा, ज्ञानू मस्ट गो. इसके साथ ही तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद आशुतोष रांका ने पहला पोस्ट शेयर किया है. उन्होंने हाथ में तिरंगा लिए हुए फोटो शेयर की है. फोटो में आशुतोष के साथ सौरव दास भी खड़े हुए हैं. उन्होंने फोटो शेयर करते हुए लिखा, भारत माता की जय.

इसके आलावा तिहाड़ से बाहर आने के बाद सौरव दास ने देर रात पहला पोस्ट शेयर किया था. उन्होंने लिखा था, ”ज्ञानू को जाना ही होगा.” सौरव और आशुतोष जंतर-मंतर पर गेट लांघकर गए थे और तिरंगा लहराया था. अब जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने तिरंगा हाथ में लिए फोटो शेयर की है.

सौरव और आशुतोष को बेल बॉन्ड तोड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. वहीं इस मामले को लेकर एक्टर प्रकाश राज की भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। .प्रकाश राज ने वीडियो जारी कर सीजेपी नेताओं की जमानत के लिए पीस बॉन्ड साइन कराए जाने की न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।

प्रकाश राज ने कहा कि ये उन पर दोबारा विरोध प्रदर्शन न करने के लिए डाला जाने वाला दबाव है, लेकिन भारत के युवा सब देख रहे हैं। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को रद्द करने तक देश की जनता अब चुप नहीं बैठेगी। आने वाले दिनों में करोड़ों लोग सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। प्रकाश राज ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि सरकार जल्द से जल्द सुधर जाए। प्रदर्शनकारियों से पीस बॉन्ड साइन करवाए जा रहे हैं। सरकार जेम्स बॉन्ड है क्या? कॉकरोच जनता पार्टी के युवा जल्द एकजुट हो रहे हैं।

वहीं इसपर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया आई है. अरविंद केजरीवाल ने सौरव और आशुतोष को बधाई दी और साथ ही एक सलाह भी दी. एक्स पोस्ट में अरविंद केजरीवाल ने सौरव दास और आशुतोष रांका के लिए लिखा, “ऐसे ही देश के लिए संघर्ष करते रहें. पूरा देश आपके साथ है.”

इतना ही नहीं दोस्तों आपको बता दें कि इस पूरे मामले और CJP के प्रोटेस्ट पर न सिर्फ लोगो की प्रतिक्रिया सामने आ रही है बल्कि भाजपा के पूर्व सहयोगियों का भी साथ मिलता हुआ नजर आ रहा है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी छोड़ चुके के अन्नामलाई ने नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शखनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।

इस दौरान अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अगर उनके हाथ बंधे न होते, तो वह दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के खिलाफ जंग छेड़ देते।’ अन्नामलाई ने कहा, ‘मेरी राय में माननीय प्रधानमंत्री ने उस समय जो कहा था, वह बिल्कुल सही था और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।’

उन्होंने कहा, ‘आज आपको अनिश्चितकाल के लिए जेल भेजा जा सकता है, आपके जमानतदारों के बॉण्ड खारिज किए जा सकते हैं और हैरानी की बात यह है कि निवारक बॉण्ड से जुड़े मामलों से निपटने का अधिकार मिलने पर एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट आपको अपने इशारों पर नचा सकता है।’

अन्नामलाई ने कहा, ‘अगर आप लोकतंत्र में कानून की उचित प्रक्रिया के उल्लंघन पर सवाल उठाते हैं, तो आपको भला-बुरा कहा जाएगा और आप पर हमलों की झड़ी लग जाएगी, जिसमें आपको ‘विदेशी एजेंट’ करार देना भी शामिल होगा।’

उन्होंने कहा, ‘जब से मैंने नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए कहा है, तब से मुझ पर लगातार हमले हो रहे हैं।

लेकिन मैंने इन पर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि मुझे लगा कि तमिलनाडु में जमीनी मुद्दों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।’ अन्नामलाई ने कहा, ‘एक तरह से मुझे इसमें मजा भी आया, क्योंकि इससे मेरे ऊपर लगा ‘भाजपा की बी-टीम’ होने का ठप्पा जल्द ही हट जाएगा और यह बात भी गलत साबित हो जाएगी कि मुझे तमिलनाडु में एक ‘धुरंधर’ के तौर पर भेजा गया है।’

साथ ही अन्नामलाई ने कहा, ‘जैसा कि मैंने कल कहा था कि हो सकता है कि मैं CJP की रणनीतियों से सहमत न होऊं और मुझे लगता है कि उनकी कई रणनीतियां गलत दिशा में हैं। लेकिन अगर आप मुझसे पूछें कि क्या उन्हें किसी ऐसे मुद्दे पर विरोध करने, बहस करने या प्रदर्शन करने का अधिकार है, जिसे वे महत्वपूर्ण मानते हैं, तो मैं साफ तौर पर कहूंगा – हां।’

गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार के मामले को लेकर भाजपा सरकार और मोदी-शाह भी सवालों के घेरे में हैं। अब देखना ये होगा कि इस मामले पर अपनी सरकार बचाने के लिए मोदी मंडली किस हद्द तक गिर सकती है। खैर वहीं इस मामले पर विपक्ष और जनता का कहना है कि सरकार कितना भी ज्ञानेश को बचाकर रख ले लेकिन बिना इस्तीफे के ये मामला शांत होने वाला नहीं है।

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