टाटा विवाद में राहुल गांधी की एंट्री, कारोबार जगत पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि टाटा समूह को “आपराधिक तरीके से बर्बाद” किया जा रहा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि टाटा समूह को “आपराधिक तरीके से बर्बाद” किया जा रहा है. उन्होंने इस मामले पर बिजनेस लीडर्स यानी उद्योग जगत के दिग्गजों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए.

उन्होंने दावा किया है कि वे इन अपराधों के लिए न्याय दिलाकर रहेंगे. राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब टाटा संस के नेतृत्व को लेकर बड़ा विवाद चल रहा है. यह पहली बार है जब कांग्रेस ने टाटा समूह के भीतर चल रही इस लड़ाई पर अपनी बात रखी है. इस विवाद के चलते ट्रस्टियों के बीच पहले ही मतभेद पैदा हो चुके हैं और इसकी आंच टाटा संस के बोर्डरूम तक भी पहुंच गई है.

राहुल गांधी ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ‘टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और किसी भी बिजनेस लीडर में एक शब्द बोलने की हिम्मत नहीं है. आप कब तक चुप रहेंगे? क्या तब तक, जब तक वे आप पर पूरी तरह कब्जा न कर लें? भारतीय कारोबार मोदी और शाह के खिलौने नहीं हैं. आपमें हिम्मत की कमी है… हममें नहीं है… हम इन अपराधों के लिए न्याय दिलाकर रहेंगे.’

चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति के प्रस्ताव को चुनौती

इस हफ्ते की शुरुआत में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति के प्रस्ताव को चुनौती दी. यह प्रस्ताव देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह की होल्डिंग कंपनी की 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में पारित किया गया था. टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में 66 फीसदी हिस्सेदारी है. उसने दोबारा हुई नियुक्ति के फैसले को गैर-कानूनी बताया है क्योंकि नोएल टाटा ने इस पर वीटो (निषेधाधिकार) का इस्तेमाल किया था.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 26 अक्टूबर को टाटा संस के कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को लिखे एक पत्र में नोएल ने इस प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाया. उन्होंने तर्क दिया कि दोबारा नियुक्त का विषय बैठक से पहले जारी किए गए एजेंडे में शामिल नहीं था. उन्होंने बैठक की कार्यवाही की बिना एडिट की गई वीडियो रिकॉर्डिंग भी मांगी.

4 डायरक्टरों ने चंद्रशेखरन का समर्थन किया

वहीं, 17 सितंबर की बैठक में 4 डायरक्टरों ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का समर्थन किया था, जबकि नोएल ने इसके खिलाफ वोट दिया. टाटा ट्रस्ट्स के एक अन्य नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया.

टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि कंपनी के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ (नियमावली) के अनुसार, ऐसे फैसलों के लिए उनके नॉमिनी डायरेक्टर्स की बहुमत से मंजूरी जरूरी है. टाटा संस ने इस व्याख्या को चुनौती दी है. उन्होंने देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज बीएन श्रीकृष्ण की कानूनी राय का हवाला दिया है. दरअसल, पूर्व सीजेआई और रिटायर्ड जज इस प्रस्ताव को वैध मानते हैं.

एन चंद्रशेखरन ने अपने फैसला बदला

टाटा संस ने पहले कहा था कि जुलाई 2025 में सभी ट्रस्टों ने एकमत होकर एन चंद्रशेखरन को एक और कार्यकाल देने का समर्थन किया था. हालांकि, फरवरी 2026 में बोर्ड इस पर कोई औपचारिक फैसला नहीं ले सका क्योंकि सभी सदस्य एकमत नहीं थे.

12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने बोर्ड को बताया था कि फरवरी 2027 में उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद वह दोबारा इस पद पर बने रहने की मांग नहीं करेंगे. इसके बाद बोर्ड की नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमेटी ने उन्हें एक और कार्यकाल देने की सिफारिश की. इस सिफारिश के बाद चंद्रशेखरन ने अपने फैसले पर फिर से विचार किया, जिसके चलते 17 सितंबर को इस मुद्दे पर वोटिंग हुई.

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