गुजरात में गुंडों की भरमार, गोपाल इटालिया का भूपेंद्र सरकार पर बड़ा हमला!
आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया ने गुजरात की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है... उन्होंने सवाल उठाया कि...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया ने हाल ही में भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए.. गुजरात की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक बदले की भावना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं.. और उन्होंने साफ कहा कि भाजपा के राज में गुजरात में गुंडों.. और माफिया तत्वों की कोई कमी नहीं है.. इनकी संख्या इतनी अधिक हो गई है.. कि जरूरत पड़ने पर इन्हें विदेशों में भी भेजा जा सकता है.. ये गुंड खुलेआम घूमते हैं, अपराध करते हैं.. और फिर भी सरकार इन्हें संरक्षण देती दिखती है.. जबकि जो लोग आम जनता के अधिकारों.. और हक के लिए आवाज उठाते हैं.. उन्हें जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया जाता है..
आपको बता दें कि गोपाल इटालिया ने विशेष रूप से चैतर वसावा के मामले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा.. और उन्होंने कहा कि चैतरभाई वसावा आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे हैं.. वे जंगल की जमीन, किसानों के फसल अधिकार, मनरेगा में भ्रष्टाचार.. और आदिवासी इलाकों में विकास की उपेक्षा जैसे मुद्दों को उठाते रहे.. उनकी लोकप्रियता आदिवासी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही थी.. यही बात भाजपा को सबसे ज्यादा खटक रही थी.. चैतर वसावा की बढ़ती स्वीकार्यता को देखकर भाजपा को अपना राजनीतिक अंत नजदीक आता दिखाई देने लगा था.. इसलिए उन्होंने चैतरभाई को जेल भेजने का फैसला किया..
भाजपा सरकार ने उन गुंडों को नहीं पकड़ा जो रोजाना आम लोगों को परेशान करते हैं.. महिलाओं को डराने की कोशिश करते हैं.. या व्यवसायों से रंगदारी वसूलते हैं.. इसके बजाय एक ऐसे नेता को निशाना बनाया गया जो जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनता था.. और समाधान की मांग करता था.. चैतर वसावा ने वन विभाग के अधिकारियों.. और आदिवासी किसानों के बीच विवाद में मध्यस्थता की थी.. फसल काटने के विवाद में उन्होंने शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता निकाला था.. लेकिन सरकार ने इसे अपराध बताकर मुकदमा बना दिया.. सात साल की सजा सुनाई गई.. यह सजा राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित लगती है..
आपको बता दें कि गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि गुजरात में भाजपा सरकार के दौरान अपराध के आंकड़े भले ही छुपाए जाते हों.. लेकिन आम नागरिक रोजाना महसूस करते हैं.. कि कानून सिर्फ कमजोर लोगों पर लागू होता है.. शक्तिशाली और सत्ता से जुड़े लोगों के लिए नियम अलग हैं.. गुंडों को संरक्षण मिलता है क्योंकि वे चुनावी कामों में काम आते हैं.. जरूरत पड़ने पर इन्हें दूसरे राज्यों या यहां तक कि विदेशों में भी भेजा जा सकता है.. यह स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है.. जब सत्ता पक्ष अपने विरोधियों को जेल में डालने लगे.. और अपराधियों को खुली छूट दे दे, तब आम आदमी का विश्वास टूट जाता है..
चैतर वसावा की लोकप्रियता का कारण उनकी सादगी और संघर्ष है.. वे आदिवासी परिवार से आते हैं और अपनी जड़ों से जुड़े रहे.. उन्होंने डेडियापाड़ा जैसे क्षेत्र में लोगों की आवाज को विधानसभा तक पहुंचाया.. जमीन के मुद्दे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की मांग को उन्होंने मजबूती से उठाया.. भाजपा को यह स्वीकार नहीं था कि कोई युवा आदिवासी नेता उनकी पारंपरिक जड़ों को हिला रहा है.. इसलिए झूठे और फर्जी मामलों में फंसाकर उन्हें जेल भेजने की साजिश रची गई.. गोपाल इटालिया ने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ चैतर वसावा का मामला नहीं है.. यह पूरे आदिवासी समुदाय की आवाज को दबाने की कोशिश है..



