IDBI बैंक के निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी भूख हड़ताल, 20 हजार से ज्यादा कर्मचारी आंदोलन में शामिल

IDBI बैंक के निजीकरण के विरोध में देशभर में कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है... निजीकरण के फैसले के खिलाफ देशव्यापी... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः IDBI बैंक के प्रस्तावित निजीकरण और बैंक को कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने के फैसले के विरोध में बैंक अधिकारियों.. और कर्मचारियों ने दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी भूख हड़ताल का आयोजन किया है.. बता दें कि 2 और 3 नवंबर 2026 को देशभर की शाखाओं.. और कार्यालयों में यह आंदोलन चल रहा है.. यूनाइटेड फोरम ऑफ IDBI ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज के आह्वान पर 20 हजार से अधिक कर्मचारी इसमें शामिल हो रहे हैं.. बैंक का नियंत्रण विदेशी निजी कंपनी को सौंपने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कर्मचारी निजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग कर रहे हैं.. वे कहते हैं कि यह सिर्फ नौकरियों का मुद्दा नहीं.. बल्कि राष्ट्रीय संपत्ति और जमाकर्ताओं के हितों का सवाल है..

आपको बता दें कर्मचारियों के अनुसार IDBI बैंक एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति है.. पिछले कई वर्षों में हजारों कर्मचारियों ने इसके विकास में अपना योगदान दिया है.. बैंक को कुछ साल पहले भारी घाटे और ऊंचे एनपीए का सामना करना पड़ा था.. सरकारी और एलआईसी के पूंजी निवेश तथा कर्मचारियों की मेहनत से बैंक फिर से मजबूत हुआ.. पिछले वर्षों में बैंक ने हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया.. और एनपीए अनुपात में भारी कमी आई.. ऐसे में एक लाभदायक बैंक को विदेशी कंपनी को बेचना कर्मचारियों को अनुचित लगता है.. वे निजीकरण को ग्राहकों की जमा राशि की सुरक्षा.. और देश की संपत्ति के संरक्षण से जोड़कर देख रहे हैं..

जानकारी के मुताबिक कर्मचारियों की मुख्य मांगों में बैंक को बेचने और निजीकरण करने की प्रक्रिया को तुरंत रोकना शामिल है.. वे चाहते हैं कि केंद्र सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत बनी रहे.. इसके लिए सरकार को एलआईसी या बाजार से अतिरिक्त 6 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की मांग की गई है.. 2003 में संसद में दिए गए आश्वासन का हवाला देते हुए कर्मचारी कहते हैं कि सरकारी बहुमत बनाए रखना जरूरी है.. ग्राहकों की जमा राशि के लिए सरकारी गारंटी की भी मांग है.. मौजूदा कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, भत्तों, नौकरी की शर्तों.. और आरक्षण नीति के संबंध में लिखित सुरक्षा की गारंटी भी मांगी गई है..

आपको बता दें कि आंदोलन के दौरान कर्मचारी बैंक बचाओ, नौकरियां बचाओ, राष्ट्रीय संपत्ति बचाओ के नारे लगा रहे हैं.. वे सरकार से निजीकरण के फैसले को वापस लेने की अपील कर रहे हैं.. फोरम ने चेतावनी दी है कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है.. जिसमें अनिश्चितकालीन हड़ताल भी शामिल हो सकती है.. प्रबंधन की ओर से कुछ कर्मचारियों को धमकियां मिलने की शिकायत भी सामने आई है.. जिसके सबूत यूनियन ने संबंधित अधिकारियों को दिए हैं..

कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने 14 अक्टूबर 2026 को 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी फेयरफैक्स की सहायक कंपनी को लगभग 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी थी.. इसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है.. बिक्री के बाद सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सा बचेगा.. प्रबंधन नियंत्रण विदेशी कंपनी के पास चला जाएगा.. कर्मचारी इसे राष्ट्रीय हित के खिलाफ बता रहे हैं..

 

 

Related Articles

Back to top button