महाराष्ट्र के गोकुल सहकारी चुनाव में वोट चोरी का आरोप, राहुल गांधी ने बीजेपी को घेरा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को बीजेपी पर महाराष्ट्र के कोल्हापुर में ‘गोकुल मिल्क कोऑपरेटिव’ चुनावों के जनादेश को पलटने की कोशिश करने का आरोप लगाया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को बीजेपी पर महाराष्ट्र के कोल्हापुर में ‘गोकुल मिल्क कोऑपरेटिव’ चुनावों के जनादेश को पलटने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले पैनल की ओर से बीजेपी समर्थित ‘महायुति’ गठबंधन को हराने के बाद नियम बदल दिए गए. उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव के बाद नियम बदले ताकि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बहुमत हासिल किया जा सके. उन्होंने इसे “दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी” करार दिया.
कांग्रेस सांसद ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया. तो भाजपा ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए. 4 डायरेक्टर ठूंसो, 12 को 16 बनाओ, बहुमत चुराओ. ये दूध उत्पादकों की वोट की चोरी है… जनादेश में मिलावट है. भाजपा इतनी हताश हो चुकी है कि हर जगह सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है. दूध उत्पादकों का वोट चुराने वाले याद रखें, किसान भूलता नहीं है.’
पवन खेड़ा ने क्या लगाए महाराष्ट्र सरकार पर आरोप
इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी प्रस्तावित बदलावों को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोला. ‘महाराष्ट्र सरकार, ‘गोकुल मिल्क फेडरेशन’ में दूध उत्पादकों के लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने की बेशर्म कोशिश कर रही है.
इसके लिए वह कानूनी बदलावों का सहारा लेकर, चुने हुए बोर्ड की संरचना में हेरफेर करने का प्रयास कर रही है. 19 अक्टूबर के चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतीं और ‘महायुति’ की 12 सीटों के मुकाबले बहुमत हासिल किया. जब ‘महायुति’ समर्थित डायरेक्टर ने बैठक से अनुपस्थित रहकर चेयरमैन के चुनाव को रोक दिया, तो बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 नवंबर को फिर से चुनाव कराने का निर्देश दिया.’
उन्होंने कहा, ‘चुने हुए बोर्ड को काम करने देने के बजाय राज्य कैबिनेट ने चार सरकारी डायरेक्टरों को नामित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिन्हें वोट देने का अधिकार भी होगा.
इससे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं और दूध उत्पादकों के जनादेश को पलटा जा सकता है. बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई सरकार चुनाव के बाद सिर्फ इसलिए नियम बदल सकती है क्योंकि उसे नतीजे पसंद नहीं आए? हम लोकतांत्रिक जनादेश और सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा के लिए इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं.’
‘गोकुल मिल्क कोऑपरेटिव’चुनावः क्या है पूरा मामला?
ये टिप्पणियां कांग्रेस के नेतृत्व वाले राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी की जीत के बाद सामने आई हैं. इस पैनल का नेतृत्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतेज पाटिल कर रहे थे. इसने कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ यानी मशहूर गोकुल डेयरी के निदेशक मंडल के चुनाव में बहुमत हासिल किया.
कुल 25 सीटों में से इस पैनल ने 13 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी समर्थित महायुति गठबंधन को 12 सीटें मिलीं. महायुति में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी शामिल हैं. चुनाव के नतीजों का आधिकारिक ऐलान 19 अक्टूबर को किया गया.
इस नतीजे को सत्ताधारी गठबंधन के लिए झटके के तौर पर देखा गया. यह चुनाव सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के निदेशक मंडल पर नियंत्रण तय करने के लिए कराया गया था. यह संघ गोकुल डेयरी ब्रांड के नाम से काम करता है.



