घर बनाने में पेड़ बना रुकावट, बेटों ने कहा- इसे नहीं काटेंगे और बदल दिया नक्शा

आंध्र प्रदेश में दो भाइयों ने अपने दिवंगत पिता की याद में लगाए गए नीम के पेड़ को बचाने के लिए घर का नक्शा ही बदल दिया. पेड़ काटने के बजाय उन्होंने उसके चारों ओर जगह छोड़कर नया घर बनाया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आंध्र प्रदेश में दो भाइयों ने अपने दिवंगत पिता की याद में लगाए गए नीम के पेड़ को बचाने के लिए घर का नक्शा ही बदल दिया. पेड़ काटने के बजाय उन्होंने उसके चारों ओर जगह छोड़कर नया घर बनाया.

आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कडप्पा जिले में पिता के प्रति बेंटो का प्रेम मिशाल बन गया है. यहां दो बेटों ने पिता के लगाए पेड़ को काटने नहीं दिया, जबकि वो पेड़ उनका घर बनाने में बाधा पैदा कर रहा था. जानकारी के अनुसार, वाईएसआर कडप्पा जिले सिम्हाद्रिपुरम मंडल के पैडिपलेम गांव के निवासी शेख महबूब ने कुछ साल पहले अपने घर के आंगन में एक नीम का पेड़ लगाया था.

शेख महबूब ने उसकी देखभाल की और उसे बड़ा किया. कुछ समय बाद शेख महबूब का निधन हो गया. इसी पेड़ को कटाने से उनके बेटों ने मना कर दिया. पिता शेख महबूब की शारीरिक अनुपस्थिति में उनके बेटे बाशा और रफी उनके द्वारा लगाए गए नीम के पेड़ को उनकी छवि मानते हैं. प्रतिदिन उसकी सिंचाई करते हैं. हाल ही दोनों ने अपने पुराने घर की जगह नया घर बनाना शुरू किया था.

पेड़ नहीं कटाया, बल्कि घर का नक्शा बदला
आम तौर पर, लोग पेड़ काटकर घर बना लेते हैं, लेकिन बाशा और रफी के लिए, अपने पिता द्वारा लगाए गए पेड़ को कटाना उतना ही दर्दनाक था जितना कि उनके पिता की मौत. इसलिए उन्होंने इंजीनियर से बात की और घर का नक्शा बदल दिया. उन्होंने पेड़ को नुकसान पहुंचाए बिना उसके बढ़ने के लिए पेड़ के चारों ओर एक विशेष जगह छोड़ी और घर का निर्माण पूरा किया.

पेड़ नहीं कटाया, बल्कि घर का नक्शा बदला
आम तौर पर, लोग पेड़ काटकर घर बना लेते हैं, लेकिन बाशा और रफी के लिए, अपने पिता द्वारा लगाए गए पेड़ को कटाना उतना ही दर्दनाक था जितना कि उनके पिता की मौत. इसलिए उन्होंने इंजीनियर से बात की और घर का नक्शा बदल दिया. उन्होंने पेड़ को नुकसान पहुंचाए बिना उसके बढ़ने के लिए पेड़ के चारों ओर एक विशेष जगह छोड़ी और घर का निर्माण पूरा किया.

क्या बोले दोनों बेटे?
बेटों बाशा और रफी ने भावुक होकर बताया कि भले ही हमारे पिता शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वे इस नीम के पेड़ के रूप में हर दिन हमारे साथ हैं. हम इस पेड़ को नहीं कटा सकते. ये पेड़ उनकी यादों का जीता-जागता प्रमाण है. हमें इस बात का दुख है कि पेड़ के लिए जगह थोड़ी कम हो गई है. हमें लगता है कि हमारे पिता के प्यार ने हमारे पूरे घर को भर दिया है. पिता के प्रति असीम प्रेम के साथ-साथ, पेड़ों की कटाई के इस दौर में हरियाली को संरक्षित करने का इन भाइयों का निर्णय स्थानीय लोगों को विशेष रूप से प्रभावित कर रहा है. उनके आदर्श को देखकर ग्रामीण और आसपास के लोग उनकी खूब प्रशंसा कर रहे हैं.

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