AAP की गुजरात में आक्रामक रणनीति, नगर निगम चुनाव से पहले संगठन विस्तार से BJP की बढ़ी टेंशन
गुजरात में आम आदमी पार्टी ने नगर निगम चुनाव से पहले आक्रामक रणनीति अपनाई है... संगठन विस्तार को लेकर अंदरूनी बैठकों का दौर तेज हो गया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में इन दिनों हलचल मची हुई है.. आम आदमी पार्टी ने नगर निगम चुनावों से पहले अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है.. संगठन को मजबूत बनाने के लिए अंदरूनी बैठकों का दौर चल रहा है.. नए सदस्यों को जोड़ा जा रहा है.. और जनसभाओं में भीड़ जुट रही है.. इससे सत्ताधारी भाजपा की चिंता बढ़ गई है.. AAP के नेता दावा कर रहे हैं कि गुजरात में बदलाव की लहर चल रही है.. जबकि BJP इसे सिर्फ शोर बता रही है..
आम आदमी पार्टी की स्थापना 2012 में दिल्ली में हुई थी.. लेकिन गुजरात में इसकी एंट्री 2022 के विधानसभा चुनावों से हुई.. उस समय AAP ने आक्रामक कैंपेन चलाया.. जिसमें मुफ्त बिजली, पानी और शिक्षा जैसे वादे किए गए थे.. जिसके चलते गुजरात में AAP ने 5 सीटें जीतीं.. और कांग्रेस को पीछे छोड़कर मुख्य विपक्षी दल बन गई.. यह BJP के लिए चौंकाने वाला था.. क्योंकि गुजरात BJP का गढ़ माना जाता है.. जहां वह 1995 से सत्ता में है.. AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में कई रैलियां की.. और स्थानीय मुद्दों जैसे किसानों की समस्या, बेरोजगारी और महंगाई पर फोकस किया..
आपको बता दें कि 2025 तक AAP ने अपनी जड़ें और मजबूत की.. पार्टी ने गुजरात में 120 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में संगठन बनाया.. और स्थानीय नेताओं को जोड़ा.. और चैतर वसावा जैसे युवा नेता AAP में शामिल हुए.. और आदिवासी इलाकों में पार्टी की पकड़ बढ़ाई.. 2025 के लोकसभा चुनावों में AAP ने कुछ सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया.. हालांकि जीत नहीं मिली.. अब 2026 के नगर निगम चुनावों (जैसे अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा आदि) से पहले AAP ने रणनीति बदली है.. पार्टी का फोकस शहरी इलाकों पर है.. जहां युवा और मध्यम वर्ग ज्यादा हैं.. AAP के गुजरात प्रभारी गोपाल राय ने कहा कि पूरे देश में संगठन विस्तार तेज किया जाएगा.. और गुजरात में चुनाव पूरी ताकत से लड़े जाएंगे..
जानकारी के मुताबिक नगर निगम चुनाव 2026 के मध्य में होने वाले हैं.. और AAP ने इसके लिए कमर कस ली है.. पार्टी की रणनीति तीन मुख्य हिस्सों पर आधारित है.. संगठन विस्तार, जनसंपर्क और विपक्षी दलों पर हमला.. सबसे पहले बात करते हैं संगठन विस्तार की.. संगठन विस्तार को लेकर AAP ने गुजरात को 7 जोनों में बांटा है.. और हर जोन में बूथ स्तर पर वॉलंटियर्स की टीम बनाई है.. जनवरी 2026 में वडोदरा में एक बड़ी मीटिंग हुई.. जहां सिर्फ एक जोन से हजारों बूथ वॉलंटियर्स इकट्ठे हुए.. AAP के फाउंडर मेंबर राजेश शर्मा ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है.. और AAP BJP को कड़ी टक्कर देगी.. जबकि कांग्रेस तीसरे नंबर पर रहेगी..
वहीं अंदरूनी बैठकों का दौर भी तेज है.. AAP के नेता नियमित रूप से मिल रहे हैं.. जहां चुनावी रणनीति पर चर्चा होती है.. आपको बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने 2025 में गुजरात में घोषणा की.. कि AAP हर घर तक डोर-टू-डोर कैंपेन चलाएगी.. और अगले 2 सालों में हर घर को कम से कम 5 बार विजिट किया जाएगा.. युवाओं से अपील की गई कि वे राजनीतिक क्रांति में शामिल हों.. BJP ने 30 साल सत्ता में रहकर कुछ नहीं किया.. अब AAP की बारी है.. यह रणनीति दिल्ली और पंजाब मॉडल पर आधारित है.. जहां AAP ने छोटे-छोटे मुद्दों पर फोकस कर सत्ता हासिल की..
जनसभाओं में भी AAP की सक्रियता बढ़ी है.. चैतर वसावा की ‘गुजरात जोड़ो’ यात्रा में हर जगह उत्सव जैसा माहौल है.. इसमें BJP और कांग्रेस के नेक्सस पर आरोप लगाए जा रहे हैं.. जनवरी 2026 में एक सभा में 1500 से ज्यादा BJP और कांग्रेस वर्कर्स AAP में शामिल हुए.. AAP का दावा है कि गुजरात में उनका संगठन सबसे मजबूत है.. और छोटी रैलियों में भी बड़ी भीड़ आ रही है.. कई BJP और कांग्रेस नेता AAP में आने वाले हैं.. यह रणनीति आक्रामक है.. क्योंकि AAP अब सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि विकल्प बन रही है.. सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में AAP की पकड़ बढ़ी है.. और शहरी केंद्रों में स्वीकृति मिल रही है..
AAP की रणनीति में सोशल मीडिया का भी बड़ा रोल है.. पार्टी के नेता X पर सक्रिय हैं.. जहां वे BJP की नीतियों पर हमला करते हैं.. केजरीवाल का ‘न्यू ईयर रिजोल्यूशन’ जिसमें उन्होंने गुजरात में बदलाव का वादा किया.. और BJP-कांग्रेस के ‘सेटिंग’ पर आरोप लगाया.. यह आक्रामकता AAP को युवाओं.. और असंतुष्ट वोटर्स के बीच लोकप्रिय बना रही है..
AAP की इस सक्रियता से BJP की चिंता बढ़ गई है.. गुजरात BJP का गढ़ है.. लेकिन AAP की एंट्री से वोट बैंक में सेंध लग रही है.. BJP IT सेल को सलाह दी जा रही है कि AAP के राइज को काउंटर करने के लिए आक्रामक स्ट्रैटेजी अपनाएं.. BJP के नए स्टेट प्रेसिडेंट जगदीश विश्वकर्मा की नियुक्ति के पीछे भी यही रणनीति है.. और उन्होंने कहा कि AAP और कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता को काउंटर करने के लिए आक्रामक कदम उठाए जाएंगे..
BJP के नेता AAP को ‘बाहरी पार्टी’ बताते हैं.. लेकिन अंदरखाने टेंशन है.. AAP की रैलियों में भीड़ देखकर BJP ने अपनी मीटिंग्स बढ़ाई हैं.. सूरत, अहमदाबाद जैसे शहरों में AAP की पकड़ से BJP को डर है.. कि नगर निगम चुनावों में वोट बंट सकते हैं.. कांग्रेस पहले से कमजोर है, तो AAP मुख्य चैलेंजर बन रही है.. BJP ने AAP पर आरोप लगाया कि वे सिर्फ शोर मचा रहे हैं.. लेकिन काम नहीं कर रहे.. लेकिन AAP का जवाब है कि BJP 30 साल से सत्ता में है.. अब बदलाव का समय है..



