AI Impact Summit: गलगोटिया यूनिवर्सिटी का बड़ा फर्जीवाड़ा, दुनिया में कटी भारत की नाक! 

गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और ‘गुजरात मॉडल’ पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सियासत गरम… AI Impact Summit के संदर्भ में भी बहस तेज...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में मेक इन इंडिया थीम के तहत.. एक चीनी रोबोडॉग को स्वदेशी उत्पाद बताकर प्रदर्शित करने का मामला गरमा गया है.. गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर यह रोबोडॉग ओरियन नाम से पेश किया गया था.. लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों.. और सोशल मीडिया यूज़र्स ने इसे चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का Go2 मॉडल बताकर पोल खोल दी.. विवाद इतना बढ़ा कि आयोजकों की नाराजगी के बाद यूनिवर्सिटी को अपना स्टॉल हटाना पड़ा.. और आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी.. यूनिवर्सिटी ने इसे गलतफहमी बताया और कहा कि स्टॉल पर तैनात प्रतिनिधि को उत्पाद की सही जानकारी नहीं थी.. प्रतिनिधि प्रोफेसर नेहा सिंह ने कैमरे के सामने उत्साह में गलत दावे कर दिए..

आपको बता दें कि यह घटना 17 फरवरी 2026 को समिट के दौरान हुई.. जो दिल्ली में आयोजित था.. वहीं इस मामले ने मेक इन इंडिया पहल की साख पर सवाल उठा दिए हैं.. और सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी की भारी फजीहत हुई है.. बता दें कि एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत सरकार.. और विभिन्न तकनीकी संस्थाओं के सहयोग से आयोजित एक बड़ा इवेंट था.. यह समिट 16 से 18 फरवरी 2026 तक दिल्ली के प्रगति मैदान में चला..

बता दें कि समिट की थीम ‘मेक इन इंडिया’ के तहत एआई और रोबोटिक्स का विकास थी.. इसका मकसद था भारत को एआई में वैश्विक नेता बनाना.. और स्वदेशी नवाचारों को बढ़ावा देना.. समिट में 500 से ज्यादा स्टॉल लगे थे.. जहां यूनिवर्सिटीज, स्टार्टअप्स, कंपनियां.. और शोधकर्ताओं ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए.. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट का उद्घाटन किया था.. और कहा था कि एआई भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है..

जानकारी के मुताबिक समिट में 10,000 से ज्यादा विजिटर्स आए.. जिनमें छात्र, विशेषज्ञ और उद्योगपति शामिल थे.. गलगोटिया यूनिवर्सिटी का स्टॉल इसी समिट के एक्सपो एरिया में था.. जहां उन्होंने एआई आधारित प्रोजेक्ट्स दिखाए.. लेकिन रोबोडॉग ने पूरे समिट की छवि पर असर डाला.. समिट का फोकस स्वदेशी एआई पर था.. लेकिन इस घटना से विदेशी उत्पादों की कॉपी और गलत दावों पर बहस छिड़ गई..

समिट के एक्सपो एरिया में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का स्टॉल आकर्षण का केंद्र बना हुआ था.. स्टॉल पर एक रोबोडॉग प्रदर्शित किया गया था.. जिसे ओरियन नाम दिया गया था.. यूनिवर्सिटी की प्रतिनिधि और कम्युनिकेशन विभाग की प्रोफेसर नेहा सिंह ने राज्य प्रसारक डीडी न्यूज के कैमरे के सामने इसे पेश किया.. और उन्होंने कहा कि यह रोबोडॉग हमारे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित किया गया है.. यह मेक इन इंडिया का एक उदाहरण है और एआई तकनीक से लैस है..

रोबोडॉग चलता-फिरता था.. आदेश मानता था और लोगों से इंटरैक्ट करता था.. कई विजिटर्स ने इसके साथ फोटो खिंचवाई और वीडियो बनाए.. प्रोफेसर नेहा सिंह ने दावा किया कि यह यूनिवर्सिटी की टीम द्वारा बनाया गया है.. और यह सर्विलांस, शिक्षा और एंटरटेनमेंट के लिए इस्तेमाल हो सकता है.. लेकिन यह दावा जल्द ही झूठा साबित हो गया.. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.. और विशेषज्ञों ने इसे पहचान लिया..

आपको बता दें कि समिट के दौरान रोबोडॉग की तस्वीरें.. और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए.. तकनीकी विशेषज्ञों ने X (पूर्व ट्विटर), इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर लिखा कि यह यूनिट्री का Go2 रोबोडॉग है.. जो बाजार में उपलब्ध है.. एक यूजर ने लिखा कि यह चीनी उत्पाद है, मेक इन इंडिया का झूठा प्रचार.. और लोगों ने मीम्स बनाए और यूनिवर्सिटी की फजीहत की..

एक विशेषज्ञ ने कहा कि Go2 मॉडल 2023 में लॉन्च हुआ था.. और इसकी कीमत करीब 2.5 लाख रुपये है.. विवाद इतना बढ़ा कि आयोजकों ने यूनिवर्सिटी से स्पष्टीकरण मांगा.. सोशल मीडिया पर हजारों पोस्ट आए.. जिनमें लोगों ने मेक इन इंडिया की साख पर सवाल उठाए.. कुछ ने कहा कि यह धोखाधड़ी है, यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई होनी चाहिए.. अन्य ने कहा कि एआई समिट में फेक प्रोडक्ट, भारत की इमेज खराब.. विवाद की वजह से समिट के आयोजकों ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को अपना स्टॉल हटाने का आदेश दिया..

जानकारी के अनुसार यूनिट्री Go2 एक चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का उत्पाद है.. यह एक क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाला) रोबोट डॉग है.. जो एआई और मशीन लर्निंग से चलता है.. इसकी कीमत एंट्री-लेवल मॉडल में करीब $1600 (करीब 1.3 लाख रुपये) है.. प्रो मॉडल $2800 और एडु मॉडल $4500 तक है.. यह रोबोट हल्का (करीब 15 किलो) है.. 2.5 मीटर प्रति सेकंड की स्पीड से चलता है.. और जंप, स्ट्रेच, क्लाइंब जैसे काम कर सकता है..

वहीं यह 2023 में लॉन्च हुआ था और शिक्षा, रिसर्च, सर्विलांस और एंटरटेनमेंट के लिए इस्तेमाल होता है.. यूनिट्री चीन की कंपनी है, जो बोस्टन डायनेमिक्स के स्पॉट रोबोडॉग से प्रेरित है.. लेकिन कीमत में काफी सस्ता है.. गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने इसे अपना बताकर पेश किया.. जबकि यह बाजार में उपलब्ध है.. और भारत में भी बिकता है.. विशेषज्ञों ने कहा कि रोबोडॉग के डिजाइन, मूवमेंट और स्पेसिफिकेशन से साफ था कि यह Go2 मॉडल है..

प्रोफेसर नेहा सिंह गलगोटिया यूनिवर्सिटी के कम्युनिकेशन विभाग में काम करती हैं.. और उन्होंने डीडी न्यूज के कैमरे पर दावा किया कि रोबोडॉग यूनिवर्सिटी का स्वदेशी उत्पाद है.. और उन्होंने कहा कि यह हमारे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित किया गया है.. लेकिन यूनिवर्सिटी ने बाद में कहा कि नेहा सिंह को सही जानकारी नहीं थी.. और उन्होंने उत्साह में गलत बयान दे दिया..

यूनिवर्सिटी ने कहा कि प्रतिनिधि को मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं था.. नेहा सिंह ने बाद में सोशल मीडिया पर सफाई दी.. और कहा कि उनके शब्दों को गलत समझा गया.. उन्होंने कहा कि यह डेवलपमेंट के लिए था, लेकिन मिसकम्यूनिकेशन हो गया.. हालांकि सोशल मीडिया पर उनकी भी काफी आलोचना हुई.. और कई लोगों ने कहा कि प्रोफेसर को जानकारी होनी चाहिए..

विवाद बढ़ने पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने 18 फरवरी 2026 को आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की.. और उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना गलतफहमी की वजह से हुई है.. हमने कभी दावा नहीं किया कि हमने रोबोडॉग बनाया है.. यूनिवर्सिटी ने माफी मांगी और कहा कि हमारे स्टॉल पर तैनात प्रतिनिधि को उत्पाद की तकनीकी उत्पत्ति की सही जानकारी नहीं थी.. कैमरे के सामने उत्साह में गलत और भ्रामक दावे कर दिए गए..

यूनिवर्सिटी ने कहा कि प्रतिनिधि को मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं था.. आयोजकों की नाराज़गी देखते हुए उन्होंने स्टॉल हटा लिया और समिट से हट गए.. यूनिवर्सिटी ने कहा कि यह उत्पाद प्रदर्शन के लिए था.. लेकिन गलत तरीके से पेश किया गया.. हम मेक इन इंडिया के समर्थक हैं.. और भविष्य में सावधानी बरतेंगे.. यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौर ने कहा कि डेवलप और डेवलपमेंट के शब्दों में कन्फ्यूजन हो गया.. लेकिन लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ..

समिट के आयोजकों ने विवाद पर सख्त रुख अपनाया.. सरकारी सूत्रों ने बताया कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी को तुरंत स्टॉल खाली करने का आदेश दिया गया.. स्टॉल की बिजली काट दी गई.. और यूनिवर्सिटी को समिट से बाहर कर दिया गया.. आयोजकों ने कहा कि मेक इन इंडिया थीम पर विदेशी उत्पाद को स्वदेशी बताना अस्वीकार्य है..

समिट में सरकार का समर्थन था.. इसलिए विवाद ने सरकार की छवि पर भी असर डाला.. आयोजकों ने कहा कि भविष्य में स्टॉल्स की जांच सख्त की जाएगी.. वहीं सोशल मीडिया पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की खूब फजीहत हुई.. लोगों ने मीम्स बनाए.. चीनी डॉग को भारतीय नाम देकर मेक इन इंडिया.. कई यूज़र्स ने कहा कि यह धोखाधड़ी है, यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई हो.. इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वीडियो शेयर हुए.. एक यूज़र ने लिखा कि एआई समिट में फेक इनोवेशन, भारत की इमेज खराब..

 

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