गन्ने का भाव 500 रुपये करो! बांदा में किसानों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

बांदा में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, फसल नुकसान का मुआवजा और खाद की कालाबाजारी रोकने समेत सात मांगें उठाईं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: खेती की बढ़ती लागत और फसलों के नुकसान के बीच किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की है। बांदा में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष महेंद्र त्रिपाठी के नेतृत्व में किसानों ने गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, फसल नुकसान का मुआवजा देने और खाद की कालाबाजारी रोकने समेत सात मांगें उठाईं।

गन्ने का भाव 500 रुपये करने और समय पर भुगतान की मांग

किसान नेताओं ने कहा कि डीजल, खाद और कीटनाशकों की कीमतें बढ़ने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि गन्ने के मूल्य में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवार हैं। किसानों ने गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने और बकाया भुगतान समय पर कराने की मांग की। साथ ही गेहूं के सरकारी खरीद मूल्य में 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि की मांग भी उठाई।

बारिश से फसल नुकसान पर मुआवजा देने की मांग

ज्ञापन में असमय बारिश और तेज हवाओं से धान, उड़द और मूंग की फसलों को हुए नुकसान का गांववार सर्वे कराने की मांग की गई। किसान यूनियन ने कहा कि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। संगठन ने ठेके और बटाई पर खेती करने वाले किसानों को भी मुआवजा देने की मांग उठाई, ताकि खेती करने वाले जरूरतमंद परिवार राहत से वंचित न रहें।

आलू किसानों और खाद की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया

किसानों ने आलू के कोल्ड स्टोर किराये में सहायता देने और पहले आलू निकाल चुके किसानों को भी इसका लाभ देने की मांग की। ज्ञापन में आलू बीज की कीमत घटाने का मुद्दा भी उठाया गया। किसान नेताओं के अनुसार, बाजार में आलू बीज करीब 700 रुपये के भाव पर मिल रहा है, जबकि उद्यान विभाग की ओर से इसकी कीमत 3,600 रुपये बताई गई। यूनियन ने इसे अधिकतम 1,500 रुपये तक रखने की मांग की। इसके अलावा यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी रोकने तथा खाद समय पर उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।

रिपोर्ट – इक़बाल खान, बांदा

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