मुख्यमंत्री जी, जरा देखिए बरेली में कैसे बर्बाद हुआ जनता का 11.18 करोड़: नगर निगम और नेताओ का स्मार्ट सिटी के घोटालों का खेल

बरेली के पटेल चौक पर 11.18 करोड़ रुपये से बना स्काई वॉक तीन साल से बंद है। पांच बार टेंडर फेल होने और जुलाई में युवक की मौत के बाद अब जांच और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है।

बरेली, 10 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 12 अक्टूबर को प्रस्तावित बरेली दौरे से पहले पटेल चौक स्थित स्काई वॉक का मामला एक बार फिर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 11.18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस स्काई वॉक का उद्देश्य भले ही शहर को आधुनिक सुविधाएं देना रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। तीन साल से बंद पड़े इस ढांचे पर जंग लग रही है, जबकि इसे चालू करने के लिए पांच बार टेंडर निकाले जाने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला।

करोड़ों का ढांचा तैयार, इस्तेमाल की योजना नाकाम

वर्ष 2020 में शुरू हुआ स्काई वॉक वर्ष 2023 में पूरा बताया गया था। अब वर्ष 2026 में भी यह आम जनता के इस्तेमाल के लिए बंद है। ढांचे में शीशे, लिफ्ट और रोशनी जैसी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। जिस परियोजना को शहर के विकास और यातायात व्यवस्था में सुधार की पहल के रूप में पेश किया गया था, वह अब नगर निगम के लिए जवाबदेही का सवाल बन गई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्काई वॉक के संचालन और रखरखाव की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित नहीं थी, तो करोड़ों रुपये की इस परियोजना को किस आधार पर तैयार किया गया? क्या निर्माण से पहले व्यावसायिक उपयोग, रखरखाव और संचालन की व्यावहारिक योजना बनाई गई थी? यदि बनाई गई थी, तो वह जमीन पर क्यों नहीं उतर सकी?

पांच बार टेंडर, फिर भी संचालन का रास्ता नहीं

स्काई वॉक के संचालन के लिए पांच बार टेंडर निकाले जाने के बावजूद प्रक्रिया सफल नहीं हो पाई। नगर निगम की ओर से कंपनियों की विज्ञापन में अधिक रुचि और संचालन में कम दिलचस्पी को वजह बताया गया है। लेकिन यह तर्क अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

यदि बार-बार टेंडर विफल हो रहे थे, तो संबंधित अधिकारियों ने परियोजना के संचालन की व्यवहार्यता की समीक्षा कब की? शर्तों में जरूरी बदलाव क्यों नहीं किए गए? पांच बार की कवायद के बाद भी जिम्मेदारी तय हुई या नहीं? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सार्वजनिक होना चाहिए। आखिर निर्माण पर 11.18 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी जनता को सुविधा क्यों नहीं मिली?

जुलाई में युवक की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

बंद पड़े स्काई वॉक से बिजली के बोर्ड, तार और पाइप चोरी होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम के समय परिसर में असामाजिक गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। जुलाई 2026 में इसी स्काई वॉक से गिरकर एक युवक की मौत होने की बात भी सामने आई थी। इस घटना के बाद परिसर की सुरक्षा, निगरानी और खुले हिस्सों को सुरक्षित करने के इंतजामों पर सवाल उठना लाजिमी है।

यदि परिसर लंबे समय से बंद था, तो वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? हादसे के बाद क्या जांच हुई और किस स्तर पर जवाबदेही तय की गई? नगर निगम को इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। किसी सार्वजनिक परियोजना का अनुपयोगी पड़े रहना ही चिंता का विषय है, लेकिन उसके कारण किसी की जान जाने की घटना सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा को और जरूरी बना देती है।

सपा नेता ने उठाए सवाल, जांच की मांग

सपा नेता मयंक मोंटी शुक्ला ने परियोजना की योजना और क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों और दुकानदारों से पर्याप्त विचार-विमर्श किए बिना इसे तैयार किया गया। उनका आरोप है कि बिना प्रभावी योजना के करोड़ों रुपये खर्च किए गए और अब परियोजना बंद पड़ी है। उन्होंने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।

हालांकि, परियोजना में भ्रष्टाचार या कमीशनखोरी के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। लेकिन पांच बार टेंडर विफल होने, लंबे समय से संचालन बंद रहने और सुरक्षा संबंधी सवालों के बीच नगर निगम के लिए खर्च और परिणाम का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना जरूरी हो गया है।

मुख्यमंत्री के दौरे से पहले जनता के तीन सवाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 12 अक्टूबर के दौरे से पहले पटेल चौक का स्काई वॉक शहर के विकास कार्यों की समीक्षा का अहम मुद्दा बन सकता है। जनता की मांग है कि इस परियोजना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, बार-बार टेंडर विफल होने के कारणों की समीक्षा हो तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जाए।

साथ ही जुलाई में हुई युवक की मौत के मामले में सुरक्षा संबंधी लापरवाही की जांच कराई जाए। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर यह भी स्पष्ट किया जाए कि स्काई वॉक को सुरक्षित तरीके से चालू करना संभव है या नहीं। यदि इसे चालू करना व्यावहारिक नहीं है, तो वैकल्पिक उपयोग अथवा ढांचे को हटाने के संबंध में पारदर्शी निर्णय लिया जाए।

नगर आयुक्त के आश्वासन से आगे कब बढ़ेगा मामला?

नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य की ओर से विशेषज्ञों के साथ बैठक कर स्काई वॉक को जल्द शुरू कराने की बात कही गई है। लेकिन परियोजना लंबे समय से बंद है और पांच बार टेंडर की प्रक्रिया भी कोई नतीजा नहीं दे सकी। ऐसे में अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्ययोजना और जवाबदेही तय करने की जरूरत है।

सवाल साफ है—11.18 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी जब जनता को सुविधा नहीं मिली, तो इस नाकामी की जिम्मेदारी कौन लेगा? मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान शहर की चमक-दमक और विकास के दावों के बीच पटेल चौक का यह स्काई वॉक भी जवाब मांग रहा है।

रिपोर्ट – सुनील सक्सेना, बरेली

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