गरबा पंडालों के बाहर ‘लव जिहाद से सावधान’ के पोस्टर, आधार कार्ड दिखाना होगा!
गुजरात के राजकोट में नवरात्रि और गरबा आयोजनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है... गरबा पंडालों के बाहर लव जिहाद से सावधान के...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही गरबा आयोजनों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं.. राजकोट शहर में करीब 48 आधुनिक रास-गरबा आयोजनों की तैयारी की गई है.. लेकिन इस बार गरबा आयोजनों के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है.. जिसने शहर में नई चर्चा छेड़ दी है.. दरअसल राजकोट में कई गरबा पंडालों के बाहर लव जिहाद से सावधान लिखे पोस्टर लगाए गए हैं.. इन पोस्टरों के जरिए हिंदू बेटियों को कथित लव जिहाद से बचने का संदेश दिया गया है.. नवरात्रि के उत्सवी माहौल के बीच इन पोस्टरों की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.. और अब इस मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं..
जानकारी के मुताबिक राजकोट में कई गरबा आयोजनों के बाहर लगाए गए इन पोस्टरों पर लोगों की नजर पड़ी.. जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया.. स्थानीय लोगों का कहना है कि ये पोस्टर रातोंरात लगाए गए हैं.. हालांकि इन पोस्टरों पर किसी संगठन, संस्था या व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं है.. ऐसे में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन्हें किसने लगाया.. और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है.. पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई दे रहे हैं.. लेकिन इन्हें लगाने वालों की पहचान को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है.. इसलिए इस मामले में किसी खास संगठन या व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना फिलहाल उचित नहीं होगा.. वहीं प्रशासन की ओर से इस संबंध में क्या जानकारी दी जाती है.. इस पर भी नजर बनी हुई है..
वहीं इस पूरे मामले के बीच हिंदू जागरण मंच के संयोजक मंगेश देसाई का बयान भी सामने आया है.. मंगेश देसाई के मुताबिक इन पोस्टरों को जन-जागृति फैलाने के उद्देश्य से हिंदू संगठनों की ओर से लगाया गया हो सकता है.. उन्होंने कहा कि इसका मकसद धार्मिक सौहार्द बिगाड़ना नहीं.. बल्कि सनातन की रक्षा के लिए लोगों को जागरूक करना है.. उनके बयान के बाद पोस्टरों को लेकर चल रही चर्चा और तेज हो गई है.. हालांकि पोस्टरों पर किसी संगठन का नाम नहीं होने के कारण उन्हें लगाने वालों की आधिकारिक पहचान अब भी स्पष्ट नहीं है..
आपको बता दें कि मंगेश देसाई ने गरबा आयोजनों में प्रवेश की व्यवस्था को लेकर भी अपनी बात रखी है.. उनके मुताबिक इस संबंध में पुलिस कमिश्नर के सामने मांग रखी गई थी.. कि गरबा कार्यक्रमों में प्रवेश देने से पहले सभी लोगों के आधार कार्ड की जांच की जाए.. इस मांग के पीछे आयोजनों में आने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित करने.. और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जागरूकता बढ़ाने की बात कही गई है.. हालांकि, आधार कार्ड की जांच को लेकर प्रशासन का आधिकारिक रुख क्या है.. और क्या ऐसी कोई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं.. फिलहाल यह मांग मंगेश देसाई के बयान के जरिए चर्चा में आई है..
मंगेश देसाई ने यह भी दावा किया कि कई गरबा आयोजकों ने इन मांगों को सकारात्मक रूप से लिया है.. उनके मुताबिक कुछ आयोजनों में तिलक लगाकर प्रवेश देने की बात कही गई है.. वहीं, कुछ आयोजकों ने युवकों के आधार कार्ड की जांच करने.. और प्रवेश पास पर उनका नाम दर्ज करने की मांग भी स्वीकार की है.. हालांकि, इन व्यवस्थाओं को लेकर सभी आयोजकों की ओर से एक समान निर्णय लिए जाने की पुष्टि नहीं हुई है.. इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजकोट के सभी गरबा आयोजनों में एक जैसी प्रवेश व्यवस्था लागू कर दी गई है.. फिलहाल, मंगेश देसाई के बयान के आधार पर कुछ आयोजकों की सहमति का दावा सामने आया है.. इस संबंध में आयोजकों और प्रशासन की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा..
वहीं इस मामले में मंगेश देसाई का एक और बयान चर्चा का विषय बना हुआ है.. और उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई आयोजक इन पोस्टरों को हटाने की कोशिश करेगा.. तो वे अपने तरीके से इसका जवाब देंगे। इस बयान के बाद पोस्टरों का मुद्दा केवल जागरूकता अभियान तक सीमित नहीं रहा.. बल्कि इसे लेकर बहस भी तेज हो गई है.. सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए पोस्टरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि.. इन्हें लगाने की अनुमति किसने दी.. इनकी जिम्मेदारी कौन लेगा और इन्हें हटाने या बनाए रखने का निर्णय किस आधार पर लिया जाएगा.. इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों और आयोजकों की प्रतिक्रिया से ही मिल सकता है.. फिलहाल मंगेश देसाई की चेतावनी ने इस पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है..



