इंदौर मामले में घिरी बीजेपी सरकार, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा, उमा भारती ने भी उठा दिए सवाल!

भाजपा राज में जो हो जाये वही कम है। लोगों के मौतें बीजेपी नेताओं पर ज्यादा असर नहीं करती हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में जो हो जाये वही कम है। लोगों के मौतें बीजेपी नेताओं पर ज्यादा असर नहीं करती हैं। इन दिनों सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर आज ऐसी हालत से गुजर रहा है जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं रहा होगा।

आलम ये है कि दूषित पानी पीने से लोगों की मौतें हो रही हैं, चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। इंदौर में दूषित पानी पीने से 9 लोगों मौत हो गई है, जबकि BJP पार्षद 15 मौतों का दावा कर रहे हैं. इस मामले पर विपक्ष तो बीजेपी से सवाल पूछते हुए घेर ही रहा है लेकिन खुद बीजेपी भी अपनी ही पार्टी के नेताओं पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की सीनियर नेता उमा भारती ने मोहन यादव सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

इंदौर दूषित पानी मामले का संज्ञान लेते हुए उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है. जिसमें उन्होंने लिखा है, “साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं. प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवॉर्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है.”

वहीं, उमा भारती ने लिखा, “जिंदगी की कीमत दो लाख रुपये नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुःख में डूबे रहते हैं. इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा. पीड़ितजन से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा. यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है.”

वहीं इस मामले को लेकर खुद बीजेपी पार्षद ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर बीजेपी पार्षद कमल बाघेला ने सिस्टम की लापरवाही का आरोप लगाया। इसके साथ ही कमल बाघेला ने बताया कि उन्होंने दूषित पानी की समस्या को लेकर तीन साल पहले ही शिकायत दर्ज कराई थी. उस समय भी इलाके में लोगों को गंदा और बदबूदार पानी मिल रहा था. इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. बीजेपी पार्षद ने कहा कि सिर्फ मौखिक ही नहीं, बल्कि करीब 6 महीने पहले उन्होंने लिखित में भी संबंधित विभागों को शिकायत दी थी. शिकायत में साफ तौर पर चेतावनी दी गई थी कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ तो बड़ा हादसा हो सकता है. बावजूद इसके अधिकारियों ने आंखें मूंदे रखीं.

कमल बाघेला ने कहा कि अब तक जो कार्रवाई की गई है, उससे वह बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से लोगों की जान गई, उन पर हत्या का प्रकरण दर्ज होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस मामले में उनकी खुद की कोई जिम्मेदारी बनती है, तो उन पर भी कार्रवाई की जाए. पार्षद कमल वाघेला ने कहा कि 311, सीएम हेल्पलाइन पर लंबे समय से शिकायतें हो रही थीं.

महापौर ने निर्देश दिए थे कि अमृत योजना के फंड का इंतजार ना किया जाए, बल्कि पाइपलाइन का काम फौरन शुरू कर दिया जाए लेकिन अफसरों ने मेयर के निर्देशों का पालन नहीं किया. बीते 29 दिसंबर 2025 को क्षेत्र में बीमारी फैल गई. वॉर्ड 11 के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला ने मुख्यमंत्री को लिखित में शिकायत की. पार्षद का दावा है कि अफसरों की लापरवाही ने लोगों की जान ले ली है. अफसरों की ऐसी लापरवाही आपराधिक कृत्य है.लोकस्वास्थ्य को जानबूझकर खतरे में डाला गया है. ऐसे अफसरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए.

अब सवाल ये उठ रहा है कि अगर बीजेपी पार्षद ही इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है तो आम जनता कैसे संतुष्ट हो पाएगी। वहीं विपक्ष भी इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार और केंद्र में बैठी मोदी सरकार पर हमलावर है। इसी बीच दूषित पानी से हुई मौत को लेकर कांग्रेस ने बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी वोट चोरी करके सरकार बनाती है और मौत परोसने का काम करती है।

इतना सबकुछ होने के बावजूद भी शासन-प्रशासन की नाकामी का आलम यह है कि इतनी बड़ी घटना के कई दिन गुजर जाने के बाद भी न तो अभी तक मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट आ पाई है, न ही किसी का पोस्टमार्टम ही हो सका है. अब पानी साफ करने को लेकर किसी जहरीले केमिकल की आशंका जताई जा रही है. प्रदेश में सबसे ज्यादा साधन संपन्न और जल वितरण को लेकर वाटर प्लस अवार्ड लेने वाले इंदौर शहर में ना तो लाइन लीकेज पता लगाने की कोई सटीक व्यवस्था है और न ही जल वितरण के पूर्व जांच और उसके शुद्धिकरण की निगरानी की कोई प्रक्रिया.

मौके पर आलम यह है कि नगर निगम के अधिकारी और जेसीबी भागीरथपुरा में जहां-तहां गड्ढे खोदकर लाइन लीकेज का पता लगाने में जुटे हैं. हालांकि बीते दिनों दावा किया गया था कि लाइन का मुख्य लीकेज मिल गया है. लिहाजा भागीरथपुरा पानी की टंकी के पास पुलिस चौकी के शौचालय से पानी की लाइन में लीकेज मानकर शौचालय को तोड़ने के बाद हल्की सी सीमेंट लगाकर लाइन लीकेज को बंद कर दिया गया. इसके बावजूद लोगों के बीमार होने का सिलसिला जारी है।

मध्य प्रदेश नहीं बल्कि देशभर में सुर्खियां बना यह मुद्दा स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए इतना औपचारिक है कि विभाग ने ना तो किसी का पोस्टमार्टम कराया, ना ही तमाम तरह की जांचों के बाद कोई मेडिकल रिपोर्ट अब तक आ सकी. इधर, जिला प्रशासन के अधिकारी भी रिपोर्ट को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के भरोसे बैठे हैं, जहां अब तक सैकड़ों मरीजों की ब्लड कल्चरल रिपोर्ट ही तैयार नहीं हो सकी है.

स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ डॉ माधव हसानी रिपोर्ट के लिए मेडिकल कॉलेज के भरोसे बैठे हैं. ऐसी स्थिति में मौत के वास्तविक कारण को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. यही वजह है कि शुरुआती दिनों से लोगों के बीमार होने और मृत्यु का कारण सिर्फ कॉन्टैमिनेटेड वॉटर को बताया जा रहा है। गौरतलब है कि इस मामले को सियासी पारा हाई है अब देखना ये होगा सीएम मोहन यादव दोषियों को कब तक सजा दिलवाते हैं। यह भाजपा सरकार की बड़ी नाकामी साबित हुई है।

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