हारी सीटों पर बीजेपी की नई रणनीति, तावड़े ने क्षेत्रीय अध्यक्षों से मांगा जिताऊ प्लान

BJP ने कमजोर सीटों के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है. बैठक में विनोद तावड़े ने पूछा- कहां हारे, क्यों हारे और अब क्या करेंगे?

4पीएम न्यूज नेटवर्क: BJP ने कमजोर सीटों के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है. बैठक में विनोद तावड़े ने पूछा- कहां हारे, क्यों हारे और अब क्या करेंगे? करीब 18 हजार कमजोर बूथों पर अलग जिताऊ प्लान तैयार होगा.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अब संगठन के स्तर पर चुनावी तैयारियों को और तेज कर दिया है. पार्टी के प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने लखनऊ में प्रदेश संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों,

क्षेत्रीय अध्यक्षों और क्षेत्रीय प्रभारियों के साथ अहम बैठक की. बैठक का फोकस उन विधानसभा सीटों पर रहा, जहां बीजेपी को 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी.

विनोद तावड़े ने क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों को सिर्फ हार का कारण बताने के बजाय हर कमजोर सीट के लिए समाधान और जिताऊ रणनीति का पूरा प्लान तैयार करने को कहा है. यानी अब संगठन से सिर्फ यह रिपोर्ट नहीं मांगी जा रही कि पार्टी कहां और क्यों हारी,

बल्कि यह भी बताना होगा कि 2027 में उस सीट को जीतने के लिए क्या किया जाएगा. साथ ही बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक समीक्षा और कमजोर क्षेत्रों पर माइक्रो-मैनेजमेंट पर जोर दिया जा रहा है.

कहां हारे, क्यों हारे और अब क्या करेंगे?

प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े की बैठक में चुनावी आंकड़ों के साथ तीन सवालों पर फोकस रहा: पहला- कहां हारे? किस विधानसभा क्षेत्र और किस बूथ पर पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा? दूसरा- क्यों हारे?

हार के पीछे संगठनात्मक कमजोरी थी, उम्मीदवार का प्रभाव कम था, स्थानीय समीकरण बिगड़े या वोट ट्रांसफर में समस्या आई? तीसरा- अब क्या करेंगे? 2027 तक उस कमी को दूर करने के लिए संगठन के स्तर पर क्या कदम उठाए जाएंगे?

2022 और 2024 के बीच का अंतर भी खंगाला जाएगा

बीजेपी की समीक्षा का एक अहम हिस्सा 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव के बीच बदले चुनावी गणित को समझना है. किस विधानसभा सीट पर 2022 में पार्टी की स्थिति क्या थी और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसी विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी का प्रदर्शन कितना बदला. इस अंतर को बूथ स्तर तक देखा जाएगा. इससे पार्टी यह समझने की कोशिश करेगी कि कहां संगठन कमजोर हुआ, कहां वोटों का अंतर बढ़ा और कहां स्थानीय स्तर पर परिस्थितियां बदलीं.

हारी सीट पर सिर्फ रिपोर्ट नहीं, जिताऊ फॉर्मूला चाहिए

पूर्वांचल और दूसरे क्षेत्रों में बीजेपी पहले ही 2022 और 2024 में कमजोर प्रदर्शन वाली सीटों की समीक्षा कर रही है. गोरखपुर और प्रयागराज क्षेत्र की बैठकों में भी ऐसी सीटों और बूथ प्रबंधन पर फोकस किया गया था.

बीजेपी के संगठनात्मक मंथन में अब हर सीट के लिए एक ही रणनीति के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग प्लान तैयार करने पर जोर है. अगर किसी विधानसभा क्षेत्र में संगठन कमजोर है तो वहां संगठन को मजबूत करने का रोडमैप बनेगा.

अगर किसी बूथ पर पार्टी का वोट लगातार कम हुआ है तो वहां कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने की रणनीति तैयार होगी. अगर स्थानीय सामाजिक समीकरण चुनौती हैं तो उस क्षेत्र में पार्टी की पहुंच और सामाजिक संपर्क की समीक्षा होगी. और अगर उम्मीदवार या स्थानीय नेतृत्व से जुड़ी समस्या सामने आती है तो उसका समाधान भी चुनाव से पहले निकालने की कोशिश होगी. क्षेत्रीय अध्यक्षों के सामने अब लक्ष्य हार से जीत तक का रास्ता बताने का है.

18 हजार बूथों पर बीजेपी की नजर

बीजेपी की माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति में बूथ सबसे महत्वपूर्ण इकाई बन गया है. पार्टी ने करीब 18 हजार बूथों को विशेष चुनौती के तौर पर चिह्नित करने की बात सामने आई है. इन बूथों पर संगठन को मजबूत करने और अलग रणनीति बनाने पर जोर है. यानी 2027 की तैयारी विधानसभा से नीचे उतरकर बूथ तक पहुंच रही है. हर स्तर पर संगठन की सक्रियता और चुनावी तैयारी को परखा जा रहा है.

चार सह-प्रभारियों की भी होगी अहम भूमिका

मिशन-2027 के लिए बीजेपी ने विनोद तावड़े के साथ चार सह-प्रभारी भी लगाए हैं. पार्टी ने गुजरात के जगदीश ईश्वर पटेल, महाराष्ट्र की मेधा कुलकर्णी और झारखंड के प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को यूपी की जिम्मेदारी दी है.

इन नेताओं के बीच क्षेत्र और संगठनात्मक जिम्मेदारियों का बंटवारा भी किया गया है. प्रदीप वर्मा को अवध और कानपुर-बुंदेलखंड, जगदीश पटेल को काशी, अनंत ओझा को ब्रज क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है. मेधा कुलकर्णी प्रभारी के साथ समन्वय के अलावा महिला संपर्क अभियान पर भी काम करेंगी.

तावड़े की सीएम और डिप्टी सीएम से मुलाकात

विनोद तावड़े ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से भी मुलाकात की है. संगठन और सरकार के बीच समन्वय के साथ आगामी चुनावी कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा हो रही है. बीजेपी की कोशिश है कि सरकार की योजनाओं और संगठन की गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए और उसका फीडबैक सीधे बूथ स्तर तक पहुंचे.

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