चैतर वसावा का BJP पर तीखा हमला, कहा- 30 साल में सिर्फ भय, भ्रम और भ्रष्टाचार

गुजरात में चैतर वसावा ने BJP सरकार पर जोरदार हमला बोला... उन्होंने कहा कि 30 साल के शासन में BJP ने सिर्फ भय, भ्रम...    

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता है.. वहां हाल ही में एक बड़ी घटना घटी है.. वडोदरा जिले के पांच भाजपा विधायकों ने राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को एक पत्र लिखकर प्रशासनिक व्यवस्था की कड़ी आलोचना की है.. और उन्होंने कहा है कि राज्य में सरकारी कामकाज पूरी तरह से बिगड़ गया है.. आम आदमी के लिए छोटे-मोटे काम करवाना भी अब एक युद्ध लड़ने जैसा हो गया है.. अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी बढ़ गई है.. और वे विधायकों की बात तक नहीं सुनते.. जानकारी के मुताबिक यह पत्र 8 जनवरी 2026 को भेजा गया था.. और इससे गुजरात की राजनीति में हलचल मच गई है.. वहीं इस मामले ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि अगर भाजपा के अपने विधायक ही असंतुष्ट हैं..

गुजरात में भाजपा की सरकार पिछले 30 सालों से है.. और इसे ‘गुजरात मॉडल’ के नाम से जाना जाता है.. जो विकास और कुशल प्रशासन का प्रतीक माना जाता है.. लेकिन यह शिकायत इस मॉडल पर सवाल उठाती है.. गुजरात भारत का एक प्रमुख राज्य है.. जहां भाजपा 1995 से सत्ता में है.. नरेंद्र मोदी ने यहां मुख्यमंत्री रहते हुए ‘गुजरात मॉडल’ को लोकप्रिय बनाया.. जिसमें तेज विकास, निवेश और कुशल प्रशासन पर जोर था.. वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल 2021 से पद पर हैं.. और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने रिकॉर्ड 156 सीटें जीती.. लेकिन हाल के वर्षों में राज्य में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अक्षमता.. और आम जनता की शिकायतों की खबरें बढ़ी हैं..

वडोदरा गुजरात का एक महत्वपूर्ण शहर है.. जो औद्योगिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है.. यहां भाजपा का मजबूत आधार है.. जिले में कई विधानसभा क्षेत्र हैं.. जिसमें सावली, करजन, दाभोई, वाघोडिया और पदरा शामिल है.. जानकारी के अनुसार इन क्षेत्रों के विधायक स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं.. लेकिन अब इन्हीं विधायकों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है.. यह पहली बार नहीं है जब गुजरात में भाजपा के अंदर असंतोष की खबरें आई हैं.. पहले भी विधायकों ने अधिकारियों की अनदेखी की शिकायत की है.. लेकिन इस बार पांच विधायक एक साथ आए हैं, जो बड़ा संकेत है..

आपको बता दें कि गुजरात में प्रशासनिक ढांचा मजबूत माना जाता है.. लेकिन कोरोना महामारी के बाद से कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सरकारी दफ्तरों में कामकाज धीमा हो गया है.. डिजिटल इंडिया के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बढ़ी है.. लेकिन इससे जमीनी हकीकत से दूरी बढ़ गई है.. आम जनता को राशन कार्ड, लाइसेंस या जमीन से जुड़े कामों में महीनों लग जाते हैं.. अधिकारियों की मनमानी से भ्रष्टाचार भी बढ़ा है.. कैग (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) की रिपोर्ट्स में.. गुजरात के नगर निगमों में 2 लाख करोड़ रुपये के अनऑडिटेड फंड्स का जिक्र है.. जिसमें अनियमितताएं पाई गई हैं..

जानकारी के मुताबिक पांच विधायकों ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि.. प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है.. पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले केतन इनामदार (सावली), अक्षय पटेल (करजन), शैलेश मेहता उर्फ सोत्ता (दाभोई), धर्मेंद्रसिंह वाघेला (वाघोडिया) और चैतन्यसिंह जाला (पदरा) विधायक हैं.. और उन्होंने कहा कि अधिकारियों की बुरी मानसिकता से सरकार की छवि खराब हो रही है..

जानकारी के अनुसार मुख्य शिकायतों में कई प्रकार की समस्याएं शामिल हैं.. जिसमें सरकारी दफ्तरों में छोटा काम करवाना ‘युद्ध’ जैसा हो गया है.. लोग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन काम नहीं होता.. भ्रष्टाचार बढ़ा है, और बिना रिश्वत के फाइलें नहीं चलतीं.. कलेक्टर, कमिश्नर, जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) जैसे बड़े अधिकारी अपनी मर्जी से काम करते हैं.. वे विधायकों की सिफारिशों को अनदेखा करते हैं..

अधिकारी आलीशान दफ्तरों में बैठकर वीडियो कॉल से मीटिंग करते हैं.. वे जमीनी हकीकत, जनता की समस्याओं.. और भौगोलिक स्थिति को जाने बिना कागजों पर रिपोर्ट बनाते हैं.. इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं.. विधायकों ने कहा कि अधिकारी तथ्यों को छिपाकर सरकार को ‘सुंदर चित्र’ दिखाते हैं.. स्थानीय स्तर पर कोऑर्डिनेशन मीटिंग्स में शिकायतें करने के बावजूद कोई बदलाव नहीं आता.. विधायकों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है.. और कहा है कि अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाएं.. जैसी समस्याएं शामिल हैं..

जानकारी के मुताबिक यह पत्र गांधीनगर में मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपा गया.. विधायक केतन इनामदार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत कर चुके हैं.. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.. यह शिकायत गुजरात के अन्य जिलों में भी समान समस्याओं की ओर इशारा करती है..

वहीं इस पत्र ने विपक्षी दलों को भाजपा पर हमला करने का मौका दिया है.. आम आदमी पार्टी गुजरात में उभर रही है.. उसने इसे बड़ा मुद्दा बनाया.. AAP के विधायक चैतर वासवा ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया.. जिसमें उन्होंने कहा कि अगर भाजपा के अपने विधायक अधिकारियों की नहीं सुनते.. तो आम जनता की क्या हालत होगी.. उन्होंने अरविंद केजरीवाल और इशुदान गढ़वी के नेतृत्व में गुजरात में बदलाव की बात कही.. AAP ने आरोप लगाया कि भाजपा की 30 साल की सरकार में सिर्फ ‘भय, भ्रम और भ्रष्टाचार’ हुआ है.. अगर कोई सवाल पूछे, तो भाजपा नेता पुलिस का दुरुपयोग कर धमकाते हैं.. AAP ने इसे ‘तानाशाही’ बताया और लोगों को न्याय दिलाने की लड़ाई का ऐलान किया..

कांग्रेस ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी.. कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने X पर पोस्ट किया कि गुजरात में प्रशासनिक अराजकता है.. और भाजपा की ‘विकास’ सिर्फ दिखावा है.. वहीं अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि यह गुजरात मॉडल की असफलता है.. भाजपा की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.. लेकिन कुछ नेताओं ने इसे आंतरिक मामला बताया.. सोशल मीडिया पर भी हलचल है..

 

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