CJP दिवाली तक रहेगी प्रदर्शन से दूर, दीपके बोले – परिवार को दें समय

पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों से त्योहारों पर परिवार संग समय बिताने की भावुक अपील की साथ ही जेल में बंद नेताओं को याद रखने को कहा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: CJP के नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका जेल में हैं. पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों से त्योहारों पर परिवार संग समय बिताने की भावुक अपील की साथ ही जेल में बंद नेताओं को याद रखने को कहा.

4 मुख्य बातें

दीपके की प्रदर्शनकारियों से त्योहार पर परिवार के साथ रहने की अपील

सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत दो दिन बढ़ी

दीपके बोले- सौरव और आशुतोष मेरे भाई और परिवार हैं

दोनों नेताओं के जेल जाने को बताया गांधीजी का सत्याग्रह

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका अभी भी जेल में हैं. पार्टी उनकी रिहाई की लगातार कोशिश कर रही है. इस बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों से अपील की और उनसे आग्रह किया कि वो त्योहारों के इस मौसम में अपने परिवारों के साथ समय बिताएं.

उन्होंने भावुक होते हुए रांका और दास को आंदोलन का असली लीडर बताया और उन आलोचकों पर निशाना साधा जो उनके प्रोटेस्ट की तुलना नेपाल, बांग्लादेश और फ्रांस में हुए हिंसक प्रदर्शनों से कर रहे थे.

दिपके ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए पिछले आंदोलनों में समर्थन देने के लिए प्रदर्शनकारियों का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान सभी को बहुत कठिन दौर से गुजरना पड़ा है. उन्होंने कहा कि इसके परिणाम उनके परिवारों को भी भुगतने पड़े हैं, इसलिए उन्होंने सभी से अपने परिवारों के साथ समय बिताने की अपील की. उन्होंने बताया कि दिवाली तक CJP की तरफ से कोई प्रदर्शन आयोजित करने की योजना नहीं है.

समर्थकों से क्या बोले अभिजीत दिपके

एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, हेलो कॉकरोचों, कैसे हैं आप सब? उम्मीद है कि आप सभी ठीक होंगे. मैं देख सकता हूं कि पिछले कुछ दिनों से आप सभी सड़कों पर और अपनी निजी जिंदगी में बहुत संघर्ष कर रहे हैं, और इसी वजह से हम यह लड़ाई लड़ पा रहे हैं. मैं समझ सकता हूं कि आप किन हालात से गुजर रहे हैं’.

‘अपने परिवारों के साथ समय बिताए’

वहीं दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा ‘कुछ दिनों के लिए अपने परिवारों के साथ समय बिताएं. अपने परिवारों और अपनों के साथ रहें. उन्होंने ये भी कहा ‘जब आप अपने परिवारों के साथ हों, तो कृपया सौरव और आशु को याद रखें, क्योंकि वो दोनों अपने परिवारों के साथ नहीं रह सकते. इसलिए, वो हमारे परिवार हैं’.

सौरव और आशुतोष के बारे में क्या बोले दिपके

उन्होंने ये भी कहा कि दोनों की फैसले लेने की क्षमता उनसे बेहतर है. उन्होंने बताया कि सौरव और आशुतोष सिर्फ उनके साथी नहीं, बल्कि उनके भाई और परिवार हैं. उन्होंने कहा कि दोनों की गिरफ्तारी का उन पर भावनात्मक असर पड़ा है. उन्होंने बताया कि उन तीनों का एक अलग WhatsApp ग्रुप था, जिसमें वो लोग मीम्स शेयर करते थे. उन्होंने कहा कि वो अब भी उस ग्रुप को खोलते हैं और उन्हें लगता है कि दोनों अभी भी वहां हैं.

इसके साथ ही दिपके ने ये भी कहा कि अगर किसी ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाया है तो वो आशुतोष और सौरव हैं. उन्होंने कहा कि वो सिर्फ दोनों के आदेशों का पालन करते थे. उन्होंने कहा कि बाहर से ऐसा लग सकता है कि वो नेता थे, लेकिन ऐसा नहीं था. दिपके के मुताबिक सौरव और आशुतोष ही उन्हें बताते थे कि अगले दिन कहां जाना है और क्या करना है. उन्होंने कहा कि सभी बड़े फैसले सौरव और आशुतोष लेते थे.

‘उनकी काबिलियत और उनके फैसले लेने की स्किल बेहतर’

उन्होंने कहा ‘मुझे हमेशा लगता है कि अगर किसी ने सच में यह मूवमेंट किया है, तो वो आशु और सौरव हैं. उन्होंने बहुत बड़ा रोल निभाया है. मैं बस उनके ऑर्डर फॉलो कर रहा था मैं आपको ईमानदारी से बताता हूं मेरा काम बस उनके ऑर्डर फॉलो करना था. बाहर वाले सोच सकते हैं कि मैं लीडर हूं, लेकिन मैं लीडर नहीं था.

वो सौरव और आशु थे. वो मुझसे कहते थे कि मुझे यहां या वहां होना है, और मैं चुपचाप करता था. क्योंकि मुझे पता है कि उनकी काबिलियत और उनके फैसले लेने की स्किल मुझसे बेहतर है. वो ऐसे ही हैं. वो मेरे भाई हैं, और मैं इमोशनल हो रहा हूं क्योंकि मुझे उनकी परवाह है. इसलिए नहीं कि मैं डरता हूं. इमोशन हमारी ताकत हैं’.

फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश से तुलना को किया खारिज

CJP नेता ने मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) के खिलाफ अपने संगठन के विरोध-प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं से किए जाने को भी खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि दास और रंका ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलते हुए खुशी-खुशी जेल जाना स्वीकार किया और नफरत के बजाय शांति को चुना.

उन्होंने कहा ‘जो लोग पिछले कुछ दिनों से फ्रांस में तरह-तरह की हरकतें कर रहे हैं, उन्हें कुछ शर्म आनी चाहिए. भारत में क्या हो रहा है, उसे देखें. भारत में, सौरव दास और आशुतोष मुस्कुराते हुए जेल गए’. उन्होंने कहा कि जेल भेजे जाने के बावजूद CJP नेताओं ने हिंसा का सहारा नहीं लिया और मुस्कुराते हुए अपनी कैद को स्वीकार कर लिया.

‘अहिंसा का पालन करते हुए जेल की सजा काट रहे’

दिपके ने कहा ‘उन्होंने वैसा कुछ नहीं किया जैसा फ्रांस में हो रहा था. जब उन्हें पता चला कि उन्हें गलत तरीके से जेल भेजा जा रहा है, तब भी उन्होंने शांति का रास्ता चुना. उन्होंने करुणा को चुना और वे मुस्कुराते हुए जेल गए. उनके मन में न तो कोई गुस्सा था और न ही कोई नफरत’.

दिपके ने कहा कि भले ही उन्हें लगता था कि उन्हें गलत तरीके से जेल में डाला गया है, फिर भी उन्होंने शांति और करुणा का रास्ता चुना. उन्होंने उनके इस तरीके की तुलना गांधीजी के सत्याग्रह से की और कहा कि वो अहिंसा का पालन करते हुए जेल की सजा काट रहे हैं.

‘महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते शांति और अहिंसा पर चलेंगे’

CJP नेता ने कहा ‘मुझे लगता है कि यह हमारे आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है. मैं कोई तुलना नहीं करना चाहता, लेकिन जब महात्मा गांधी को जेल भेजा गया था, तो वो चुपचाप जेल चले गए थे क्योंकि वो सत्याग्रह कर रहे थे.

आशुतोष और सौरव भी बिल्कुल वैसा ही सत्याग्रह कर रहे हैं’. दिपके ने कहा ‘मैं आपको बता रहा हूं, जब सौरव और आशुतोष जेल से बाहर आएंगे, तो उनके चेहरे पर वैसी ही मुस्कान होगी. वे जेल से बाहर आकर फिर से महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते—शांति और अहिंसा—पर चलेंगे’.

CJP का विरोध प्रदर्शन

CJP और उसके समर्थक मतदाता सूची (electoral rolls) के SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

13 अक्टूबर को, जब जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थलों की सूची से हटा दिया गया था, उसके अगले ही दिन CJP के कार्यकर्ता वहां पहुंच गए, जिसके बाद आशुतोष और सौरव को गिरफ्तार कर लिया गया. शुरुआत में उन्हें पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, और 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई.

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