गुजरात चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा दांव, किसान आक्रोश महासभा से BJP सरकार पर हमला

गुजरात में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है... मोरबी में कांग्रेस ने ‘किसान आक्रोश महासभा’ का आयोजन... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं.. इसी क्रम में कांग्रेस ने मोरबी में ‘किसान आक्रोश महासभा’ का आयोजन कर किसानों से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.. और अपना चुनावी एजेंडा सेट किया है.. वहीं यह महासभा न केवल किसानों की वर्तमान समस्याओं को उजागर करने का माध्यम बनी.. बल्कि विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा भी साबित हुई.. सौराष्ट्र क्षेत्र के मोरबी जिले में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और अपनी पीड़ा को आवाज दी..

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस मौके पर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि किसानों की उपेक्षा जारी है.. रणदीप सिंह सुरजेवाला, अमित चावड़ा और तुषार चौधरी जैसे नेताओं की मौजूदगी ने इस महासभा को राजनीतिक महत्व प्रदान किया.. और उन्होंने सौराष्ट्र-कच्छ को सूखाग्रस्त घोषित करने.. सिंचाई के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बिजली के खंभों के मुआवजे की मांग की.. किसानों ने बताया कि कम वर्षा के कारण फसलें प्रभावित हुई हैं.. और सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा..

बता दें कि इस आयोजन के माध्यम से कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आगामी चुनावों में किसान मुद्दा प्रमुख रहेगा.. पार्टी का मानना है कि भाजपा सरकार ने उद्योगपतियों को राहत दी लेकिन किसानों को नजरअंदाज किया.. मोरबी की इस महासभा में फसल बीमा, उर्वरक की बढ़ती कीमतों.. और कर्ज माफी जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया गया.. नेताओं ने कहा कि किसान अब चुप नहीं बैठेंगे.. और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे..

जिसको लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गुजरात में विधानसभा चुनाव 2027 के अंत में प्रस्तावित हैं.. लेकिन विपक्ष पहले से सक्रिय हो गया है.. कांग्रेस इस महासभा के जरिए ग्रामीण वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है.. सौराष्ट्र क्षेत्र में किसान असंतोष बढ़ रहा है.. क्योंकि सिंचाई परियोजनाएं अधूरी हैं.. और बिजली आपूर्ति अनियमित है.. निजी कंपनियों द्वारा खेतों में बिजली टावर लगाने का मुद्दा भी विवाद का विषय बना हुआ है..

महासभा में मौजूद किसानों ने बताया कि उनकी जमीन पर जबरन खंभे लगाए जा रहे हैं.. और मुआवजा पर्याप्त नहीं मिल रहा.. कांग्रेस नेताओं ने सरकार से तत्काल सर्वेक्षण कर राहत पैकेज जारी करने की मांग की.. और उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री किसानों का शोषण कर रहे हैं.. सुरजेवाला ने किसानों से अपील की कि वे सरकार को सबक सिखाने के लिए वोट दें.. इस अपील ने महासभा का माहौल गरमा दिया.. कांग्रेस का यह कदम चुनावी एजेंडा तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.. पार्टी ने किसानों के कर्ज माफी, उचित फसल मूल्य.. और सिंचाई सुविधाओं को प्राथमिकता दी है.. मोरबी जिले में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व विधायक.. और स्थानीय नेता भी मौजूद रहे.. और उन्होंने स्थानीय स्तर पर किसानों की समस्याओं को विस्तार से रखा.. कम बारिश के कारण बुआई प्रभावित हुई है और कई इलाकों में फसलें सूख रही हैं..

वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों का खंडन किया गया है.. भाजपा का कहना है कि विपक्ष भ्रामक जानकारी फैला रहा है.. और किसानों को गुमराह कर रहा है.. फिर भी कांग्रेस लगातार दबाव बनाए हुए है.. महासभा में पार्टी ने घोषणा की कि वह पूरे राज्य में किसान आक्रोश यात्राएं चलाएगी.. इससे पहले भी सौराष्ट्र में किसान आक्रोश यात्राएं आयोजित की जा चुकी हैं.. किसानों की समस्याएं सिर्फ सूखे तक सीमित नहीं हैं.. बढ़ती इनपुट लागत, उर्वरक की कीमतों में वृद्धि और बाजार में उचित मूल्य न मिलना भी प्रमुख मुद्दे हैं.. कांग्रेस ने एनपीके उर्वरक की कीमत में वृद्धि वापस लेने की मांग की.. पार्टी का तर्क है कि औद्योगिक घरानों को राहत दी जा रही है.. जबकि किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं.. इस असमानता को उजागर करना कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है..

मोरबी महासभा में जनसैलाब उमड़ा। किसानों ने प्लेकार्ड लेकर अपनी मांगें रखीं.. कुछ प्लेकार्ड पर लिखा था कि मुआवजा नहीं मिला तो वोट नहीं देंगे.. यह नारा महासभा का मुख्य आकर्षण बना.. नेताओं ने जय जवान जय किसान के नारे लगाए.. और किसानों से एकजुट रहने की अपील की.. कांग्रेस का दावा है कि वह हमेशा किसानों के हक.. और न्याय के लिए लड़ती रही है.. आगामी विधानसभा चुनावों में गुजरात की राजनीति किसान केंद्रित हो सकती है.. भाजपा लंबे समय से सत्ता में है.. और विकास का दावा करती है.. लेकिन विपक्ष ग्रामीण असंतोष को मुद्दा बना रहा है.. कांग्रेस इस महासभा के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि वह किसानों की असली आवाज है.. पार्टी के प्रभारी सुरजेवाला ने सक्रिय भूमिका निभाई और किसानों से सीधा संवाद किया..

 

 

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