AI से पेपर बनाने पर छिड़ी बहस, सुपर 30 के आनंद कुमार ने बताए 3 कारण
परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स गठित की थी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: NEET पेपर लीक विवाद के बाद देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स गठित की थी। इस टास्क फोर्स ने अपना काम शुरू कर दिया है। इसी बीच परीक्षा में पेपर लीक की समस्या का समाधान तलाशने के लिए नंदन नीलेकणि ने प्रश्न बैंक तैयार करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से प्रश्नपत्र बनाने का सुझाव दिया है।
नीलेकणि के इस विचार के बाद शिक्षा जगत में नई बहस शुरू हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या AI की मदद से प्रश्नपत्र तैयार करना प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित बना सकता है? क्या इससे पेपर लीक की आशंका कम होगी? या फिर परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल के साथ कुछ नई चुनौतियां भी सामने आएंगी?
इसी बहस के बीच सुपर 30 के संस्थापक और जाने-माने गणित शिक्षक आनंद कुमार ने नंदन नीलेकणि के सुझाव से असहमति जताई है। उन्होंने इस विचार को लेकर तीन कारण बताए हैं। उनके नजरिए से यह बहस केवल तकनीक के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों के मूल्यांकन और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से भी जुड़ी है।
आनंद कुमार ने असहमति के लिए दिए तीन कारण
सुपर 30 वाले आनंद कुमार ने पेपर लीक रोकने के लिए अंतिम समय AI की मदद से पेपर तैयार करने संबंधी नंदन नीलेकणि के सुझाव को लेकर असहमति जताई है. इसको लेकर उन्होंने तीन कारण दिए हैं. आनंद कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट लिखकर कहा है कि नंदन नीलेकणि केप्रति मेरे मन में हमेशा गहरा सम्मान रहा है, लेकिन हाल ही में NEET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए अंतिम समय में AI की मदद लेने का जो सुझाव उन्होंने दिया है, उससे मैं विनम्रतापूर्वक असहमत हूं. आंनदन कुमार ने कहा किमेरी असहमति के पीछे तीन महत्वपूर्ण कारण हैंआइए, जानते हैं कि उन्होंने कौन से तीन कारण बताए हैं.
दूरदराज गांवों में अभी भी कंप्यूटर की पहुंच नहीं
सुपर 30 वाले आंनद कुमार ने असहमित का पहला कारण बताते हुए कहा है किपेपर लीक रोकना बेहद जरूरी है, लेकिन इसके लिए पूरी परीक्षा व्यवस्था को कंप्यूटर आधारित बना देना उचित नहीं है. उन्होंने कहा, हमारे देश के दूरदराज के गांवों और गरीब परिवारों में आज भी लाखों ऐसे प्रतिभाशाली बच्चे हैं, जिनकी कंप्यूटर तक पर्याप्त पहुंच नहीं है. कहीं ऐसा न हो कि नकल रोकने की कोशिश में हम उन बच्चों के सामने एक नई बाधा खड़ी कर दें.
क्या सभी सेंटरों की सुविधा मेंट्रो सिटी जैसी होगी
दूसरा कारण बताते हुए उन्होंने सवाल उठाते हुए लिखा है कि अगर सुदूरवर्ती इलाके में कोई टेस्ट लेने के लिए सेंटर भी बनाया जाएगा. तो तब वहां क्या उपलब्ध सुविधा और सुरक्षा मेट्रो सिटी के सेंटर जैसी होगी?
सवाल सही होने की गांरटी किसकी
आपत्ति का तीसरा प्रमुख कारण बताते हुए आनंद कुमार ने कहा है कि यह बड़ी आम बात होती हैं कि विभिन्न परीक्षाओं के लिए बनाये गए सवाल में लगभग हर वर्ष गलतियां निकल जातीं हैं, जबकि सवालों की संख्या बहुत कम होती है. अब जब हजारों सवालों का क्वेश्चन बैंक बनाया जाएगा, जिससे AI लास्ट मिनिट में क्वेश्चन सलेक्ट करेगा, तब क्या गारंटी है कि सभी सवाल सही हों .
पेपर लीक रोकने के लिए व्यवस्थाओं की कमी को दूर करना होगा
सुपर 30 वाले आनंद कुमार ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि वह तकनीक या AI का विरोधी नहीं हैं. वह इस बात से सहमत हैं कि AI शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. प्रश्नपत्र बनाने में भी यह विशेषज्ञों की सहायता कर सकता है, लेकिन सहायता करने और अंतिम निर्णय लेने में बहुत बड़ा अंतर है.
आनंद कुमार ने कहा है कि वह पिछले कई दशकों से स्टूडेंट्स के साथ काम कर रहे हैं और AI की संभावनाओं को समझते हैं. इन अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा है कि पेपर लीक रोकने के लिए व्यवस्था की कमजोरियां दूर करनी होंगी. ऐसी किसी नई व्यवस्था की जरूरत नहीं है, जिसमें गरीब और प्रतिभाशाली बच्चों के लिए अवसर और कठिन हो जाएं.
आनंद कुमार का कहना है कि परीक्षा का असली उद्देश्य तकनीक की ताकत दिखाना नहीं, बल्कि देश के हर कोने में छिपी प्रतिभा को पहचानना है और हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि एक गलती का नुकसान सिर्फ कुछ नंबर नहीं, किसी बच्चे का पूरा सपना भी हो सकता है.



