अफगानिस्तान में एक बार फिर भूकंप के झटके, अब तक 2200 से अधिक लोगों की मौत

भूकंप से कई गांव तबाह हो गए और लोग मिट्टी, कच्ची ईंटों और लकड़ी से बने मकानों के मलबे में दब गए, जो इस झटके को सहन नहीं कर पाए.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: 31 अगस्त की रात आए 6.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने कई प्रांतों को हिला दिया, जिससे भारी तबाही हुई. भूकंप से कई गांव तबाह हो गए और लोग मिट्टी, कच्ची ईंटों और लकड़ी से बने मकानों के मलबे में दब गए, जो इस झटके को सहन नहीं कर पाए.

अफगानिस्तान में आज तड़के तीन बजकर 16 मिनट पर एक बार फिर भूकंप आया. इस बार भूकंप की तीव्रता 4.9 रही. वहीं अफगानिस्तान में गुरुवार देर रात 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था. इससे पहले 4.8 तीव्रता का भूकंप आया था. वहीं 31 अगस्त की रात अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2200 से अधिक हो गई है.

दरअसल अफगानिस्तान में पिछले महीने की 31 तरीख को आए भूकंप में तबाह हुए घरों से सैकड़ों शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 2,200 से ज्यादा हो गई है. तालिबान सरकार के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को यह जानकारी दी.

रविवार (31 अगस्त) रात आए 6.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने कई प्रांतों को हिला दिया, जिससे भारी तबाही हुई. भूकंप से कई गांव तबाह हो गए और लोग मिट्टी, कच्ची ईंटों और लकड़ी से बने मकानों के मलबे में दब गए, जो इस झटके को सहन नहीं कर पाए. ज्यादातर जान-माल की हानि कुनार में हुई है, जहां लोग ऊंचे पहाड़ों से घिरी नदी की घाटियों में रहते हैं.

तालिबान के प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने बताया कि बचाव और खोज अभियान जारी हैं. उन्होंने कहा, लोगों के लिए तंबू लगाए गए हैं और प्राथमिक चिकित्सा उपचार मुहैया कराया जा रहा है. साथ ही जरूरी सामान की आपूर्ति की जा रही है. खराब रास्ते और धन की कमी बचाव एवं राहत कार्यों में बाधा बन रही है और सहायता संगठन देशों से अधिक मदद की अपील कर रहे हैं.

आपको बता दें कि भूंप का केंद्र अफगानिस्तान के पांचवें बड़े शहर जलालाबाद से 27 किलोमीटर दूर, सतह से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में था. 31 अगस्त की रात को आए इस भूकंप के कारण मिट्टी और पत्थर से बने घर ढह गए. भूकंप के झटके वहां से क़रीब 400 किलोमीटर दूर, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक महसूस किए गए. भूकंप से दूर दराज के पहाड़ी इलाके प्रभावित हुए हैं जहां मोबाइल सिग्नल का बहुत सीमित कवरेज है और भूस्खलन से सड़कें बंद हैं.

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